Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…दलित वोटों को लेकर बसपाईयों के हवाई दावे शुरू
लोग कहते है कि अपने जनपद Muzaffarnagar में बहुजन समाजवादी पार्टी का संगठन ठंडे बस्ते में पड़ा है, जब-जब चुनाव सिर पर आते है, तो बसपा वाले जाग जाते है, ऐसा ही अब होने जा रहा है अन्यथा तो महावीर चौक स्थित बहुजन समाजवादी पार्टी का कार्यालय फीका-फीका सा नजर आता है। स्थानीय निकाय के चुनावों को नजदीक आता देख बहुजन समाज पार्टी ने भी टिकट देने व उम्मीदवार खड़ा करने का मन बनाया है। इस बाबत बाकायदा मीडिया कर्मियों को कार्यालय पर बुलाकर उनके सामने भी नेताओं ने खूब शैखी बघारी।
बसपा नेताओं का कहना है कि खतौली के उपचुनाव में विपक्षी गठबंधन को यद्यपि पूरी सफलता मिली है, लेकिन यह कहना बेमानी है कि इस चुनाव में गठबंध्ान को चन्द्रशेखर एण्ड पार्टी का पूरा लाभ मिला। यह हकीकत नहीं है बसपा के नेताओं का आरोप था कि खतौली के उपचुनाव में चूंकि बहुजन समाज पार्टी फाईट में नहीं थी और इस विधानसभा क्षेत्र का दलित वोट बैंक भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम से नाराज चल रहा था।
दलित लोगों का आरोप है कि विक्रम की अशोभनीय टिप्पणियों से उन्हें अनेकों बार नीचा देखना पड़ा है इसलिए इस उपचुनाव में विक्रम एण्ड पार्टी को हराने के लिए दलितों ने अपने वोट गठबंधन को दे दिये। बसपा नेताओं का मानना है कि काश ऐसे में बसपा का उम्मीदवार खड़ा होता तो सारे के सारे दलित वोट उसे ही मिलते और चंद्रशेखर एण्ड पार्टी का दूर तक भी पता न चलता। लोग कहते है वर्तमान परिस्थितियों में चंद्रशेखर की आजाद पार्टी का लोहा छोटे चौधरी जयंत तक मान चुके है और
उनके हाथों कलाकंद खा चुके है और लगता है कि आने वाले चुनावों में भी गठबंधन में शामिल दल चंद्रशेखर को पूरा वजन देंगे, लेकिन बसपा वाले है कि चंद्रशेखर का वजूद ही नकार रहे है। बहुजन समाजवादी पार्टी के द∂तार पर मीडिया के सामने इस मुद्दे पर उन लोगों ने जिस प्रकार अपनी भडास निकाली वह देखने और सुनने वाली थी। बसपा वालों का कहना था कि राजनीति के हिसाब से वे तीसरे नम्बर के राष्टज्डीय दल है और प्रदेश में उन्हें 1 करोड़ 66 लाख वोट पूर्व में मिल भी चुके है, लेकिन इस बार कुछ लगने में नहीं आ रहा है कि बसपा कुछ कामयाब भी हो जायेगी।
द∂तार पर न तो रौनक है और न ही कार्यकर्ता, हालत इतनी खराब रही कि मीडिया कर्मियो ंको पानी के लिए भी कोई पूछने वाला नहीं था। नेतागण एक दूसरे के गले में माला डालकर खुद की वाह-वाही लूटने में लगे थे। आने वाले दिनों में कुछ स्थिति सुधर जाये तो कहा नहीं जा सकता। अभी तक तो बसपा का ग्राफ नीचे ही नजर आ रहा है।
जब भी कुछ होता है तो वह लोगों की जुबां पर चर्चा का केन्द्र बन जाता है, ना काहूं सेदोस्ती न काहूं से बैर की नीति पर चलते हुए पाठकों को समर्पित

