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TTP पर तालिबान से सख्ती की मांग: Pakistan के डिप्टी पीएम इशाक डार बोले—4 साल में 4,000 सैनिक मारे गए, बॉर्डर पर ‘सब्र’ की सीमा खत्म

इस्लामाबाद और काबुल के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। Pakistan  के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने शनिवार को बेहद कड़े शब्दों में कहा कि बीते चार वर्षों में पाकिस्तान के 4,000 सैनिक मारे गए और 20,000 से ज्यादा घायल हुए, जिसकी सीधी जिम्मेदारी बढ़ते उग्रवाद और खासकर TTP (तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) की गतिविधियों पर आती है।
उन्होंने खुलकर कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद हिंसा का ग्राफ लगातार ऊपर गया है और Pakistan Taliban TTP tensions एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं जहां पाकिस्तान “अब और नुकसान बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

इशाक डार के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि इस समय पाकिस्तान और तालिबान के बीच विश्वास की खाईं गहरी होती जा रही है और दोनों देशों की सुरक्षा नीतियां एक बार फिर टकराव के मुहाने पर हैं।


तालिबान से सख्त अपील—TTP लड़ाकों को बॉर्डर इलाके में पनाह न दें

डार ने तालिबान नेतृत्व से एक बार फिर अपील की कि TTP के उग्रवादियों को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर पनाह नहीं दी जाए
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान के धैर्य की परीक्षा अब बहुत लंबी चल चुकी है और ** Pakistan Taliban TTP tensions ** का हल तभी निकल सकता है जब तालिबान “उग्रवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी” अपनाए।

पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री ने कहा—
“तालिबान के सत्ता संभालने के बाद पाकिस्तान को जितना नुकसान हुआ है, वह किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। हमें उम्मीद है कि तालिबान समझेगा कि TTP को पनाह देना दोनों देशों के लिए विनाशकारी है।”


तालिबान ने सैकड़ों TTP लड़ाकों को हिरासत में लिया—डार ने दी जानकारी

एक महत्वपूर्ण दावा करते हुए इशाक डार ने बताया कि तालिबान नेतृत्व ने उनसे साझा किया है कि सैकड़ों TTP लड़ाकों को हिरासत में लिया गया है
तालिबान के विदेश मंत्री अमीर मुत्ताकी ने पाकिस्तान को यह संदेश भेजा कि इन गिरफ्तारियों की पुष्टि के लिए एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान आए और तथ्य की जांच करे।

डार का यह बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि तालिबान पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान अभी भी इसे पर्याप्त नहीं मानता।


UN के साथ मानवीय सहयोग पर विचार—अफगान जनता के लिए फूड सप्लाई का प्रस्ताव

डार ने बताया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुरोध पर अफगान नागरिकों के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री भेजने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और सेना नेतृत्व करेंगे, लेकिन पाकिस्तान की नीति हमेशा से यह रही है कि “अफगान लोगों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच Pakistan Taliban TTP tensions चरम पर हैं, लेकिन पाकिस्तान फिर भी मानवीय सहायता देने पर विचार कर रहा है।


सुरक्षा कारणों से बॉर्डर बंद—कड़ी निगरानी में अफगान-पाक सीमा

डार ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा बंद करने में खुशी नहीं है, लेकिन यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि—

  • सीमा पर घुसपैठ की घटनाएँ लगातार बढ़ रही थीं

  • TTP के लड़ाके कई बार सीमा पार से हमलों में शामिल पाए गए

  • तालिबान नेतृत्व के भीतर भी दो धड़े हैं—एक शांति चाहता है, दूसरा उग्रवाद के प्रति नरम

इशाक डार का कहना है कि अप्रैल में काबुल दौरे के दौरान पाकिस्तान ने सभी वादे पूरे किए, लेकिन तालिबान की ओर से उम्मीद के मुताबिक कदम नहीं उठाए गए


‘अफगान जमीन हमारे खिलाफ इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए’—डार ने फिर दोहराया रुख

डार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की नीति बेहद साफ है—
“अफगानिस्तान की जमीन पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर महीने-दर-महीने बैठकों और सुरक्षा स्तर पर बातचीत हुई है, लेकिन Pakistan Taliban TTP tensions के समाधान की दिशा में अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं आए।

पाकिस्तान बार-बार इस चिंता को दोहरा रहा है कि TTP आतंकियों को अफगान सीमा क्षेत्रों में सुरक्षित ठिकाने मिल रहे हैं, जहां से वे हमला करके वापस लौट जाते हैं।
तालिबान इस आरोप को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करता, लेकिन कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं जिनसे इस समस्या के अस्तित्व का संकेत मिलता है।


गाजा में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) में मदद की पेशकश—नया राजनीतिक संदेश

डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना गाजा में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) को मदद देने के लिए तैयार है।
हालांकि इससे पहले—

  • ISF की भूमिका

  • अधिकार

  • तैनाती की सीमा

इन सबका स्पष्ट होना जरूरी बताया गया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह योगदान मानवता और स्थिरता के लिए होगा, लेकिन हमास को हथियारों से अलग करना फिलिस्तीन के कानूनी ढांचे के तहत ही होना चाहिए, इसमें किसी बाहरी देश को दखल नहीं देना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने का प्रयास भी हो सकता है।


तालिबान के भीतर ‘दो विचारधाराएँ’—शांति चाहने वाले और TTP समर्थक गुट

इशाक डार ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि तालिबान के भीतर दो अलग-अलग विचारधाराएँ मौजूद हैं—

  1. एक धड़ा जो पाकिस्तान के साथ शांति चाहता है

  2. दूसरा धड़ा जो TTP की गतिविधियों पर आंख मूंदे बैठा है

पाकिस्तान का मानना है कि जब तक तालिबान के भीतर यह विभाजन खत्म नहीं होगा, Pakistan Taliban TTP tensions कम नहीं होंगे।

डार ने कहा कि पाकिस्तान तालिबान के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन अब “खुला हुआ धैर्य” फिर से नहीं दोहराया जा सकता।


क्या पाकिस्तान-तालिबान रिश्ते नए संकट की ओर? विशेषज्ञों की चिंता बढ़ी

क्षेत्रीय मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान और तालिबान के संबंध एक नए संकट की ओर बढ़ रहे हैं।
इस तनाव के कारण—

  • सीमा व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है

  • आतंकवाद विरोधी अभियान मुश्किल हो रहे हैं

  • अफगान-पाक रिश्तों में अविश्वास गहराता जा रहा है

  • और TTP की गतिविधियों में फिर से उछाल दिखाई दे रहा है

यदि तालिबान वास्तव में सैकड़ों TTP लड़ाकों को हिरासत में ले चुका है, तो यह पाकिस्तान के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन अभी भी भरोसे का संकट गहराई में बना हुआ है।


इशाक डार के कड़े बयान ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान अब तालिबान से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहा है और TTP पर निर्णायक कदम उठाए बिना दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं होगा। बढ़ती हिंसा, सीमा बंदी और सैकड़ों उग्रवादियों की हिरासत जैसे घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि अफगान-पाक रिश्तों में उथल-पुथल आने वाले महीनों में और गहरा सकती है। अब नज़र इस बात पर है कि तालिबान अपने वादों पर कितना टिकता है और TTP की गतिविधियों पर वास्तविक नियंत्रण करने में कितनी क्षमता दिखा पाता है।

 

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