PM मोदी की अपील का Muzaffarnagar में दिखा असर, जिला अस्पताल के डॉक्टर कार छोड़ साइकिल और ई-स्कूटी से पहुंचे ड्यूटी पर
News-Desk
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Carpooling, Electric Scooter, Green Initiative, Narendra Modi News, Pollution Free India, ईंधन बचत अभियान, जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर, पर्यावरण संरक्षण, पीएम मोदी अपील, मुज़फ्फरनगर न्यूज़, साइकिल अभियान, स्वास्थ्य विभागप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर देशवासियों से की गई अपील का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और देशहित को लेकर मुजफ्फरनगर के स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल शुरू की गई है, जिसकी चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है।
शनिवार को जिला Muzaffarnagar अस्पताल का नजारा रोजमर्रा के दिनों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। अस्पताल परिसर में जहां आमतौर पर कारों और मोटरसाइकिलों की लंबी कतारें नजर आती थीं, वहीं इस बार साइकिलों और इलेक्ट्रिक स्कूटियों की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने ईंधन बचत और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से वैकल्पिक परिवहन अपनाकर एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने पेश की मिसाल, कार छोड़ ई-स्कूटी से पहुंचे अस्पताल
इस अभियान की शुरुआत खुद स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय कुमार वर्मा ने की। उन्होंने अपनी निजी कार का उपयोग न करते हुए इलेक्ट्रिक स्कूटी से अस्पताल पहुंचकर कर्मचारियों और आम लोगों के सामने उदाहरण पेश किया।
डॉ. संजय कुमार वर्मा के इस कदम की अस्पताल परिसर में काफी सराहना हुई। लोगों का कहना था कि जब वरिष्ठ अधिकारी खुद इस तरह की पहल करते हैं तो उसका सकारात्मक असर समाज पर भी पड़ता है।
अस्पताल पहुंचने के दौरान डॉ. वर्मा के साथ डेंटल हाइजीनिस्ट संजीव लांबा भी ई-स्कूटी पर सवार नजर आए। दोनों अधिकारियों ने कारपूलिंग, राइड शेयरिंग और वैकल्पिक साधनों के उपयोग का संदेश देते हुए लोगों से ईंधन बचाने की अपील की।
सुरक्षाकर्मी और फार्मासिस्ट भी बने अभियान का हिस्सा
प्रधानमंत्री की अपील का प्रभाव केवल वरिष्ठ डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल के अन्य कर्मचारियों में भी इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिला। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी आकाश कुमार और राजू, जो सामान्य दिनों में मोटरसाइकिल से ड्यूटी पर आते थे, शनिवार को साइकिल चलाकर अस्पताल पहुंचे।
वहीं वरिष्ठ फार्मासिस्ट अनिल कुमार हारून ने भी साइकिल से अस्पताल पहुंचकर इस अभियान को मजबूती प्रदान की। कर्मचारियों का कहना था कि अगर हर व्यक्ति छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाए तो देश में ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ईंधन बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय कुमार वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील केवल पेट्रोल और डीजल बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में अगर करोड़ों लोग थोड़ी-थोड़ी ईंधन बचत करें तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति और प्रदूषण नियंत्रण पर पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों, साइकिलों और साझा वाहनों का उपयोग करने की अपील की।
डॉ. वर्मा ने कहा कि मौजूदा समय में प्रदूषण और बढ़ती ईंधन कीमतें दोनों ही बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में हर नागरिक का दायित्व बनता है कि वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना योगदान दे।
कारपूलिंग और राइड शेयरिंग को बढ़ावा देने की अपील
डेंटल हाइजीनिस्ट संजीव लांबा ने कहा कि जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक वाहन या साइकिल उपलब्ध नहीं है, वे कारपूलिंग और राइड शेयरिंग जैसे विकल्पों को अपनाकर भी ईंधन बचत में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर एक ही दिशा में जाने वाले लोग एक वाहन का इस्तेमाल करें तो न केवल पेट्रोल और डीजल की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक दबाव और प्रदूषण भी कम होगा। इससे शहरों में सड़क जाम जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के बड़े शहरों में कारपूलिंग और साझा परिवहन व्यवस्था भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
साइकिल चलाने से स्वास्थ्य को भी मिलते हैं बड़े फायदे
जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने इस पहल को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे स्वास्थ्य से भी जोड़कर देखा। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित साइकिल चलाना शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार साइकिलिंग से हृदय स्वस्थ रहता है, मोटापा नियंत्रित होता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। साथ ही इससे शारीरिक सक्रियता बढ़ती है, जो आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में बेहद जरूरी है।
अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि अगर लोग छोटी दूरी के लिए मोटरसाइकिल या कार के बजाय साइकिल का इस्तेमाल करें तो इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को फायदा होगा।
देशभर में बढ़ रही ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर जागरूकता
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार भी लगातार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकारी विभाग और संस्थाएं इस तरह की पहल को नियमित रूप से अपनाएं तो आम जनता पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल की यह पहल भी उसी दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।
मुजफ्फरनगर में चर्चा का विषय बनी अस्पताल की पहल
जिला अस्पताल की यह अनोखी पहल अब पूरे मुजफ्फरनगर में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी लोग डॉक्टरों और कर्मचारियों की इस सोच की सराहना कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समाज के जिम्मेदार लोग इस तरह की पहल करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार किया जा सकेगा। कई लोगों ने इसे “छोटी शुरुआत, बड़ा बदलाव” की दिशा में अहम कदम बताया।
पर्यावरण और देशहित को लेकर बढ़ रही सामाजिक जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में केवल सरकार ही नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आगे आना होगा। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाती है बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव डालती है।
ऐसे में मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। डॉक्टरों और कर्मचारियों का यह संदेश साफ है कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होगी।

