आचार्य Pramod Krishnam पर बड़ी कार्रवाई : 6 साल के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित
भारतीय राजनीति में हर क्षण नए मोड़ और घटनाक्रमों के साथ उथल-पुथल और उम्मीद का दौर चलता रहता है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा कांग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम को 6 साल के लिए निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के पीछे अनुशासनहीनता और बयानबाजी की शिकायतें हैं।
प्रमोद कृष्णम, जिन्होंने लखनऊ से 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, वह हार गए थे। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस नेतृत्व के कुछ फैसलों की आलोचना की थी। उन्होंने I.N.D.I.A एलायंस को भी विवादास्पद बताया, कहते हैं कि इसका अस्तित्व अब नहीं है।
आचार्य Pramod Krishnam पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है. आचार्य प्रमोद पर यह कार्रवाई पार्टी के खिलाफ अनुशासनहीनता और बार-बार बयानबाजी की शिकायतों के मद्देनजर की गई.
गौरतलब है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम को पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी दिया था. जिसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंजूरी दे दी और आचार्य प्रमोद को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.
In view of the complaints of indiscipline and repeated statements against the party, the Congress President has approved the proposal of the Uttar Pradesh Congress Committee to expel Pramod Krishnam from the party for six years with immediate effect. pic.twitter.com/6oRb4ezKRB
— ANI (@ANI) February 10, 2024
कृष्णम ने 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ से लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे. पिछले कुछ समय से वह कांग्रेस नेतृत्व के कुछ फैसलों की आलोचना कर रहे हैं. कृष्णम ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कांग्रेस नेताओं के भाग नहीं लेने के फैसले की भी आलोचना की थी.
I.N.D.I.A एलायंस पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पिछले दिनों बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था, मुझे लगता है कि I.N.D.I.A एलायंस जैसी कोई चीज नहीं है. जब I.N.D.I.A एलायंस बनाया गया था, तो इसके जन्म के तुरंत बाद ही इसे कई बीमारियां हो गईं. फिर यह आईसीयू और वेंटिलेटर पर चला गया. नीतीश कुमार ने इसका अंतिम संस्कार पटना में किया. मुझे नहीं लगता कि अब इसका अस्तित्व है.
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा था. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा था कि वो बीते एक साल से राहुल गांधी से मुलाकात करना चाह रहे हैं, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पा रही है. जबकि पीएम मोदी से चार दिन में ही मुलाकात हो गई. उन्होंने कहा कि पीएमओ में फोन करने के चार दिन बाद ही पीएम नरेंद्र मोदी ने मुलाकात का समय दे दिया गया.
कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश के सम्भल में 19 फरवरी को आयोजित होने वाले श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह के लिए आमंत्रित किया था. मोदी से मुलाकात करने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ‘एक्स’ पर कहा था, मुझे 19 फरवरी को होने वाले श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इसे स्वीकार करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार एवं धन्यवाद.
इसके अलावा, प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसा था। उन्होंने अपने बयान में इस बात को उजागर किया कि वे एक साल से राहुल गांधी से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुलाकात नहीं हो पा रही है।
प्रमोद कृष्णम के इन बयानों के बाद, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है। इसके साथ ही, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयोजित कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में शामिल होने का भी आमंत्रण दिया गया था।
कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह के मद्देनजर, प्रमोद कृष्णम की यह मुलाकात प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ भी देखा जा सकता है। वह इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाग लेने के लिए तैयार हैं।
इस पूरे मामले में कांग्रेस पार्टी के बीच दरारें और विवादों की धारणा हो सकती है। प्रमोद कृष्णम के बयानों से साफ दिखता है कि पार्टी के अंदर की असंतुष्टि और विभाजन की बढ़ती संभावना है।
सामाजिक और राजनीतिक दलों के बीच विवादों के बावजूद, भारतीय राजनीति में संघर्ष की चरम सीमा तक इसे ले जाने का प्रयास होना चाहिए। नहीं तो यह न केवल राजनीतिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा, बल्कि देश के सामाजिक संरचना में भी असामंजस और अस्थिरता लाएगा।
इस संदर्भ में, राजनीतिक दलों को समझना चाहिए कि वे जनता के मुद्दों को गंभीरता से लेकर उनके हल तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। उन्हें राजनीति को नाटक के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसे एक श्रेष्ठ सेवा के रूप में देखना चाहिए जो समाज के हित में काम करती है।
आखिरकार, भारतीय राजनीति का सच्चा लक्ष्य देश के समृद्धि और सुधार को प्रोत्साहित करना होना चाहिए, और इसमें राजनीतिक दलों का महत्वपूर्ण योगदान है।

