Muzaffarnagar में आवारा कुत्तों के आतंक पर बड़ा कदम, नसबंदी और रेबीज टीकाकरण से मिलेगी राहत; इन इलाकों से शुरू होगा अभियान
News-Desk
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यह पहल केवल आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु संरक्षण और जनसुरक्षा दोनों पहलुओं को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास है। केंद्र का संचालन जीव दया फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।
केंद्र के शुभारंभ के मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता विवेक बालियान और गौरव स्वरूप ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर नगर पालिका परिषद से जुड़े अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पशु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और अन्य लोग मौजूद रहे।
शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या बनी बड़ी चुनौती
मुजफ्फरनगर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लंबे समय से नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सड़कों, गलियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में घूमते कुत्तों के कारण कई बार लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पैदल आने-जाने वाले लोगों के लिए कुत्तों के झुंड कई बार परेशानी पैदा कर सकते हैं। कुत्तों के हमले की घटनाओं के साथ रेबीज संक्रमण का खतरा भी नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
इसी चुनौती को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने पशु जन्म नियंत्रण और टीकाकरण को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या में अनियंत्रित वृद्धि को रोकना और साथ ही रेबीज के प्रसार के जोखिम को कम करने में मदद करना है।
पचेंडा रोड पर शुरू हुआ ABC और रेबीज वैक्सीनेशन सेंटर
पचेंडा रोड पर जीव दया फाउंडेशन द्वारा संचालित केंद्र को इस अभियान का प्रमुख आधार बनाया गया है। यहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण से संबंधित कार्य किए जाएंगे।
एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी ABC कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आवारा कुत्तों की अनियंत्रित प्रजनन दर को नियंत्रित करना है। इसके साथ टीकाकरण किए जाने से पशुओं में रेबीज नियंत्रण की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।
इस तरह केंद्र की गतिविधियों को दो महत्वपूर्ण उद्देश्यों से जोड़ा गया है—आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम करने में सहयोग करना।
नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की पहल
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने इस पहल को पशु कल्याण और जनसुरक्षा दोनों से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ABC और टीकाकरण केंद्र की शुरुआत से एक तरफ पशुओं के अनियंत्रित प्रजनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में भी सहयोग प्राप्त होगा।
यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आवारा पशुओं से जुड़ी समस्या का समाधान केवल उन्हें शहर की सड़कों से हटाने तक सीमित नहीं हो सकता। लंबे समय के लिए संख्या नियंत्रण, टीकाकरण, पशु देखभाल और नागरिक सुरक्षा को साथ लेकर चलना आवश्यक होता है।
कलेक्ट्रेट से जिला अस्पताल तक प्रमुख इलाकों में चलेगा अभियान
पहले चरण में ABC केंद्र की टीम नगर पालिका प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करके शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाएगी। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की तैयारी है जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है।
अभियान में कलेक्ट्रेट, पुलिस लाइन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और जिला अस्पताल सहित अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। इन स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को देखते हुए नियंत्रण और टीकाकरण संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जिला अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास भी लगातार लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे स्थानों को अभियान के शुरुआती चरण में शामिल करना नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
आवारा कुत्तों की नसबंदी से संख्या नियंत्रण पर जोर
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी एक प्रमुख उपाय के रूप में अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य कुत्तों की संख्या में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि को धीरे-धीरे नियंत्रित करना है।
ABC कार्यक्रम में पकड़े गए आवारा कुत्तों के साथ निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई जाती है और नसबंदी के बाद उनकी देखभाल की जाती है। इस प्रकार की व्यवस्था में पशु कल्याण और वैज्ञानिक प्रक्रिया दोनों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
मुजफ्फरनगर में शुरू किए गए केंद्र के जरिए इसी दिशा में व्यवस्थित अभियान चलाने की तैयारी है। नगर पालिका प्रशासन और केंद्र संचालक संस्था के बीच समन्वय अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
रेबीज टीकाकरण को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया
आवारा कुत्तों के मामले में केवल संख्या नियंत्रण पर्याप्त नहीं माना जा सकता। रेबीज जैसी बीमारी के जोखिम को देखते हुए टीकाकरण भी बेहद महत्वपूर्ण पहलू है। इसी कारण नए केंद्र को नसबंदी के साथ रेबीज वैक्सीनेशन से जोड़ा गया है।
रेबीज एक गंभीर बीमारी है और संक्रमित पशु के काटने की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक उपचार लेना बेहद जरूरी होता है। इसलिए आवारा कुत्तों के टीकाकरण के माध्यम से बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मुजफ्फरनगर में शुरू होने वाले अभियान में नसबंदी और टीकाकरण को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है।
पशु संरक्षण के साथ नागरिक सुरक्षा का संतुलन
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर समाज में अक्सर दो अलग-अलग चिंताएं सामने आती हैं। एक तरफ नागरिक अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, तो दूसरी तरफ पशु संरक्षण से जुड़े लोग जानवरों के प्रति मानवीय व्यवहार की मांग करते हैं।
नगर पालिका की नई पहल इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती दिखाई देती है। मीनाक्षी स्वरूप ने भी स्पष्ट किया है कि समस्या का समाधान मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए।
इसका अर्थ है कि आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ उनके स्वास्थ्य और देखभाल का भी ध्यान रखा जाए। वहीं नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की परेशानी को भी गंभीरता से लिया जाए।
जीव दया फाउंडेशन की होगी अहम भूमिका
पचेंडा रोड स्थित केंद्र का संचालन जीव दया फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। संस्था की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि केंद्र पर आवारा कुत्तों से संबंधित गतिविधियों को विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में संचालित किया जाना है।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में कार्य होने से नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही पशुओं की स्थिति के अनुसार आवश्यक देखभाल सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
नगर पालिका प्रशासन और संस्था के बीच बेहतर तालमेल से अभियान को शहर के अधिक क्षेत्रों तक ले जाना संभव हो सकेगा।
नगर पालिका का अपना ABC और शेल्टर सेंटर भी प्रस्तावित
मौजूदा केंद्र के साथ नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर ने भविष्य के लिए अपनी स्थायी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की बात कही है। नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप के अनुसार पालिका का अपना ABC और शेल्टर सेंटर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके लिए भूमि की तलाश की जा रही है। यदि स्थायी केंद्र स्थापित होता है तो पशु जन्म नियंत्रण, टीकाकरण और पशुओं की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक व्यापक स्तर पर संचालित किया जा सकेगा।
स्थायी व्यवस्था विकसित होने से अभियान को नियमित स्वरूप देने में भी सहायता मिल सकती है। इसके जरिए नगर क्षेत्र में आवारा कुत्तों से संबंधित गतिविधियों के लिए एक समर्पित आधारभूत ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
स्थायी शेल्टर सेंटर बनने से बढ़ सकती है क्षमता
किसी भी व्यापक पशु नियंत्रण कार्यक्रम के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा महत्वपूर्ण होता है। नसबंदी और टीकाकरण के अलावा पशुओं को सुरक्षित रखने, उपचार देने और उनकी देखभाल के लिए उचित स्थान की जरूरत होती है।
नगर पालिका का प्रस्तावित शेल्टर सेंटर इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक क्षमता और संचालन व्यवस्था भूमि उपलब्ध होने तथा आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
फिलहाल पचेंडा रोड स्थित केंद्र से अभियान की शुरुआत हो चुकी है और पहले चरण में शहर के प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुत्तों के हमलों और रेबीज के खतरे को लेकर नागरिकों में चिंता
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने के साथ नागरिकों की सबसे बड़ी चिंताओं में कुत्तों के हमले और रेबीज का जोखिम शामिल है। खासकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।
छोटे बच्चों के मामले में यह चिंता और गंभीर हो जाती है। बच्चों को आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखने, उन्हें छेड़ने या अचानक उनके पास जाने से बचने जैसी सामान्य सावधानियों के बारे में जागरूक किया जाना भी जरूरी है।
किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो घटना को मामूली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में घाव की उचित सफाई करने और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत होती है। रेबीज से बचाव में समय पर चिकित्सा प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
नागरिकों से सहयोग की अपील
नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने शहरवासियों से अभियान में सकारात्मक सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित मुजफ्फरनगर की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है और इसमें सभी की सहभागिता जरूरी है।
नगर प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान को प्रभावी बनाने में स्थानीय नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। अभियान के दौरान संबंधित टीमों के साथ सहयोग करना और पशु नियंत्रण से जुड़े कार्यों में अनावश्यक बाधा न डालना व्यवस्था को सुचारु रखने में मदद कर सकता है।
इसके साथ ही नागरिकों को भी यह समझना होगा कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान केवल एक-दो दिनों की कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए लगातार निगरानी, नसबंदी, टीकाकरण और आवश्यक पशु देखभाल की जरूरत होती है।
सिर्फ संख्या घटाना नहीं, वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि कार्रवाई तत्काल दिखाई देने के बजाय उसका स्थायी असर समय के साथ सामने आता है। यदि केवल कुछ कुत्तों को एक स्थान से हटाया जाए और संख्या नियंत्रण की व्यवस्थित प्रक्रिया न हो, तो समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
इसी कारण ABC कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जाता है। नसबंदी के माध्यम से प्रजनन को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है, जबकि टीकाकरण बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
मुजफ्फरनगर में दोनों व्यवस्थाओं को एक ही केंद्र से जोड़ना अभियान को अधिक व्यवस्थित स्वरूप दे सकता है। हालांकि इसकी प्रभावशीलता नियमित संचालन, पर्याप्त संसाधनों और निरंतर निगरानी पर निर्भर करेगी।
शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर रहेगी प्राथमिकता
पहले चरण में कलेक्ट्रेट, पुलिस लाइन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और जिला अस्पताल जैसे क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया जाना तय किया गया है। इन स्थानों का चयन लोगों की अधिक आवाजाही और सार्वजनिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
इसके बाद आवश्यकता के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी अभियान का विस्तार किया जा सकता है। शहर के बाजारों, आवासीय इलाकों और अन्य सार्वजनिक स्थलों में भी आवारा कुत्तों की स्थिति को देखते हुए भविष्य में कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
नगर पालिका प्रशासन और ABC केंद्र की टीम के बीच समन्वय से ऐसे क्षेत्रों की पहचान और प्राथमिकता तय करना अभियान को अधिक प्रभावी बना सकता है।
शुभारंभ कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
ABC एवं रेबीज वैक्सीनेशन सेंटर के शुभारंभ कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता विवेक बालियान और गौरव स्वरूप मौजूद रहे। दोनों ने फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय सभासद पूजा पाल और कपिल पाल की भी मौजूदगी रही। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनु चौधरी तथा मुख्य खाद्य एवं सफाई निरीक्षक योगेश कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
केंद्र के संचालक डॉ. देवेश बालियान के अलावा सत्यवीर सिंह, डॉ. ऋषभ अग्रवाल, राज वत्स और कार्तिक राठी सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
इन सभी की मौजूदगी में शुरू हुआ यह केंद्र अब मुजफ्फरनगर में आवारा कुत्तों के नियंत्रण और रेबीज टीकाकरण अभियान का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
मुजफ्फरनगर में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान की उम्मीद
मुजफ्फरनगर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया यह अभियान नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी और उनसे जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में व्यवस्थित ABC और टीकाकरण व्यवस्था की शुरुआत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पचेंडा रोड पर शुरू हुआ केंद्र शुरुआती चरण में प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर काम करेगा। कलेक्ट्रेट, पुलिस लाइन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और जिला अस्पताल जैसे क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया गया है। आगे जरूरत के अनुसार अभियान का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की ओर से पालिका के अपने ABC और शेल्टर सेंटर के लिए भूमि तलाशने की बात भी भविष्य की बड़ी योजना की ओर संकेत करती है। यदि स्थायी केंद्र स्थापित होता है तो पशु जन्म नियंत्रण, टीकाकरण और पशु देखभाल की व्यवस्थाओं को अधिक संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
नागरिक सुरक्षा के साथ पशु कल्याण भी रहेगा केंद्र में
इस पूरी पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान पशु संरक्षण के साथ किया जा रहा है। नसबंदी और टीकाकरण जैसे वैज्ञानिक उपायों के माध्यम से संख्या और बीमारी के जोखिम को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
शहर को सुरक्षित बनाने के लिए नागरिकों की चिंताओं को दूर करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही संतुलन किसी भी प्रभावी और टिकाऊ पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम की आधारशिला बन सकता है।
मुजफ्फरनगर में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होता है, यह नियमित संचालन और इसकी पहुंच पर निर्भर करेगा। फिलहाल नगर पालिका, जीव दया फाउंडेशन और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के समन्वय से शुरू हुई पहल ने शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक व्यवस्थित शुरुआत जरूर कर दी है।

