Muzaffarnagar के ग्रेन चैंबर पब्लिक स्कूल में श्रद्धा से मनाया गया गुरु तेग बहादुर जी शहीदी दिवस, विद्यार्थियों ने दी प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ
News-Desk
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Grain Chamber Public School, Guru Tegh Bahadur inspiration, Guru Tegh Bahadur sacrifice, Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas, Muzaffarnagar, Muzaffarnagar school event, school spiritual program, Sikh history tributeMuzaffarnagar में स्थित ग्रेन चैंबर पब्लिक स्कूल में मंगलवार को Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और आध्यात्मिक माहौल के बीच मनाया गया।पूरे विद्यालय परिसर में श्रद्धा की ऐसी लहर उमड़ी कि छात्र, शिक्षक और स्टाफ सभी गुरु साहिब के अमर बलिदान से प्रेरित दिखे।
कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र अरदास और शब्द-कीर्तन से हुई, जिसने वातावरण को पूर्ण रूप से आध्यात्मिक बना दिया। गुरु घर की परंपरा में डूबे इन स्वरांनी पूरे आयोजन को शांति, भक्ति और एकत्व की अनुभूति से भर दिया।
विद्यार्थियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ—भाषण, कविताएँ और नाट्य-रूपांतरण ने सबका मन जीता
स्कूल के छात्रों ने गुरु तेग बहादुर जी की—
अद्वितीय त्याग भावना
साहस
धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा
मानवता के लिए उनकी अमूल्य सेवा
पर आधारित भाषण, कविताएँ और नाटकों की श्रृंखला प्रस्तुत की।
प्रत्येक प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सत्य और न्याय के पथ पर आने वाली कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए—यही गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षा का मूल है।
उनकी शहादत न केवल सिख पंथ की धरोहर है, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।
हेडमिस्ट्रेस ममता चौहान ने दिया संदेश—“गुरुजी की शिक्षाएँ आज भी मानवता की दिशा दिखाती हैं”
विद्यालय की हेडमिस्ट्रेस ममता चौहान ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि—
गुरु तेग बहादुर जी ने मानवता, साहस, सद्भाव और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दी
उनका बलिदान विश्व इतिहास में अद्वितीय है
हमें उनके आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए
उन्होंने बताया कि गुरु साहिब ने अन्य धर्मों की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, जो विश्व इतिहास का अनुपम उदाहरण है और भविष्य की पीढ़ियों को भी रास्ता दिखाता है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
समापन में मौन और श्रद्धांजलि—पूरे विद्यालय परिवार ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने गुरु तेग बहादुर जी की पावन स्मृति में मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी।
छात्रों और शिक्षकों ने उनके दिखाए मार्ग—
सत्य,
न्याय,
साहस,
और सेवा
—पर चलने का संकल्प लिया।
पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी तीन सदियों पहले थीं।

