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Muzaffarnagar में नशीली दवाओं के बड़े नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, 2.64 लाख कैप्सूल-गोलियां बरामद; वांछित आरोपी गिरफ्तार

Muzaffarnagar पुलिस ने मादक पदार्थों की अवैध सप्लाई करने वाले कथित नेटवर्क के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई की है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने ऑपरेशन सवेरा के तहत एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं, नकदी और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही बलेनो कार बरामद हुई है।

पुलिस के मुताबिक बरामदगी में 1,44,000 नशीले कैप्सूल और 1,20,000 नशीली गोलियां शामिल हैं। यानी कुल 2,64,000 कैप्सूल और गोलियां पुलिस के हाथ लगी हैं। इसके अलावा 3,900 रुपये नकद और एक बलेनो कार संख्या यूपी 14 सीवी 2325 भी बरामद की गई है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी पहले पकड़े जा चुके तीन कथित तस्करों को नशीली दवाओं की सप्लाई करता था। अब जांच का फोकस इस नेटवर्क के आगे और पीछे जुड़े लोगों तक पहुंचने पर है।

ऑपरेशन सवेरा के तहत सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई

जनपद में नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध बिक्री के खिलाफ पुलिस द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना सिविल लाइन पुलिस ने यह कार्रवाई की।

यह कार्रवाई मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक और सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी के निर्देशन में की गई। पुलिस के अनुसार, एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में एसपी सिटी अमृत जैन, सीओ सिटी सिद्धार्थ के. मिश्रा और थाना प्रभारी सिविल लाइन इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

पुलिस ने बताया कि पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए आगे की कार्रवाई की गई।

राणा चौक के पास मुखबिर की सूचना पर दबोचा

पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि मामले में वांछित आरोपी क्षेत्र में मौजूद है और किसी स्थान पर जाने की तैयारी में है।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने राणा चौक के पास फैक्ट्रियों की ओर जाने वाले रास्ते पर कार्रवाई की। यहां से पुलिस ने वांछित अभियुक्त जुफैन उर्फ नवाब, उम्र 26 वर्ष, को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, जुफैन उर्फ नवाब यूनुस का पुत्र है और मदरसा चौधरियान मीरारेती, थाना गढ़मुक्तेश्वर, जनपद हापुड़ का निवासी बताया गया है।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से नशीली दवाओं की बड़ी खेप बरामद करने का दावा किया।

छह कार्टून में मिले 1.44 लाख नशीले कैप्सूल

पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से स्पास्मोविल ट्रामाडोल कैप्सूल के छह कार्टून बरामद किए गए।

इन छह कार्टूनों में कुल 1,44,000 कैप्सूल होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं की बरामदगी ने जांच एजेंसियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित कर दिया है कि यह खेप कहां से आई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

पुलिस अब कथित सप्लाई चेन की अन्य कड़ियों की जानकारी जुटा रही है।

दो कार्टून में 1.20 लाख नशीली गोलियां भी बरामद

कैप्सूल के अलावा पुलिस ने एल्प्राजोलम की नशीली गोलियों की बड़ी खेप भी बरामद करने की जानकारी दी है।

पुलिस के मुताबिक, दो कार्टूनों में कुल 1,20,000 गोलियां थीं।

इस तरह कैप्सूल और गोलियों को मिलाकर पुलिस के अनुसार कुल 2 लाख 64 हजार नशीली दवाएं बरामद की गई हैं।

इतनी बड़ी बरामदगी मामले को केवल स्थानीय स्तर की बिक्री से आगे संभावित सप्लाई नेटवर्क की दिशा में ले जाती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर दवाओं की खरीद, भंडारण और सप्लाई का पूरा तंत्र किस तरह काम कर रहा था।

बलेनो कार और नकदी भी पुलिस के कब्जे में

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 3,900 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा एक बलेनो कार यूपी 14 सीवी 2325 भी पुलिस ने जब्त की है।

पुलिस के अनुसार, कार का इस्तेमाल नशीली दवाओं की कथित तस्करी में किया जा रहा था।

वाहन की भूमिका और उसके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि वाहन से पहले किन स्थानों पर आवाजाही हुई और कथित तौर पर दवाओं की सप्लाई किन लोगों तक पहुंचाई गई।

एक दिन पहले तीन तस्करों की गिरफ्तारी से खुली थी कड़ी

इस कार्रवाई की कड़ी पिछले दिन की पुलिस कार्रवाई से जुड़ी बताई गई है।

सिविल लाइन पुलिस ने माल रोड से तीन आरोपियों—दीपक, कलीम और जुनैद—को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने उस कार्रवाई के दौरान 72,000 नशीले कैप्सूल, 549 नशीले इंजेक्शन और एक बलेनो कार बरामद करने का दावा किया था।

इस संबंध में थाना सिविल लाइन में मु0अ0सं0 224/26 के तहत धारा 8/21/22 एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था।

तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने उनके कथित सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू की।

फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक खंगाल रही पुलिस

नशीली दवाओं के मामलों में पुलिस के लिए केवल स्थानीय स्तर पर पकड़े गए आरोपियों की भूमिका जानना ही पर्याप्त नहीं होता। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना भी होता है कि दवाएं कहां से आईं और आगे कहां भेजी जानी थीं।

इसी को ध्यान में रखते हुए सिविल लाइन पुलिस ने कथित गिरोह के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच शुरू की।

बैकवर्ड लिंक के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर दवाओं की आपूर्ति कहां से हुई। वहीं फॉरवर्ड लिंक के तहत उन लोगों और स्थानों की जानकारी जुटाई जा रही है जहां ये दवाएं पहुंचाई जानी थीं।

जुफैन उर्फ नवाब की गिरफ्तारी को पुलिस इसी जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी बता रही है।

पूछताछ में अमरोहा के विक्रेता का नाम सामने आने का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी जुफैन ने बताया कि वह अमरोहा के एक विक्रेता से कथित तौर पर नशीली दवाएं खरीदता था।

पुलिस का कहना है कि इसके बाद वह इन दवाओं को जुनैद, दीपक और कलीम को सप्लाई करता था।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कथित सप्लाई चैन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका पुलिस जांच का विषय है।

यदि जांच में यह कड़ी पुष्ट होती है तो मामले का नेटवर्क मुजफ्फरनगर से बाहर दूसरे जिलों तक भी जुड़ा हुआ सामने आ सकता है।

युवाओं को महंगे दाम पर बेचने का आरोप

पुलिस पूछताछ के हवाले से बताया गया है कि ऐसी दवाएं सामान्य रूप से डॉक्टर के पर्चे के बिना उपलब्ध नहीं होतीं। आरोप है कि इन्हें नशे के लिए इस्तेमाल करने वाले युवाओं को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।

इससे कथित नेटवर्क अवैध मुनाफा कमाता था।

नशीली दवाओं का दुरुपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। खासकर युवाओं में दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर परिवारों और प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ सकती है।

साथियों की गिरफ्तारी के बाद खेप लेने पहुंचा था आरोपी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में जुफैन ने बताया कि उसके साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे। इसके बाद वह कथित तौर पर छिपाकर रखी गई दवाओं की खेप लेने के लिए संबंधित स्थान पर पहुंचा था।

इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस ने उसके कब्जे से दवाओं की खेप बरामद करने का दावा किया है।

अब पुलिस यह जांच कर रही है कि खेप कहां छिपाई गई थी, उसे वहां किसने पहुंचाया और आगे इसे किसे सौंपा जाना था।

बरामदगी ने बढ़ाई नेटवर्क की जांच की अहमियत

एक ही मामले में अलग-अलग कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं की बरामदगी ने पुलिस जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

पहली कार्रवाई में 72 हजार कैप्सूल और 549 इंजेक्शन बरामद होने के बाद अब 1.44 लाख कैप्सूल और 1.20 लाख गोलियां बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

इससे पुलिस के सामने कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और इसके संचालन के तरीके का पता लगाने की चुनौती है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि क्या इस नेटवर्क में अन्य वाहन, गोदाम, विक्रेता या स्थानीय सप्लायर भी शामिल हैं।

नशे की दवाओं की अवैध बिक्री पर पुलिस की नजर

नशीली दवाओं का अवैध कारोबार कई स्तरों पर संचालित हो सकता है। एक ओर दवाओं की अवैध खरीद या सप्लाई का मामला होता है, वहीं दूसरी ओर इन्हें बिना वैध चिकित्सकीय आवश्यकता के लोगों तक पहुंचाने की चुनौती रहती है।

पुलिस की कार्रवाई में सामने आई बड़ी मात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि दवाओं के अवैध इस्तेमाल और सप्लाई पर निगरानी महत्वपूर्ण है।

ऐसे मामलों में पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग और दवा नियामक तंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर जब मामला प्रिस्क्रिप्शन आधारित दवाओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हो।

ऑपरेशन सवेरा में आगे भी कार्रवाई के संकेत

मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन सवेरा के तहत नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

सिविल लाइन पुलिस की इस कार्रवाई के बाद यह संकेत मिलता है कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुरागों के आधार पर नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जांच का अगला चरण कथित सप्लायर, खरीदार और वितरण चैनल की पहचान से जुड़ा हो सकता है।

पुलिस टीम में ये अधिकारी और कर्मचारी रहे शामिल

इस कार्रवाई को थाना प्रभारी सिविल लाइन इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।

पुलिस टीम में उपनिरीक्षक हिमांशु शर्मा, अरुण चाहर सहित कई मुख्य आरक्षी और आरक्षी शामिल रहे।

मुखबिर की सूचना के बाद टीम ने क्षेत्र में घेराबंदी और चेकिंग की कार्रवाई की तथा पुलिस के अनुसार वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया।

अब अमरोहा कनेक्शन और अन्य आरोपियों पर नजर

जुफैन उर्फ नवाब से पूछताछ में कथित तौर पर अमरोहा के एक विक्रेता से दवाएं खरीदने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू इस कथित विक्रेता तक पहुंचना हो सकता है।

इसके अलावा पहले गिरफ्तार किए गए दीपक, कलीम और जुनैद से मिले बयानों तथा बरामद सामान के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच की जा रही है।

यदि पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

2.64 लाख दवाओं की बरामदगी से उठे बड़े सवाल

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पुलिस द्वारा बताई गई 2,64,000 नशीली कैप्सूल और गोलियों की बरामदगी है।

इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है—इनकी खरीद कहां से हुई, इन्हें किस उद्देश्य से लाया गया, इन्हें कहां रखा गया और आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था?

इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत विवेचना से सामने आने हैं।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी है।

नशे के खिलाफ कार्रवाई में नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी

नशीली दवाओं के खिलाफ किसी भी अभियान की सफलता केवल गिरफ्तारी और बरामदगी के आंकड़ों से नहीं मापी जाती। असली चुनौती उस सप्लाई चेन को तोड़ना होती है जिसके जरिए प्रतिबंधित या दुरुपयोग की जाने वाली दवाएं अंतिम खरीदार तक पहुंचती हैं।

मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच की बात इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।

यदि जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क के स्रोत और वितरण व्यवस्था तक पहुंचती हैं, तो कार्रवाई का प्रभाव केवल एक मामले तक सीमित न रहकर व्यापक हो सकता है।

आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की है और पूछताछ में सामने आए कथित तथ्यों के आधार पर नेटवर्क की जांच कर रही है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत साक्ष्यों और अदालत के निर्णय के आधार पर ही होगी।

फिलहाल पुलिस की ओर से बरामदगी, गिरफ्तारी और कथित सप्लाई नेटवर्क से संबंधित जानकारी सामने रखी गई है।

मुजफ्फरनगर में ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई से बढ़ी हलचल

मुजफ्फरनगर में लगातार दो कार्रवाइयों के दौरान बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं की बरामदगी ने पुलिस के अभियान को चर्चा में ला दिया है। पहले तीन आरोपियों से 72,000 कैप्सूल और 549 इंजेक्शन बरामद किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद कथित नेटवर्क के वांछित आरोपी जुफैन उर्फ नवाब की गिरफ्तारी के साथ 1,44,000 कैप्सूल और 1,20,000 गोलियों की बरामदगी सामने आई है।

अब पुलिस की नजर उन कड़ियों पर है जो इन दवाओं को कथित तौर पर खरीदने, पहुंचाने, छिपाने और बेचने से जुड़ी हो सकती हैं। अमरोहा के कथित विक्रेता से लेकर मुजफ्फरनगर में दवाओं की सप्लाई और आगे की बिक्री तक की पूरी श्रृंखला की जांच मामले की दिशा तय करेगी।

फिलहाल दो बड़ी बरामदगी, चार गिरफ्तार और नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस की कार्रवाई में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस मामले में पहले दीपक, कलीम और जुनैद को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जुफैन उर्फ नवाब की गिरफ्तारी हुई। पुलिस के अनुसार, कुल मिलाकर बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं और वाहनों की बरामदगी हुई है।

अब जांच का अगला पड़ाव उन लोगों तक पहुंचना है जो कथित तौर पर इस नेटवर्क को संचालित करने, दवाओं की आपूर्ति करने या उन्हें आगे खपाने में शामिल हो सकते हैं।

मुजफ्फरनगर पुलिस का ऑपरेशन सवेरा आने वाले दिनों में इस कथित नेटवर्क की कितनी और परतें खोलता है, यह आगे की विवेचना और कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइन पुलिस ने ऑपरेशन सवेरा के तहत नशीली दवाओं की कथित तस्करी से जुड़े वांछित आरोपी जुफैन उर्फ नवाब को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय आरोपी निवासी मदरसा चौधरियान मीरारेती, थाना गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ के कब्जे से स्पास्मोविल ट्रामाडोल के 1,44,000 कैप्सूल, एल्प्राजोलम की 1,20,000 गोलियां, 3,900 रुपये नकद और बलेनो कार संख्या यूपी 14 सीवी 2325 बरामद की गई। इससे पहले पुलिस ने इसी मामले में दीपक, कलीम और जुनैद को 72,000 नशीले कैप्सूल, 549 नशीले इंजेक्शन और एक बलेनो कार के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, जुफैन ने पूछताछ में अमरोहा के एक विक्रेता से कथित तौर पर दवाएं खरीदकर अन्य आरोपियों को सप्लाई करने की बात बताई है। पुलिस अब मामले के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

 

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