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Muzaffarnagar Roadways Employees Protest: अवैध बस संचालन और निजीकरण के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों का धरना, 20 मई को बड़े आंदोलन की चेतावनी

Muzaffarnagar में रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले शुक्रवार को रोडवेज बस स्टैंड की वर्कशॉप परिसर में कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों के कथित अवैध संचालन, डग्गामारी और परिवहन निगम के निजीकरण की संभावित योजनाओं के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की।

धरने के दौरान कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों के संचालन को लेकर जताई नाराजगी

धरने के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों का अवैध संचालन लगातार बढ़ रहा है, जिससे परिवहन निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि इस स्थिति का सीधा असर रोडवेज की आय और कर्मचारियों की कार्यस्थल सुरक्षा पर पड़ रहा है।

उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की जाए।


छोटी गाड़ियों की डग्गामारी और हाई-एंड बसों पर उठाए सवाल

कर्मचारियों ने छोटी निजी गाड़ियों द्वारा की जा रही डग्गामारी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि बिना अनुमति के संचालित हो रही इन सेवाओं से रोडवेज बसों की सवारियां प्रभावित हो रही हैं।

इसके साथ ही हाई-एंड निजी बसों पर परमिट शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने कहा कि इससे परिवहन निगम को लगातार आर्थिक क्षति हो रही है।


परिवहन निगम के निजीकरण प्रस्ताव का किया विरोध

धरने में कर्मचारियों ने परिवहन निगम के निजीकरण और कार्यशालाओं को निजी हाथों में सौंपे जाने की संभावित योजनाओं का कड़ा विरोध किया। कर्मचारियों का कहना था कि इससे न केवल उनकी नौकरी असुरक्षित होगी बल्कि आम जनता को भी सस्ती और सुलभ परिवहन सेवाओं से वंचित होना पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से परिवहन निगम के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की।


कर्मचारियों ने रखीं कई प्रमुख मांगें

धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखा। इनमें एक्सप्रेसवे को राष्ट्रीयकृत मार्ग घोषित करने, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से होने वाले घाटे की भरपाई सरकार द्वारा किए जाने और संविदा तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा नियमावली बनाने की मांग शामिल रही।

इसके अलावा नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, बकाया भत्तों का भुगतान और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी दोहराई गई।


मुख्यमंत्री द्वारा दी गई आर्थिक सहायता पर जताया आभार

कर्मचारियों ने पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान की गई आर्थिक सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निगम को मजबूत बनाने के लिए ऐसे कदम भविष्य में भी जारी रहने चाहिए।

साथ ही उन्होंने परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार से दीर्घकालिक समाधान की अपेक्षा जताई।


19 मई तक समाधान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता चंद्रशेखर और विनोद कुमार ने संयुक्त रूप से की। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि 19 मई तक उनकी मांगों पर कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो 20 मई को क्षेत्र स्तरीय बड़ा धरना, प्रदर्शन और रैली आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल होकर अपनी आवाज को और प्रभावी बनाएंगे।


रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा आयोजित यह धरना परिवहन निगम से जुड़ी चुनौतियों और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, वहीं 20 मई को प्रस्तावित बड़े आंदोलन की चेतावनी से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और व्यापक स्तर पर उठ सकता है।

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