बुखार (fever) में हमारा अनुभव: वायरल के लक्षण
शरीर के अधिक गर्म होने, ताप बढ़ने, थर्मामीटर लगाने पर 99 डिग्री से अधिक ताप दिखने को ज्वर कहते हैं. मेरे विचार से ज्वर अपने आप में कोई रोग नहीं है, यह आंतरिक अनेक विकारों का प्रभाव है, शरीर पर अधिक श्रम, सर्दी, गर्मी के प्रभाव, फोड़े आदि किसी भी कारण से ज्वर हो जाता है. कभी वायरल फीवर, मौराम का बुखार (fever) हो जाता है.
प्रतिरोधक ज्वर से बचने के लिए बैट्रम सल्फ 200 की एक मात्रा हर चौथे दिन लेने से ज्वर/बुखार (fever)नहीं आयेगा.
● यूपेटोरियम पर्फ 30 सारे शरीर तथा हड्डियों में दर्द, बेचैनी, सर्दी का आभारा, कड़वी, हरी’ पीली उल्टियां होने पर इसका सेवन कराने पर अति शीघ्र लाभ होता है.
● रस टॉक्स-३०: सारे शरीर, विशेषकर चंगों में पीड़ा के श्री, बार-बार करवटे बदलना, जीभ की नोक पर लाल तिकोना निशान प्रतीत होने पर यह दें. यूपेटोरियम पर्फ तथा रस टॉक्स 30 पर्यायक्रम से देने से अच्छे परिणाम मिले हैं.
● ब्रायोनिया एल्ब -३०: प्यास, कब्ज, सिरदर्द, खुली हवा अच्छी लगने पर इसे 30 शक्ति में दें.
● यूकिलिप्टस क्यू: यदि जुकाम आदि लक्षणों के साथ मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें तथा ज्वर सर्दी से आता हो तो इसकी दस बूंदें प्रति मात्रा पांच बार रोजाना दें.
ज्वर के समय अत्यधिक बकवादीपन, सम्बन्ध या असम्बद्ध कुछ भी बोलते रहना – पोडो. अनुपयुक्त भोजन के कारण ज्वर फिर आ जाना इपिकाक, ज्वर की अवधि में भूल जाना कि वह कहां है- फारमोलिन.
● बैप्टिशिया 30 :- ज्वर में सबसे पहले मैं इसी का प्रयोग करता हूं तथा रोगी प्रायः इसी से ठीक हो जाते हैं. डॉ. ह्यूमस’ निरन्तर रहने वाले ज्वर में इसकी प्रशंसा करते हैं, सन्निपात ज्वर, रक्त की दुषित अवस्था, मलेरिया का विष प्रभाव, घोर शैथिल्य, श्वास, मल, मूत्र तया पसीना सब में दुर्गन्ध आती है. बेहोशी, तेज ज्वर, चेहरा तमतमाया हुआ, रोगी सवाल का जबाब देते-देते सो जाता है. बदन में दर्द, बदबू, ज्वर में दुर्बलता के लक्षणों को आधार मानकर इसका प्रयोग करें, जब तक को विशेष लक्षण और कारण किसी अन्य औषधि के न मिलें तब तक सर्व प्रथम हर प्रकार के ज्वर में इसी का प्रयोग करें.
● एकोनाइट नेप 30 :- रोगी बेचैन, भयभीत, चिन्तित, बार-बार ठंड लगना, ज्वर सूखी, ठंडी हवा से, शरीर गर्म होने के बाद एकाएक ठंड लगने से जब गर्मी और पसीना हो, इसका ज्वर पसीना आने से उत्तर जाता है.फेरम फॉस 12x: इसका रोगी छोटी-छोटी बातों से चिड़ जाता है. निराश रहता है. यह एको ने. और जेल्स के मध्य की औषधि हैं.
जेल्सीमियम 30 ज्वर के साथ सुस्ती, पेशियों की दुर्बलता और पूर्ण विश्राम की इच्छा, प्यास नहीं लगती. नाक बहे, छीकें आये, सुस्ती, प्यास न हो तो जेल्सीमियम – 30 प्रति दो घंटे बाद दें
● सल्फर 30 ज्वर में जीभ सूखा और ज्वर की गर्मी इतनी अधिक मानों रोगी को भूल देगी, जीभ सूखी और लाल नाक बहे, छीके आयें, खुली हवा बडी लगे, बार-बार जाड़ा लगे,थोड़े-थोड़े पानी की प्यास अथवा प्यास का अभाव, बेचैनी, दोपहर बाद तथा आधीरात के पश्चात् सभी लक्षण बढ़ जाये तथा तेज ज्वर हो जाने पर आर्सेनिक एल्ब 30 दवा दें.
बेलाडोना 30 तेज सिरदर्द, आंखें लाल, शरीर बार्म, जलने वाला मानों भाप निकल रही है, बेलाडोना में धर्म लाल व गर्म रहता है, सूखा, दपदपाहट लिये चेहरा, नाड़ी पूर्ण व कड़ी होती है, छोटे बच्चों में हमें प्रायः यह लक्षण मिलते रहते हैं. इन लक्षणों पर में बहुधा बेलाडोना ही देता हूं. एक रोगी को में तीसरे पहर घर देखने गया.
छोटी बच्ची का ज्वर के साथ चेहरा लाल व गर्म था. जरा भी बात करने में भी उसके माथे पर चोट-सी लगती थी, वह नींद में पड़ी हो ऐसा लगता था. उसको उल्टी हो चुकी थी तथा अब वह न कुछ खाना चाहती थी, न पीना. ज्वर 105 था तथा भीतर का गला भी लाल सुर्ख था. मैंने उसको जब-जब भी जगे तब ही एक-एक घंटे के अन्तराल से बेलाडोना – 6 लेने को दिया दूसरे दिन प्रातः उसकी माता ने मुझे बताया कि बच्ची को ज्वर उतर गया.
मैंनें उसकी माता से कहा कि देखा आपने, होम्योपैथिक दवा से भी उतना ही शीघ्र कार्य बन गया. जैसा किसी एन्टीबायोटिक्स से बनता.
पाइरोजिन-३० तेज ज्वर 104 106 डिग्री तथा नब्ज 140-170 डिग्री, ज्वर अचानक बढ़ना, मिलिफोलियम 30 लगातार तेज ज्वर बने रहना.
नक्स वोमिका तेज ज्वर, शरीर जलता हुआ लेकिन ठंडक : अनुभव होना, ओढ़े रहना, एक स्त्री कों ज्वर दस दिन से चल रहा था, जो किसी भी समय पूरा उतरता था. तीसरे दिन दोपहर बाद जाड़ा देकर तेज बुखार बढ़ता था. मैं जब रोगिणी को शाम के समय देखने गया, तेज गर्मी थी, तापमान 104 फा. या परन्तु रोगिणी कपड़ा ओढ़े पड़ी थी
पूछने पर बताया गया कि कपड़ा उतारने पर सर्दी लगती है. इसी लक्षण को ध्यान में रखकर नक्स 30 हर दो घंटे से दिया, रोगिणी की हालत में सुधार तो हुआ परन्तु पूरा लाभ नहीं आया अधिक पूछताछ करने पर पता चला कि तेज बुखार की ‘हालत में भी प्यास नहीं लगती.
अब कपड़ा ओढ़ना भी पसंद न था खुली हवा अच्छी लगती थी, पल्सेटिला के लक्षण देख 30 शक्ति में चार बार रोजाना देने से रोगिणी ठीक हो गयी. तेज ज्वर, 103 डिग्री से अधिक होते ही बर्फ के पानी से स्पंज करना चाहिए, पानी बार-बार पिलाना चाहिए.

