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Muzaffarnagar मोती झील विवाद: मछलियों की मौत पर ठेका निरस्त करने की मांग, शुक्र तीर्थ में मोबाइल टावर का विरोध तेज

Muzaffarnagar Moti Jheel protest को लेकर शहर में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन की ओर से नगर मजिस्ट्रेट को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए, जिनमें मोती झील पर मछलियों की कथित हत्या और शुक्र तीर्थ क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाए जाने का विरोध दर्ज कराया गया।


🔴 मोती झील पर मछली पालन के ठेके पर विवाद

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि शामली रोड स्थित मोती झील पर मछली पालन के नाम पर दिए गए ठेकों के तहत जाल बिछाकर और रासायनिक पदार्थों का उपयोग कर बड़ी संख्या में मछलियों को मारा जा रहा है।

संगठन का कहना है कि हिंदू समाज के लोग धार्मिक मान्यताओं के तहत मोती झील पर मछलियों को दाना खिलाते हैं और आटे की गोलियां दान स्वरूप झील में डालते हैं। इस परंपरा को आस्था और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है।

आरोप है कि झील में डाले जा रहे केमिकल से हजारों मछलियां मर रही हैं, जिनके शव पानी की सतह पर तैरते दिखाई देते हैं। इससे धार्मिक भावनाएं आहत होने और लोगों में रोष फैलने की बात कही गई है।


🔴 मांगें: ठेका निरस्त और धरोहर घोषित करने की पहल

Muzaffarnagar Moti Jheel protest के तहत संगठन ने मांग की कि मछली पालन के नाम पर दिए गए ठेके को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

साथ ही, मोती झील का सौंदर्यीकरण कर उसे धरोहर घोषित करने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि झील में मछली पकड़ने पर पूर्ण रोक लगाई जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


🔴 शुक्र तीर्थ में मोबाइल टावर का विरोध

दूसरे ज्ञापन में धार्मिक स्थल शुक्र तीर्थ में घनी आबादी के बीच मोबाइल टावर लगाए जाने का विरोध दर्ज कराया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय समिति की सहमति के टावर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

ज्ञापन में कहा गया कि स्थानीय नागरिकों ने विरोध जताया, लेकिन समस्या के समाधान के बजाय उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया। संगठन ने टावर की एनओसी तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की।


🔴 स्वास्थ्य और धार्मिक चिंताएं

Shukr Teerth mobile tower opposition के दौरान संगठन ने तर्क दिया कि घनी आबादी और धार्मिक स्थल के बीच टावर लगाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। रेडिएशन को लेकर आशंका जताई गई, खासकर छात्रों और धार्मिक यात्रियों के संदर्भ में।

संगठन ने प्रशासन से जनहित में टावर स्थापना पर रोक लगाने की मांग की है।


🔴 प्रशासन से कार्रवाई की मांग

Muzaffarnagar Moti Jheel protest और Shukr Teerth mobile tower opposition को लेकर सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि स्थानीय नागरिकों की भावनाओं और समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए।

ज्ञापन सौंपने वालों में संजय अरोड़ा (राष्ट्रीय संयोजक), सरिता शर्मा अरोड़ा (राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला), प्रवीण जैन, राजीव बंसल, सोनू महेश्वरी, संजय गोस्वामी, सोनू धीमान, अरविंद कुमार, श्याम वर्मा, अंकित पाल, सुंदर सैनी, प्रदीप कुमार, राजकुमार गर्ग, राजू पाल, संजीव शर्मा, नवीन त्यागी, पंकज लूथरा, अशोक वर्मा, राजेश शर्मा, राजदीप सिंह तोमर, मनोज कुमार, गोल्डी गुप्ता, अनिल मलिक, शुभम कौशिक, मुकेश गौतम, गीता, ममतेश, संतोष, पप्पू सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


मोती झील और शुक्र तीर्थ से जुड़े इन मुद्दों ने स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन की बहस को फिर से जीवित कर दिया है। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि जनभावनाओं और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच किस तरह समाधान निकाला जाता है।

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