किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को किया शत शत नमन
मुज़फ्फरनगर /सिसौली। किसानो के मसीहा चौ.महेन्द्र सिह टिकैत के 84 वे जन्मदिवस पर विभिन्न राजनैतिक दलो के राजनीतिज्ञो, अनेक किसान संगठनो से जुडे किसान नेताओं, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओ से जुडे पदाधिकारियो, ब्लॉक प्रमुखों तथा जिला पंचायत सदस्यो सहित हजारो लोगो ने अपने श्रृ़़द्धासुमन अर्पित किए।
भाकियू की राजधानी सिसौली किसान भवन सहित जनपद की समस्त तहसीलों पर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष स्व.चौ.महेन्द्र सिह टिकैत के 84 वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम के तहत सुबह हवन किया गया जिसमें विभिन्न खापों के चौधरियों ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों व क्षेत्र के गणमान्य लोगों तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान आदि ने हिस्सा लिया | वहीं सभा के दौरान अतिथियों ने किसान नेता श्री टिकैत के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

उल्लेखनीय है कि किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन ने ७० के दशक के उत्तरार्द्ध और ८० के दशक में कई आंदोलन चलाए थे। वर्ष १९८८ में गन्ने की बढ़ी कीमत, कर्ज की माफी और पानी और बिजली की दरों को कम किए जाने के लिए चलाए गए आंदोलन से तो मेरठ थम सा गया था। उसी वर्ष दिल्ली में किसानों की समस्या पर भारतीय किसान यूनियन ने दिल्ली के वोट क्लब पर एक सप्ताह का अपना प्रदर्शन कर भारतीय राजनीति में कृषक नेताओं की भूमिका मजबूती से रेखांकित कर दी थी।
चौधरी टिकैत की किसानों और ग्रामीण भारत के कल्याण के लिए चौ प्रतिबद्धता गहरी और अडिग थी। देश में उनके काम का जबरदस्त असर था और उनके काम ने किसानों के लिए समर्पित अन्य अनेक संगठनों को गठित करने की प्रेरणा दी थी। विश्लेषक मानते हैं कि टिकैत भले ही पढ़े-लिखे नेताओं में शुमार न होते हों, पर उनमें किसानों को लामबंद करने की अद्भुत प्रतिभा थी। उनके अद्भुत संघर्ष की क्षमता थी।
चौधरी टिकैत की अपनी पूरी जिंदगी वह राजनीति के दबाव से बखूबी निपटे। उनका कामकाज, उनकी दृढ प्रतिबद्धता, साहस और उनकी सादगी ने उन्हें अद्वितीय नेता बनाया। किसानों के लोकप्रिय नेता टिकैत ने उनके अधिकारों के लिए राज्य और केंद्र सरकारों के खिलाफ कई बड़े आंदोलन किए। चौधरी टिकैत ने अनेकों बार सरकार को झुकाया और किसानों को उनका हक दिलाया। चौधरी टिकैत का जन्म ६ अक्टूबर १९३५ में मुजफ्फरनगर के सिसौली में एक किसान परिवार में हुआ था और आठ साल की उम्र में वे बालियान खाप के चौधरी भी बन गये थे। अपने आंदोलनों के चलते कई बार चौधरी टिकैत जेल भी गए पर उनकी ताक़त कम होने की बजाय हमेशा बढती ही रही और सरकार को हमेशा उनके आगे झुकना पड़ा। चौधरी टिकैत का १५ मई २०११ को ७६ साल की अवस्था मे बिमारी के चलते निधन हो गया था। चौधरी टिकैत ने सिर्फ किसानों के मुद्दे ही नहीं उठाये बल्कि वह क्षेत्र में सामजिक एकता के भी पक्षधर थे। वर्ष १९८९ में जनपद मुज़फ्फरनगर के भोपा क्षेत्र की मुस्लिम युवती नईमा के इन्साफ के लिए उनके द्वारा चलाये गये आन्दोलन ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। किसान नेता टिकैत सरल स्वभाव के थें क्षेत्र में उनकी अलग पहचान थी। इस अवसर पर भाजपा के कई नेता वहाँ पहुंचे और किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत को भारत रत्न देने की मांग की । और उन्हें जन्म दिवस पर शत शत नमन भी किया ।
इस दौरान भाकियू सुप्रीमो चौ. नरेश टिकैत, गौरव टिकैत, धर्मेन्द्र मलिक, भाकियू मंडल सचिव राजू अहलावत, जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान, ओमपाल मलिक, मैनपाल, ठा. कुशलपाल सहित अनेक पदाधिकारी व क्षेत्र से हजारों लोग सम्मिलित रहे।
