Moradabad में तेंदुए का आतंक: महिला पर हमले के 36 घंटे बाद भरतपुर में पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ, अब तक 16 पकड़े गए
News-Desk
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हालांकि वन विभाग ने इस तेंदुए के पकड़े जाने के बाद भी जल्दबाजी में यह दावा नहीं किया है कि यही वही तेंदुआ है जिसने महिला पर हमला किया था। अधिकारियों के अनुसार तेंदुओं की पहचान करना आसान नहीं होता। इसलिए केवल हमले वाले स्थान पर उसी इलाके में तेंदुआ पकड़े जाने के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती।
महिला पर हमले के बाद से ही गांव और आसपास के इलाके में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी और सर्च अभियान चला रही थीं। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पारंपरिक खोज के साथ ड्रोन की भी मदद ली गई। कांठ, मुरादाबाद और ठाकुरद्वारा से वन विभाग की टीमें भरतपुर गांव में कैंप कर रही थीं।
15 सितंबर की शाम गन्ने के खेत से निकला था तेंदुआ
घटना 15 सितंबर की शाम की है। भरतपुर गांव की रहने वाली 39 वर्षीय निर्वेश देवी उस समय घास काट रही थीं। इसी दौरान अमर सिंह के गन्ने के खेत से अचानक एक तेंदुआ बाहर आया और उसने निर्वेश देवी पर हमला कर दिया।
अचानक हुए हमले से महिला घायल हो गईं। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायल निर्वेश देवी को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी हालत में सुधार बताया गया है। महिला पर हुए हमले के बाद गांव में तेंदुए को लेकर चिंता और सतर्कता बढ़ गई। वन विभाग ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान तेज कर दिया।
गन्ने के खेत और आसपास का इलाका तेंदुए की मौजूदगी की आशंका के कारण विशेष निगरानी में रखा गया। टीमों ने संभावित रास्तों और उन स्थानों पर भी नजर रखी जहां तेंदुआ छिप सकता था।
हमले के बाद वन विभाग ने चलाया सघन सर्च ऑपरेशन
महिला पर हमले के बाद वन विभाग की टीमों ने भरतपुर और उसके आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। तेंदुए की तलाश में जमीन पर खोजबीन के साथ तकनीकी साधनों का भी इस्तेमाल किया गया।
अभियान के दौरान ड्रोन के माध्यम से भी इलाके की निगरानी की गई। खेतों, झाड़ियों और संभावित ठिकानों पर नजर रखी गई ताकि तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
तेंदुए जैसे वन्यजीव घनी वनस्पति, गन्ने के खेत और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में आसानी से छिप सकते हैं। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में किसी तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद उसका पता लगाना और सुरक्षित तरीके से पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण काम होता है।
भरतपुर में भी वन विभाग की टीमों ने लगातार निगरानी बनाए रखी। कांठ, मुरादाबाद और ठाकुरद्वारा से आई टीमें मौके पर कैंप कर रही थीं।
दो पिंजरे लगाए गए, लगातार होती रही निगरानी
तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए वन विभाग ने भरतपुर में दो पिंजरे लगाए थे। इन पिंजरों के आसपास की गतिविधियों पर टीम लगातार नजर रख रही थी।
रेंजर राजेश कुमार शर्मा और डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीमों ने अभियान को आगे बढ़ाया। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने संभावित गतिविधि वाले क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखी।
तेंदुए को पकड़ने के लिए केवल पिंजरा लगाना ही पर्याप्त नहीं होता। वन्यजीव की गतिविधियों, उसके आने-जाने के संभावित रास्तों और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पिंजरे की निगरानी करनी पड़ती है।
भरतपुर में भी इसी तरह लगातार निगरानी की जा रही थी। आखिरकार 17 सितंबर की सुबह वन विभाग के पिंजरे में तेंदुआ कैद हो गया।
जिस जगह महिला पर हमला हुआ, उसी स्थान पर कैद हुआ तेंदुआ
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि तेंदुआ उसी स्थान पर लगे पिंजरे में कैद हुआ, जहां 15 सितंबर को महिला पर हमला हुआ था।
महिला पर हमले और तेंदुए के पकड़े जाने के बीच करीब 36 घंटे का अंतर रहा। इससे इलाके में चल रहे सर्च अभियान को एक बड़ी सफलता मिली।
हालांकि स्थान समान होने के बावजूद वन विभाग ने तेंदुए की पहचान को लेकर सावधानी बरती है। अधिकारियों के अनुसार तेंदुओं को केवल देखकर या उनके क्षेत्र में पकड़े जाने के आधार पर अलग-अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए यह कहना कि पकड़ा गया तेंदुआ निश्चित रूप से निर्वेश देवी पर हमला करने वाला वही जानवर है, अभी संभव नहीं है।
वन विभाग ने क्यों नहीं कहा कि यही हमलावर तेंदुआ है?
तेंदुए की पहचान को लेकर वन विभाग का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण है। किसी इलाके में एक से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी हो सकती है और अलग-अलग तेंदुओं को सामान्य दृश्य पहचान के आधार पर अलग करना कठिन हो सकता है।
यही कारण है कि महिला पर हमले के स्थान के पास तेंदुआ पकड़े जाने के बावजूद विभाग ने इसे हमलावर तेंदुआ घोषित नहीं किया है।
यह सावधानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वन्यजीवों से जुड़े मामलों में बिना पर्याप्त प्रमाण किसी जानवर को किसी विशेष हमले के लिए जिम्मेदार बताना उचित नहीं होता।
डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह ने भी बताया कि अब तक 16 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी को लेकर वन विभाग लंबे समय से सक्रिय रहा है।
पकड़ी गई तेंदुआ मादा और करीब पांच वर्ष की
वन विभाग के पिंजरे में कैद तेंदुए की जांच के बाद उसकी उम्र करीब पांच वर्ष बताई गई। यह तेंदुआ मादा है।
पकड़े जाने के बाद उसे डियर पार्क ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका मेडिकल परीक्षण किया। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
वन्यजीव को पकड़ने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण महत्वपूर्ण होता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि जानवर किसी चोट, बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्या से तो प्रभावित नहीं है।
डियर पार्क में किए गए मेडिकल परीक्षण के बाद तेंदुए की स्थिति सामान्य और स्वस्थ पाई गई।
मेडिकल जांच के बाद सामने आई अहम जानकारी
तेंदुए का मेडिकल परीक्षण किए जाने से यह भी सुनिश्चित किया गया कि पिंजरे में पकड़े जाने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति कैसी है। चिकित्सकों ने जांच के दौरान उसे स्वस्थ पाया।
वन्यजीवों को पकड़ने की कार्रवाई में सुरक्षा केवल इंसानों के लिए नहीं, बल्कि जानवर के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। तेंदुए जैसे वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से पकड़ना और उसके बाद उसकी स्थिति की जांच करना पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
इस मामले में भी वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के बाद चिकित्सकीय परीक्षण कराया।
अब तक 16 तेंदुए पकड़े जाने की जानकारी
डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह के अनुसार अब तक 16 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। यह आंकड़ा मुरादाबाद क्षेत्र में तेंदुए से जुड़े मामलों की गंभीरता और वन विभाग द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई को सामने रखता है।
तेंदुओं की मौजूदगी ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोगों के लिए चिंता का कारण बन जाती है, खासकर तब जब खेतों या आबादी के आसपास उनकी गतिविधियां दिखाई दें। गन्ने जैसे घने खेत तेंदुओं को छिपने के लिए प्राकृतिक आवरण भी उपलब्ध करा सकते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती होती है—एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी ओर वन्यजीव को सुरक्षित पकड़ना।
कांठ, मुरादाबाद और ठाकुरद्वारा की टीमें मौके पर रहीं
भरतपुर गांव में चलाए गए अभियान में अलग-अलग क्षेत्रों की वन विभाग की टीमें शामिल रहीं। कांठ, मुरादाबाद और ठाकुरद्वारा से टीमें मौके पर कैंप कर रही थीं।
रेंजर राजेश कुमार शर्मा और डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में अभियान को आगे बढ़ाया गया। टीमों ने इलाके में लगातार निगरानी रखी और तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया।
ड्रोन की सहायता से निगरानी किए जाने से खेतों और अन्य संभावित क्षेत्रों को ऊपर से देखने में मदद मिली। इसके साथ ही पिंजरों की निगरानी भी जारी रखी गई।
कई घंटे की निगरानी के बाद आखिरकार 17 सितंबर की सुबह पिंजरे में तेंदुआ कैद हो गया।
गन्ने के खेतों के आसपास विशेष सतर्कता क्यों जरूरी
भरतपुर की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में गन्ने के खेतों और वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच संबंध को चर्चा में ला दिया है। घने खेत वन्यजीवों को छिपने का स्थान दे सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
घास काटने या खेतों में काम करने के दौरान आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। यदि किसी इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना हो, तो अकेले खेत में जाने से बचना और स्थानीय प्रशासन या वन विभाग की सलाह का पालन करना अधिक सुरक्षित रहता है।
खेतों में काम करने वाले लोगों को झाड़ियों या घनी फसल में जाने से पहले आसपास की स्थिति देखनी चाहिए। अचानक किसी वन्यजीव का सामना होने पर उसे घेरने या पकड़ने की कोशिश करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी होता है।
तेंदुआ दिखाई दे तो क्या सावधानी बरतें?
तेंदुए जैसे वन्यजीव को देखकर घबराकर उसके पास जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उसे घेरने, पत्थर मारने या भीड़ जमा करके पीछा करने से स्थिति खतरनाक हो सकती है।
यदि किसी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी हो तो बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बचना चाहिए और खेतों या सुनसान स्थानों पर जाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
वन विभाग या स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। किसी वन्यजीव को स्वयं पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश करना इंसान और जानवर दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
महिला पर हमले के बाद गांव में बढ़ी थी चिंता
15 सितंबर की घटना के बाद भरतपुर गांव में स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल था। एक महिला के घायल होने के बाद ग्रामीण तेंदुए की मौजूदगी को लेकर सतर्क हो गए थे।
खासकर खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए यह चिंता अधिक रही होगी, क्योंकि तेंदुए के छिपे होने की आशंका के बीच रोजमर्रा के कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
वन विभाग की टीमों के लगातार मौके पर रहने और तलाशी अभियान चलाने से लोगों को स्थिति पर नजर रखे जाने का भरोसा मिला। इसके बाद 17 सितंबर की सुबह तेंदुए के पिंजरे में कैद होने की खबर सामने आई।
36 घंटे में मिली बड़ी कामयाबी, लेकिन पहचान का सवाल बाकी
महिला पर हमले के लगभग 36 घंटे बाद तेंदुए के पकड़े जाने से अभियान को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ ही निर्वेश देवी पर हमला करने वाली थी।
वन विभाग की ओर से यही सबसे महत्वपूर्ण सावधानी सामने आई है। अधिकारियों ने तेंदुओं की पहचान को कठिन बताते हुए किसी निश्चित निष्कर्ष से बचने की बात कही है।
इसलिए इस घटनाक्रम को इस तरह समझना जरूरी है कि महिला पर हमले वाले क्षेत्र में एक तेंदुआ पकड़ा गया है, लेकिन उसकी हमले में संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है।
वन्यजीव और इंसानी आबादी के बीच बढ़ता संपर्क
ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए और मानव आबादी के बीच संपर्क की घटनाएं कई कारणों से सामने आती हैं। खेत, झाड़ियां और आबादी के आसपास के खुले क्षेत्र कई बार वन्यजीवों के आवागमन के रास्ते बन जाते हैं।
ऐसे मामलों में केवल तेंदुए को पकड़ना ही पूरी समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता। वन्यजीवों की गतिविधियों को समझना, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना और ग्रामीणों को जागरूक करना भी जरूरी होता है।
वन विभाग के लिए चुनौती यह होती है कि लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के नियमों का भी पालन किया जाए। इसी संतुलन के साथ रेस्क्यू और कैप्चर ऑपरेशन किए जाते हैं।
मुरादाबाद में पहले भी पकड़े जा चुके हैं कई तेंदुए
डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह के अनुसार अब तक 16 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। यह जानकारी बताती है कि मुरादाबाद क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों से जुड़े मामलों पर वन विभाग लगातार कार्रवाई करता रहा है।
हर मामले में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। किसी स्थान पर तेंदुआ दिखाई दे सकता है, कहीं उसके पदचिह्न मिल सकते हैं और किसी घटना में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन सकती है।
ऐसे में वन विभाग की टीमों को हर बार स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनानी पड़ती है। भरतपुर में भी टीमों ने दो पिंजरे लगाने, ड्रोन से निगरानी करने और लगातार कैंप करने जैसी कार्रवाई की।
ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी है सतर्कता
भरतपुर की घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता का महत्व एक बार फिर सामने आया है। तेंदुआ पकड़े जाने के बाद भी लोगों को वन विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करते रहना चाहिए, खासकर तब जब आसपास अन्य तेंदुओं की मौजूदगी की संभावना हो।
किसी इलाके में एक तेंदुआ पकड़े जाने का अर्थ यह जरूरी नहीं कि आसपास कोई अन्य वन्यजीव मौजूद नहीं है। इसलिए वन विभाग की निगरानी और स्थानीय स्तर पर सावधानी दोनों आवश्यक हैं।
खेतों में जाने वाले लोगों को समूह में जाने, आसपास की स्थिति पर नजर रखने और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने जैसी सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए।
निर्वेश देवी की हालत में सुधार
तेंदुए के हमले में घायल हुईं 39 वर्षीय निर्वेश देवी का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी हालत में सुधार है।
घटना के बाद उनका अस्पताल में इलाज कराया गया। महिला पर हमला उस समय हुआ जब वह घास काट रही थीं। इस घटना ने खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा की।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और पशुओं के लिए घास काटना लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा है। इसलिए वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों के दौरान सावधानी और विभागीय जागरूकता दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
अब वन विभाग की निगरानी पर रहेगी नजर
भरतपुर में तेंदुआ पकड़े जाने के बाद अभियान का एक अहम चरण पूरा हो गया है। पकड़ी गई मादा तेंदुआ करीब पांच वर्ष की है और मेडिकल परीक्षण में स्वस्थ पाई गई है।
फिर भी वन विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उसकी पहचान को लेकर निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि यही वही तेंदुआ है जिसने निर्वेश देवी पर हमला किया था।
इसलिए क्षेत्र में निगरानी का महत्व बना रहेगा। वन विभाग की टीमें आगे भी स्थिति पर नजर रख सकती हैं और यदि आसपास किसी अन्य तेंदुए की गतिविधि सामने आती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भरतपुर में हुई यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने लाती है। एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, तो दूसरी ओर वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित और संरक्षित करना भी जरूरी है। 15 सितंबर की घटना के बाद शुरू हुआ सघन सर्च अभियान, ड्रोन से निगरानी, दो पिंजरों की तैनाती और कई टीमों की लगातार मौजूदगी के बाद 17 सितंबर की सुबह मादा तेंदुआ पकड़ा गया। अब तक 16 तेंदुए पकड़े जाने की जानकारी के बीच वन विभाग के सामने अगली चुनौती क्षेत्र में किसी अन्य वन्यजीव गतिविधि पर नजर बनाए रखने की है।

