Pilibhit में 50 लाख के टैक्स घोटाले ने लिया सनसनीखेज मोड़: बर्खास्त टैक्स कलेक्टर की मौत, 5 पन्नों के सुसाइड नोट में EO समेत दो पर गंभीर आरोप
Pilibhit । बीसलपुर नगर पालिका के चर्चित 50 लाख रुपये के कथित कर घोटाले से जुड़े मामले ने अब बेहद गंभीर और दुखद मोड़ ले लिया है। मामले में बर्खास्त किए गए कर संग्रहक (टैक्स कलेक्टर) उपेंद्र शंखधर (52 वर्ष) की सोमवार शाम मोहल्ला दुर्गा प्रसाद स्थित उनके घर में मौत हो गई। पुलिस को घटनास्थल से कथित तौर पर पांच पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें अधिशासी अधिकारी (ईओ) शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि नगर पालिका से जुड़े पुराने कर घोटाले का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पुलिस ने सुसाइड नोट और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।
उपेंद्र शंखधर करीब ढाई महीने जेल में रहने के बाद होली से पांच दिन पहले जमानत पर रिहा हुए थे। परिवार का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद भी वह लगातार मानसिक दबाव और कथित उत्पीड़न का सामना कर रहे थे। हालांकि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
50 लाख के कथित कर घोटाले से जुड़ा था पूरा मामला
बीसलपुर नगर पालिका में सामने आए करीब 50 लाख रुपये के कथित कर घोटाले ने पहले ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। अब इस मामले से जुड़े बर्खास्त कर संग्रहक की मौत के बाद प्रकरण और अधिक गंभीर हो गया है।
जानकारी के अनुसार अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह ने 28 सितंबर 2025 को नगर पालिका के कर अनुभाग में करीब 50 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला पकड़ा था।
इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कर संग्रहक उपेंद्र शंखधर को जेल भेज दिया गया।
मामले की विभागीय कार्रवाई भी आगे बढ़ी और दो फरवरी 2026 को उपेंद्र शंखधर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
ढाई महीने जेल में रहे, होली से पांच दिन पहले मिली थी जमानत
नगर पालिका के कर घोटाले में मुकदमा दर्ज होने के बाद उपेंद्र शंखधर को जेल भेजा गया था।
जानकारी के अनुसार वह करीब ढाई महीने तक जेल में रहे। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई और होली से करीब पांच दिन पहले वह जेल से बाहर आए थे।
परिवार का कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद भी परिस्थितियां सामान्य नहीं हुई थीं। उपेंद्र कथित रूप से मानसिक दबाव में थे।
उनके भाई अनुराग ने आरोप लगाया कि जमानत पर रिहा होने के बाद उपेंद्र का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था। परिवार के मुताबिक इसी स्थिति से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
हालांकि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
सोमवार शाम घर में हुई घटना, परिवार के लोग थे बाहर
घटना सोमवार शाम मोहल्ला दुर्गा प्रसाद स्थित उपेंद्र शंखधर के घर पर हुई।
बताया गया है कि घटना के समय उपेंद्र की पत्नी शशि देवी, मां प्रेमकांति और 15 वर्षीय बेटा अनमोल गर्मी के कारण घर के दरवाजे के पास बैठे हुए थे।
इसी दौरान उपेंद्र घर के कमरे में मौजूद थे।
कुछ समय बाद जब उनकी पत्नी कमरे में पहुंचीं तो सामने का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गईं। उपेंद्र को फंदे पर देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई।
घटना की जानकारी आसपास के लोगों को हुई तो मौके पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस को भी मामले की सूचना दी गई।
पत्नी ने कमरे में देखा तो मच गई चीख-पुकार
परिवार के लिए सोमवार की शाम बेहद दुखद साबित हुई।
बताया गया है कि पत्नी शशि देवी जब कुछ देर बाद कमरे में गईं तो उन्होंने उपेंद्र को फंदे पर देखा।
इसके बाद घर में चीख-पुकार मच गई। परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
अचानक हुई इस घटना से परिवार के सदस्य सदमे में आ गए।
एक तरफ परिवार पहले से मुकदमे, जेल और नौकरी से बर्खास्तगी जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा था, वहीं अब उपेंद्र की मौत ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है।
कमरे में फर्श पर मिला पांच पन्नों का सुसाइड नोट
घटना की सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी संजीव शुक्ला पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस द्वारा घटनास्थल की जांच की गई। इसी दौरान कमरे के फर्श पर कथित रूप से पांच पन्नों का सुसाइड नोट मिला।
सुसाइड नोट मिलने के बाद पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
पुलिस अब सुसाइड नोट की सामग्री, उसमें लगाए गए आरोपों और संबंधित परिस्थितियों की जांच कर रही है।
पांच पन्नों के नोट में अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए कथित उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि किसी सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति का नाम लिखा होना अपने आप में आरोपों की कानूनी पुष्टि नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
EO शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां पर लगाए आरोप
मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम कथित सुसाइड नोट में लिखे गए नामों को लेकर सामने आया है।
बताया गया है कि उपेंद्र शंखधर ने अपने कथित सुसाइड नोट में अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि कथित उत्पीड़न के आरोपों का आधार क्या था, जेल से रिहाई के बाद उपेंद्र किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे और क्या उन्होंने इससे पहले किसी अधिकारी, पुलिस या अन्य संस्था के सामने कोई शिकायत दर्ज कराई थी।
सुसाइड नोट की लिखावट और उसकी प्रामाणिकता की जांच भी पूरे मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
भाई अनुराग ने लगाया लगातार उत्पीड़न का आरोप
मृतक के भाई अनुराग ने आरोप लगाया है कि जेल से बाहर आने के बाद उपेंद्र का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था।
उनका कहना है कि इसी कारण वह मानसिक रूप से परेशान थे।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामले में निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
पुलिस को परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करने के साथ यह भी जांचना होगा कि उपेंद्र की मौत से पहले उनकी किन लोगों से बातचीत हुई थी और वह किन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे।
नगर पालिका का 50 लाख का मामला फिर आया सुर्खियों में
उपेंद्र शंखधर की मौत के बाद बीसलपुर नगर पालिका का करीब 50 लाख रुपये का कथित कर घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
यह मामला 28 सितंबर 2025 को सामने आया था।
बताया गया कि नगर पालिका के कर अनुभाग में करीब 50 लाख रुपये की कथित अनियमितता पकड़ी गई थी।
इसके बाद कानूनी कार्रवाई हुई और उपेंद्र को जेल भेजा गया।
बाद में विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें दो फरवरी 2026 को बर्खास्त कर दिया गया।
अब उनकी मौत और कथित सुसाइड नोट सामने आने के बाद पुराने मामले की परिस्थितियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
28 सितंबर 2025 को सामने आया था कथित घोटाला
नगर पालिका से जुड़े इस मामले की शुरुआत 28 सितंबर 2025 को हुई थी।
जानकारी के अनुसार ईओ शमशेर सिंह ने पालिका के कर अनुभाग में करीब 50 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी पकड़ी थी।
इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और रिपोर्ट दर्ज की गई।
कानूनी कार्रवाई के बाद उपेंद्र शंखधर को जेल भेज दिया गया।
इस मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई और कुछ महीने बाद उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
दो फरवरी 2026 को नौकरी से किए गए थे बर्खास्त
कथित कर घोटाले में कानूनी कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी प्रक्रिया चली।
दो फरवरी 2026 को उपेंद्र शंखधर को नगर पालिका की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।
नौकरी से बर्खास्तगी के बाद उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में क्या बदलाव आए, पुलिस जांच में इन पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
परिवार का आरोप है कि वह लगातार परेशान चल रहे थे।
हालांकि मौत के वास्तविक कारणों और कथित उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल
उपेंद्र शंखधर की मौत के बाद पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे पहले कथित सुसाइड नोट की प्रामाणिकता की जांच आवश्यक होगी।
क्या पांच पन्नों का नोट वास्तव में उपेंद्र ने ही लिखा था? उसमें लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं? क्या उपेंद्र ने पहले कभी कथित उत्पीड़न की शिकायत की थी? जेल से रिहा होने के बाद वह किन लोगों के संपर्क में थे?
इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।
सुसाइड नोट में नाम आने से अपने आप तय नहीं होती दोषसिद्धि
किसी भी संवेदनशील मामले में आरोप और दोषसिद्धि के बीच अंतर करना आवश्यक है।
कथित सुसाइड नोट में ईओ शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां के नाम सामने आने की बात कही गई है, लेकिन इन आरोपों की सत्यता की जांच पुलिस द्वारा की जानी है।
कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस को सुसाइड नोट, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच करनी होगी।
इसी जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत से पहले क्या परिस्थितियां थीं और लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
उपेंद्र शंखधर की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है।
घटना के समय घर पर उनकी पत्नी शशि देवी, मां प्रेमकांति और 15 वर्षीय बेटा अनमोल मौजूद थे।
परिवार के सामने अचानक आई इस परिस्थिति ने सभी को झकझोर दिया।
एक परिवार जो पहले ही कानूनी और विभागीय कार्रवाई के कारण कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था, अब अपने सदस्य की मौत से गहरे शोक में डूब गया है।
बीसलपुर में घटना के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म
बर्खास्त टैक्स कलेक्टर की मौत और कथित पांच पन्नों के सुसाइड नोट की जानकारी सामने आने के बाद बीसलपुर क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बन गया।
नगर पालिका के कथित कर घोटाले से जुड़े घटनाक्रम और अब उपेंद्र की मौत ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
स्थानीय स्तर पर लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि मृतक किसी तरह के कथित दबाव या उत्पीड़न का सामना कर रहे थे तो क्या उन्होंने इसकी शिकायत किसी स्तर पर की थी।
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है पांच पन्नों का नोट
पुलिस को घटनास्थल से मिला कथित पांच पन्नों का सुसाइड नोट जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
नोट में लिखी गई बातों की जांच के साथ पुलिस अन्य साक्ष्यों का भी अध्ययन कर सकती है।
मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल विवरण, संदेश, पूर्व शिकायतें और संबंधित लोगों के बयान पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके साथ ही कथित सुसाइड नोट की लिखावट की पुष्टि भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
घोटाले की जांच और मौत का मामला, दोनों पर टिकी निगाहें
बीसलपुर नगर पालिका के कथित 50 लाख रुपये के कर घोटाले की जांच पहले से चल रही थी।
अब इस मामले से जुड़े बर्खास्त कर संग्रहक की मौत के बाद घटनाक्रम और जटिल हो गया है।
एक तरफ कथित वित्तीय अनियमितता का पुराना मामला है, वहीं दूसरी ओर मौत से पहले लिखे गए कथित सुसाइड नोट में अधिकारियों पर लगाए गए आरोप हैं।
ऐसे में पुलिस जांच के निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी पूरे मामले की सच्चाई
मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें कई पक्ष जुड़े हुए हैं।
एक तरफ 50 लाख रुपये के कथित कर घोटाले में दर्ज मामला और विभागीय कार्रवाई है, वहीं दूसरी तरफ मृतक के परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोप हैं।
ऐसे में निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने ला सकती है।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होने की संभावना है।

