उत्तर प्रदेश

Muzaffarnagar: पूर्व सांसद कादिर राणा की बेटियों की अंतरिम जमानत मंजूर, जीएसटी टीम पर हमले का मामला गरमाया

Muzaffarnagar में जीएसटी विभाग की टीम पर हुए हमले का मामला अब गरमा गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व सांसद कादिर राणा की बेटियों, सादिया राणा और शारिया राणा, को जिला अदालत ने अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह मामला 5 दिसंबर 2024 को जीएसटी विभाग की टीम द्वारा राणा स्टील फैक्ट्री में की गई छापेमारी के दौरान हुए हमले से जुड़ा है।

घटनाक्रम के अनुसार, राणा स्टील फैक्ट्री में जीएसटी चोरी के आरोपों की जांच के लिए मेरठ यूनिट की टीम पहुंची थी। जांच के दौरान टीम पर पथराव किया गया और महिला अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं। इस मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने 200-300 अज्ञात लोगों समेत कई नामजद व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।


छापेमारी का घटनाक्रम:

डीजीजीआई और जीएसटी की मेरठ यूनिट की टीम, जांच के लिए राणा स्टील फैक्ट्री में पहुंची थी। फैक्ट्री कर्मचारियों और समर्थकों ने जीएसटी टीम का विरोध किया। आरोप है कि इस दौरान न केवल जीएसटी की गाड़ी को क्षतिग्रस्त किया गया, बल्कि टीम की महिला अधिकारियों के साथ बदसलूकी भी की गई। पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए, 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें पूर्व सांसद की बेटियां भी शामिल थीं।


अदालत में कार्रवाई:

जिला जज अजय कुमार की अदालत ने सादिया राणा और शारिया राणा को अंतरिम जमानत दे दी है। वहीं, नियमित जमानत की सुनवाई 16 दिसंबर 2024 को होगी। इस मामले में बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णपाल सैनी और कुंवर पाल सैनी ने अदालत में पैरवी की।


कानूनी प्रक्रिया:

बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। हालांकि, सीजेएम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जिला जज की अदालत में याचिका दायर की गई, जिसने सुनवाई के बाद अंतरिम जमानत मंजूर कर ली। बचाव पक्ष ने दावा किया कि लगाए गए सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और फैक्ट्री कर्मचारियों का विरोध स्वाभाविक था।


राजनीतिक और कानूनी मोड़:

यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। कादिर राणा, जो एक पूर्व सांसद और प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती हैं, इस मामले को लेकर विवादों में हैं। उनकी बेटियों की गिरफ्तारी और अंतरिम जमानत के बाद, उनके समर्थक इसे प्रशासनिक ज्यादती बता रहे हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में कार्रवाई की गई है।


पुलिस और प्रशासन की भूमिका:

थाना सिविल लाइन पुलिस ने इस मामले में 200-300 अज्ञात लोगों समेत तीन नामजद व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि हमला योजनाबद्ध था और इसे अंजाम देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


मामले का सामाजिक और कानूनी असर:

इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है। जीएसटी टीम पर हमला और महिला अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार जैसे मामले कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, आरोपियों पर धारा 307 (जानलेवा हमला) और अन्य गंभीर धाराएं लगाई हैं।


आगे की सुनवाई:

अब 16 दिसंबर को नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। अगर नियमित जमानत मंजूर होती है, तो मामले में नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच जारी रखने का आश्वासन दिया है।


मामले का राजनीतिक आयाम:

इस घटना ने विपक्षी दलों को भी निशाना साधने का मौका दिया है। भाजपा और अन्य दल इस घटना को प्रशासनिक विफलता करार दे रहे हैं, जबकि कादिर राणा के समर्थक इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रहे हैं।

News-Desk

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