Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…CBSE रीजनल ऑफिसर के आगमन के समय मीडिया को जानबूझकर दूर रखा गया
लोग कहते है कि अपने जिले Muzaffarnagar में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की हालत किसी से ढकी-छिपी नहीं है। थोड़े बहुत स्कूलों को छोड़कर ज्यादातर की हालत यह है कि किसी न किसी जुगाड के तहत इन्होंने अपने संस्थान को CBSE से संबद्ध करा लिया, लेकिन इन स्कूलों में infrastructure न तो सुधरा और न ही पढ़ाई का स्तर, मोटी-मोटी फीस लेने वाले यें विद्यालय कल के होनहार बच्चों को कैसे तैयार कर पायेंगे यह सोचकर अभिभावक बंधु चिन्तित और परेशान है।
लोग बताते है कि सीबीएसई (CBSE) ने अपने Central कार्यालय के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में अपने रीजनल ऑफिस खोले है, जिनका काम स्कूलों के कामकाज पर निगाह रखना होता है और यदि कोई शिकायत होती है कि तो उसे भी अपने स्तर पर निपटा दिया जाता है।दो वर्ष के कोरोना काल में छात्र-छात्राओं की हालत पतली हो चली थी और मोबाइल के सहारे ऑनलाईन पढ़ाई की बाढ आ गई थी, तब से लेकर अब स्थिति सामान्य होने तक ऐसे स्कूलों की दशा में कोई सुधार नहीं आया।
लोग कहते है कि हमारे क्षेत्र में सीबीएसई (CBSE) का रीजनल ऑफिस देहरादून में है, जिनका आगमन हमारे जनपद में हुआ और उन्होंने समीपवर्ती उपनगर देवबंद के अलावा Muzaffarnagar जिले के 100 स्कूल वालों की बैठक ली। इस बैठक में स्कूल मालिकान कम प्रिसिंपल शामिल हुए। लोगों में चर्चा है कि रीजनल ऑफिसर ने स्कूलों में रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने,बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रों को प्रीबोर्ड की तैयारी कराने, एक्सटज्डा क्लास चलाने और तथाकथित अवैध वसूली को खत्म करके स्कूलों के रिजल्ट को सुधारने के लिए उनके पेंच कसे। उन्होंने सीबीएसई की गाडडलाईन मानने व स्कूल वालों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि वे अपना शैक्षणिक स्तर सुधारने में दिमाग लड़ाये न कि अन्य
बातों में।
लोगों का कहना है कि सीबीएसई (CBSE) रीजनल ऑफिसर के आगमन के समय मीडिया को जानबूझकर दूर रखा गया और प्रयास किया गया कि कोई मीडिया बंधु भूलकर भी बैठक में न पहुंच जाये। शहर के मौजिज जिम्मेदार लोगों जिनमें अभिभावक भी शामिल है को इस बैठक की सूचना नहीं दी गयी और न ही उन्हें आमंत्रित किया गया। हां बैठक के बाद एक कागजी विज्ञप्ति जारी कर अपने मंुह मियां मिट्ठू बनने का प्रयास किया गया।
इस सारे प्रकरण पर नगर के जागरूक अभिभावक शीघ्र ही सीबीएसई (CBSE) के मुख्यालय को अपना प्रतिवेदन भेजने जा रहे है। नगर के गली मौहल्लों और चौराहों पर चर्चा है कि रीजनल ऑफिसर की बढ़िया खातिरदारी कर उन्हें कीमती तोहफे देकर देहरादून के लिए रूखसत किया गया।
जब भी कुछ होता है तो वह लोगों की जुबां पर चर्चा का केन्द्र बन जाता है, ना काहूं सेदोस्ती न काहूं से बैर की नीति पर चलते हुए पाठकों को समर्पित

