Railway Safety Alert: खुर्जा ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने कैसे आईं? रेलवे बोर्ड चेयरमैन सतीश कुमार ने Moradabad मंडल से मांगा जवाब
News-Desk
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Indian Railways, Khurja Incident, moradabad, Muradabad Division, Rail Operations, Railway Board, railway safety, Train Accident NewsKhurja railway track incident ने एक बार फिर भारतीय रेल की संरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के खुर्जा स्टेशन पर 29 दिसंबर को एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आ जाने की गंभीर घटना को लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर सख्ती दिखाई गई है। शनिवार को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए Moradabad रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम पर तीखे सवाल किए।
🔴 रेलवे बोर्ड की सीधी पूछताछ, खुर्जा घटना पर फोकस
रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि आखिर 29 दिसंबर को खुर्जा में ऐसा कैसे संभव हुआ कि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें पहुंच गईं। यह सवाल केवल तकनीकी नहीं था, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा हुआ था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुरादाबाद मंडल के डीआरएम राजकुमार सिंह ने अपने निरीक्षण के दौरान जुटाई गई प्रारंभिक जानकारियां बोर्ड के सामने रखीं।
🔴 एक नहीं, तीन विभागों की भूमिका जांच के घेरे में
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि खुर्जा की यह गंभीर चूक किसी एक सुपरवाइजर या एक विभाग की लापरवाही का नतीजा नहीं थी। माना जा रहा है कि इसमें कम से कम तीन विभागों के कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
फिर भी, ऑपरेटिंग विभाग की भूमिका को सबसे ज्यादा संदिग्ध माना जा रहा है, क्योंकि आरोप है कि एक ट्रेन के पूरी तरह निकलने से पहले ही दूसरी ट्रेन को क्लियर सिग्नल दे दिया गया।
🔴 स्टेशन मास्टर के निर्देश और बड़ा खतरा
जांच में यह भी सामने आया है कि स्टेशन मास्टर के निर्देश पर कर्मचारियों ने दूसरी ट्रेन को निकालने के लिए ट्रैक का रास्ता बनाया था। यह फैसला अत्यंत जोखिम भरा साबित हो सकता था। गनीमत यह रही कि दोनों ट्रेनें करीब 150 मीटर की दूरी पर ही रुक गईं, जिससे एक बड़ा रेल हादसा टल गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि थोड़ी सी भी देर होती या ब्रेकिंग में चूक हो जाती, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।
🔴 रेलवे बोर्ड का सख्त निर्देश: जल्द पूरी हो जांच
Railway Board की ओर से मुरादाबाद मंडल को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी कर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए। बोर्ड इस घटना को ‘नियर मिस’ नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर के रूप में देख रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
🔴 रोजा हादसे पर भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान मुरादाबाद मंडल के रोजा क्षेत्र में हुई एक और दुखद घटना पर भी चर्चा की गई। करीब 10 दिन पहले रेलवे क्रॉसिंग पार करते समय गरीबरथ एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक ही परिवार के पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
रेलवे बोर्ड को बताया गया कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां रेलवे का आधिकारिक फाटक मौजूद नहीं था। दुर्घटना के बाद एहतियातन उस जगह को चाहरदीवारी कर बंद करा दिया गया है, ताकि भविष्य में कोई और व्यक्ति उस रास्ते से ट्रैक पार न कर सके।
🔴 संरक्षा पर जोर, मानवीय भूल न बने हादसे की वजह
Railway Safety Review के दौरान चेयरमैन सतीश कुमार ने स्पष्ट कहा कि मानवीय भूल किसी भी हाल में बड़े हादसे का कारण नहीं बननी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक ट्रेन में केवल यात्री नहीं, बल्कि करीब 1000 परिवारों की खुशियां, उम्मीदें और भरोसा सफर करता है।
इसलिए ट्रेन संचालन, सिग्नलिंग और ग्राउंड-लेवल समन्वय में बेहद सावधानी और सतर्कता जरूरी है। बोर्ड ने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में ऐसी चूक पर जवाबदेही तय की जाएगी।
🔴 रेलवे सिस्टम के लिए चेतावनी की घंटी
खुर्जा की घटना और रोजा का हादसा दोनों ही यह दिखाते हैं कि तकनीक के साथ-साथ मानवीय जिम्मेदारी कितनी अहम है। रेलवे प्रशासन अब संरक्षा से जुड़े हर स्तर की समीक्षा कर रहा है, ताकि छोटी-सी चूक किसी बड़े हादसे में न बदल जाए।

