Muzaffarnagar में 4 सितंबर को सजेगा कान्हा का दरबार, ‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ में गूंजेंगे भजन; फूलों से सजेगा शनि धाम मंदिर
Muzaffarnagar में इस बार श्रद्धा और भक्ति से सराबोर विशेष आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। चरथावल मोड़ स्थित सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भव्य धार्मिक संध्या आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का नाम ‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ रखा गया है। मंदिर प्रांगण को फूलों और आकर्षक सजावट से सजाने की तैयारी है, जबकि शाम होते ही भजन, गीत, नृत्य-नाटिकाओं और धार्मिक झांकियों से वातावरण भक्तिमय बनाने की योजना है।
इस आयोजन को लेकर सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर की प्रबंध समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई। बैठक का संचालन शरद कपूर ने किया, जबकि अध्यक्षता ललित मोहन शर्मा ने की। समिति के सदस्यों को जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तावित कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई।
मंदिर समिति के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। शाम के समय विशेष धार्मिक भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बाहर से आमंत्रित कलाकार भी प्रस्तुति देंगे।
4 सितंबर की शाम कान्हा के नाम होगी
श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी धार्मिक भावना को केंद्र में रखते हुए शनि धाम मंदिर में इस बार शाम का विशेष कार्यक्रम ‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ रखा गया है।
शरद कपूर ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक भजन संध्या शाम करीब 7 बजे से शुरू होकर रात 12 बजे तक चलेगी। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़े गीत और भजन प्रस्तुत किए जाएंगे।
कार्यक्रम में केवल भजन गायन ही नहीं होगा, बल्कि नृत्य-नाटिकाएं, धार्मिक प्रस्तुतियां और विभिन्न झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
रात तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भक्तिमय माहौल तैयार करने की विशेष योजना बनाई गई है।
फूलों से सजेगा सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। समिति के अनुसार, मंदिर प्रांगण को पूरी तरह फूलों और विभिन्न प्रकार की सजावट से आकर्षक रूप देने की तैयारी है।
जन्माष्टमी पर मंदिरों की सजावट का अपना विशेष महत्व होता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिरों में रंग-बिरंगे फूलों, रोशनी और धार्मिक सज्जा के माध्यम से उत्सव का वातावरण बनाया जाता है।
श्री शनि धाम मंदिर में भी इसी तरह श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक माहौल तैयार करने की योजना है। दिनभर मंदिर में भक्तों की आवाजाही रहेगी और शाम को भजन संध्या के साथ आयोजन अपने चरम पर पहुंचेगा।
शाम 7 बजे से आधी रात तक गूंजेंगे भजन
कार्यक्रम की समय-सारिणी भी बैठक में साझा की गई। शरद कपूर के अनुसार, ‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ कार्यक्रम शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक आयोजित किया जाएगा।
करीब पांच घंटे चलने वाली इस धार्मिक संध्या में अलग-अलग प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा।
भक्तिमय गीतों और भजनों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से कृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत करने की योजना है।
इसके अलावा कई धार्मिक झांकियां भी तैयार की जा रही हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।
बाहर से बुलाए जा रहे कलाकार, मंच पर दिखेगी कृष्ण की लीला
कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए बाहर के कलाकारों को आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है।
धार्मिक कार्यक्रमों में कलाकारों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ सांस्कृतिक अनुभव भी देती हैं। इसी उद्देश्य से इस आयोजन में संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों का विशेष संयोजन किया जा रहा है।
बाहर से आने वाले कलाकार भजन और अन्य धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में रंग भरेंगे। वहीं नृत्य-नाटिकाओं के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत करने की तैयारी है।
कृष्ण जन्माष्टमी पर झांकियां रहेंगी खास आकर्षण
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में सजने वाली झांकियों का श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण रहता है।
शनि धाम मंदिर में भी कई झांकियां प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है। इन झांकियों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, बाल लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों को दर्शाने का प्रयास किया जाएगा।
मंदिर परिसर में सजावट के साथ इन झांकियों को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु धार्मिक वातावरण का अनुभव कर सकें।
शाम के कार्यक्रम के दौरान झांकियों की प्रस्तुति आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
नृत्य-नाटिकाओं से जीवंत होंगी कृष्ण की लीलाएं
‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ में नृत्य-नाटिकाओं को भी शामिल किया गया है। धार्मिक कथाओं को संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली ऐसी नाटिकाएं दर्शकों को आकर्षित करती हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप, उनकी लीलाएं और उनसे जुड़े विभिन्न प्रसंग धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से सामने लाने की तैयारी की जा रही है।
इससे कार्यक्रम में केवल भजन-संगीत ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेगा।
दिनभर मंदिर में जारी रहेगी श्रद्धालुओं की आवाजाही
समिति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में दिनभर भक्तों का आना-जाना लगा रहेगा।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और दर्शन करते हैं। शाम को विशेष कार्यक्रम शुरू होने के साथ भक्तों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
मंदिर समिति द्वारा इसी को ध्यान में रखते हुए आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।
प्रबंध समिति की बैठक में तय हुई कार्यक्रम की रूपरेखा
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में समिति के सदस्यों ने विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक का संचालन शरद कपूर ने किया और अध्यक्षता ललित मोहन शर्मा ने की। बैठक में मौजूद सदस्यों को जन्माष्टमी कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी गई।
बताया गया कि मंदिर परिसर को सजाने से लेकर धार्मिक संध्या की प्रस्तुतियों तक कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।
कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए समिति के सदस्य जिम्मेदारियों के अनुसार सहयोग करेंगे।
पंडित केशवानंद और संतों के मार्गदर्शन में होंगे धार्मिक कार्यक्रम
मंदिर समिति की ओर से बताया गया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर प्रांगण में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का संपादन और संचालन पंडित केशवानंद, सिद्ध पीठ वाले गुरुजी, पंडित संजय कुमार, पंडित संतोष मिश्रा और पंडित शिव मिश्रा द्वारा किया जाएगा।
धार्मिक कार्यक्रमों में पुरोहितों और आचार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। जन्माष्टमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों और कार्यक्रमों को परंपरागत तरीके से संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है।
मंदिर समिति का प्रयास है कि आयोजन के दौरान धार्मिक गरिमा के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनुभव भी मिले।
भक्ति संगीत से बनेगा माहौल
शाम की भजन संध्या का सबसे बड़ा आकर्षण भक्ति संगीत रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भजनों के साथ धार्मिक गीतों की प्रस्तुतियां होंगी।
भजन संध्या का आयोजन रात 12 बजे तक प्रस्तावित है, यानी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के समय तक मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बनाए रखने की तैयारी है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात विशेष धार्मिक महत्व रखती है। ऐसे में आधी रात तक चलने वाला भजन कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव बन सकता है।
‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ से जुड़ेगा धार्मिक और सांस्कृतिक रंग
इस कार्यक्रम की खासियत यह होगी कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी समावेश किया गया है।
एक ओर भजन और धार्मिक गीत होंगे, वहीं दूसरी ओर नृत्य-नाटिकाएं और झांकियां कार्यक्रम को दृश्यात्मक आकर्षण देंगी।
बाहर से आने वाले कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आयोजन को व्यापक रूप देने की तैयारी का हिस्सा हैं।
इस तरह शनि धाम मंदिर का जन्माष्टमी आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को एक लंबी धार्मिक-सांस्कृतिक संध्या का अनुभव भी देगा।
कान्हा के जन्मोत्सव पर सजने लगा भक्तिमय माहौल
जन्माष्टमी आने के साथ ही मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर तैयारियां तेज हो जाती हैं। श्रद्धालुओं में भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर उत्साह दिखाई देता है।
मुजफ्फरनगर के चरथावल मोड़ स्थित सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में भी इसी उत्साह के बीच कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई है।
मंदिर को फूलों से सजाने की योजना से लेकर धार्मिक मंचीय प्रस्तुतियों तक, समिति की ओर से आयोजन को विशेष बनाने की तैयारी है।
शाम के समय मंदिर परिसर में भक्ति गीतों की आवाज, धार्मिक झांकियां और कलाकारों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।
जन्माष्टमी की रात मंदिर में उमड़ सकते हैं श्रद्धालु
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचते हैं। ऐसे में शनि धाम मंदिर में भी शाम से लेकर रात तक लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है।
कार्यक्रम का समय शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक रखा गया है। इस अवधि में श्रद्धालु भजन संध्या और अन्य प्रस्तुतियों का आनंद लेने के साथ मंदिर में दर्शन भी कर सकेंगे।
बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में व्यवस्था बनाए रखना समिति के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए मंदिर समिति के सदस्यों की भूमिका अहम रहेगी।
धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय संस्कृति को भी मिलेगा मंच
धार्मिक कार्यक्रमों में लोक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का समावेश स्थानीय कलाकारों और दर्शकों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ में नृत्य-नाटिकाओं और संगीत प्रस्तुतियों को शामिल किए जाने से धार्मिक कथा को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
कृष्ण की लीलाओं से जुड़े प्रसंग भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में लंबे समय से संगीत, नृत्य, नाटक और चित्रकला का हिस्सा रहे हैं।
इस आयोजन में भी इन्हीं माध्यमों के जरिए कृष्ण भक्ति को मंच पर प्रस्तुत करने की तैयारी की गई है।
समिति के सदस्यों ने आयोजन को लेकर साझा की तैयारियां
बैठक में नरेंद्र पवार, संदीप सहित अन्य सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सदस्यों के बीच कार्यक्रम को लेकर जानकारी साझा की गई और आयोजन की तैयारियों पर चर्चा हुई।
मंदिर प्रबंध समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम को व्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
मंदिर की सजावट, धार्मिक कार्यक्रम, कलाकारों की प्रस्तुति और झांकियों को लेकर योजना तैयार की जा रही है।
शनि धाम में आधी रात तक चलेगा भक्ति का रंग
जन्माष्टमी की रात जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, भजन और धार्मिक प्रस्तुतियों का माहौल और गहरा होने की उम्मीद है। शाम 7 बजे शुरू होने वाली भजन संध्या को रात 12 बजे तक जारी रखने की योजना है।
भक्तों के लिए यह समय विशेष होगा, क्योंकि इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धार्मिक भावना चरम पर होती है।
मंदिर परिसर में सजावट और फूलों के बीच धार्मिक संगीत तथा झांकियों की प्रस्तुति कार्यक्रम को विशेष रूप देने की तैयारी है।
मुजफ्फरनगर में जन्माष्टमी आयोजन को लेकर बढ़ा उत्साह
मुजफ्फरनगर में अलग-अलग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर जन्माष्टमी के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर का इस वर्ष का कार्यक्रम भी इसी धार्मिक उत्सव का हिस्सा है।
Muzaffarnagar Janmashtami 2026 के तहत 4 सितंबर को होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, संगीत और धार्मिक संस्कृति का संगम प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ नाम अपने आप में कार्यक्रम की थीम को स्पष्ट करता है—शाम पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके जन्मोत्सव को समर्पित होगी।
कान्हा की भक्ति में डूबेगा चरथावल मोड़ का शनि धाम
चरथावल मोड़ स्थित सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर फूलों से होने वाली विशेष सजावट और धार्मिक संध्या की तैयारियां श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता बढ़ा रही हैं।
दिनभर दर्शन और धार्मिक गतिविधियों के बाद शाम को कार्यक्रम का सिलसिला शुरू होगा। भजनों के बीच कृष्ण की लीलाओं पर आधारित प्रस्तुतियां और झांकियां श्रद्धालुओं का ध्यान खींचेंगी।
बाहर से आने वाले कलाकारों की मौजूदगी भी कार्यक्रम को विशेष बनाने वाली है।
रात 12 बजे तक चलने वाली इस धार्मिक संध्या में भक्ति संगीत, नृत्य और धार्मिक प्रस्तुतियों का क्रम जारी रहेगा।
4 सितंबर की शाम यादगार बनाने की तैयारी
श्री शनि धाम मंदिर की प्रबंध समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष शाम के रूप में तैयार किया जा रहा है।
फूलों से सजा मंदिर, धार्मिक झांकियां, भजन, गीत, नृत्य-नाटिकाएं और बाहर से आने वाले कलाकार—इन सभी को आयोजन का हिस्सा बनाया गया है।
समिति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम शाम 7 बजे से शुरू होकर रात 12 बजे तक चलेगा। धार्मिक कार्यक्रमों का संपादन पंडित केशवानंद, सिद्ध पीठ वाले गुरुजी, पंडित संजय कुमार, पंडित संतोष मिश्रा और पंडित शिव मिश्रा द्वारा किया जाएगा।
बैठक में मौजूद समिति सदस्यों ने आयोजन को लेकर अपनी तैयारियां साझा कीं। अब 4 सितंबर को यह देखना खास होगा कि चरथावल मोड़ स्थित सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में ‘एक शाम कान्हा जी के नाम’ किस तरह श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति के रंग में रंगता है।

