Moradabad में तालाब की जमीन पर कार्रवाई: मस्जिद के वजूखाने पर चला बुलडोजर, पैमाइश के बाद प्रशासन ने हटाया अवैध निर्माण











Moradabad प्रशासन ने सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम डिडोरी में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मस्जिद से जुड़े एक वजूखाने के हिस्से को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज भूमि पर किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई पूरी राजस्व प्रक्रिया, पैमाइश और जांच के बाद की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल उस हिस्से तक सीमित रही जिसे सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया गया था और मुख्य मस्जिद को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई।
डीएम को मिली शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन को सूचना प्राप्त हुई थी कि सदर तहसील के ग्राम डिडोरी में स्थित गाटा संख्या-182 की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 (1) के अंतर्गत तालाब के रूप में दर्ज है, उसके एक हिस्से पर निर्माण किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लगभग 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में पक्का निर्माण कर वजूखाना बनाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए।
तालाब और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि को संरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल माना जाता है। इसी कारण मामले की राजस्व स्तर पर विस्तृत जांच कराई गई।
राजस्व टीम ने की पैमाइश, मौके पर किया गया सत्यापन
एसडीएम सदर अभय सिंह के नेतृत्व में एक विशेष राजस्व टीम गठित की गई। टीम ने संबंधित भूमि का रिकॉर्ड खंगाला और मौके पर पहुंचकर पैमाइश की।
अधिकारियों के अनुसार पैमाइश के दौरान भूमि की सीमाओं का निर्धारण किया गया और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया गया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित निर्माण का एक हिस्सा तालाब की भूमि के दायरे में आ रहा है।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया और स्थानीय स्तर पर स्थिति का सत्यापन भी किया गया।
मस्जिद कमेटी की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
शुक्रवार को राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार इस दौरान मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल वजूखाने के उस हिस्से पर की गई जिसे कथित रूप से सरकारी भूमि पर बनाया गया था। मुख्य मस्जिद संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख
ध्वस्तीकरण के बाद राजस्व अधिकारियों ने दोहराया कि सरकारी भूमि, तालाब, चारागाह, सड़क और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि प्रदेशभर में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजस्व विभाग लगातार ऐसे मामलों की जांच कर रहा है जहां सरकारी भूमि पर निर्माण या कब्जे की शिकायतें सामने आती हैं।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले भूमि की कानूनी स्थिति और स्वामित्व की जानकारी अवश्य सुनिश्चित करें।
तालाबों और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण पर जोर
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब केवल जल स्रोत नहीं होते, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भूजल स्तर बनाए रखने, वर्षा जल संचयन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में इनका विशेष योगदान होता है।
इसी कारण सरकार और प्रशासन द्वारा तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। मुरादाबाद की यह कार्रवाई भी उसी व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।
प्रशासन ने दी चेतावनी, आगे भी जारी रहेगा अभियान
राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन द्वारा सार्वजनिक भूमि पर किए गए अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।








