रायसीना डायलॉग 2025: एS. Jaishankar का पश्चिमी देशों पर तीखा हमला, कश्मीर और अफगानिस्तान मुद्दे पर खोली पोल
नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2025 में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने पश्चिमी देशों की दोहरी नीतियों पर करारा हमला बोला। उन्होंने कश्मीर और अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पश्चिमी देशों के पाखंडपूर्ण रवैये को उजागर किया, जिससे वैश्विक राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
कश्मीर मुद्दे पर पश्चिमी देशों का पाखंड
जयशंकर ने कश्मीर मुद्दे पर पश्चिमी देशों के रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने याद दिलाया कि 1947 में भारत की आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर आक्रमण किया था। इसके बावजूद, पश्चिमी देशों ने इस आक्रमण को एक क्षेत्रीय विवाद के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे आक्रमणकारी और पीड़ित को समान स्तर पर खड़ा कर दिया गया। जयशंकर ने विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन और अमेरिका का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की अपील को नजरअंदाज किया और आक्रमणकारी पाकिस्तान को दोषमुक्त किया।
अफगानिस्तान में पश्चिमी देशों का विरोधाभासी रवैया
अफगानिस्तान के संदर्भ में, जयशंकर ने पश्चिमी देशों के बदलते रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कैसे दोहा और ओस्लो प्रक्रियाओं में तालिबान नेताओं का स्वागत किया गया, जबकि अब उन्हीं नेताओं की आलोचना की जा रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जो तालिबान कभी चरमपंथी माने जाते थे, अब सूट-टाई में नजर आ रहे हैं, फिर भी उन्हें गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंता के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक व्यवस्था में पाखंड की ओर इशारा
जयशंकर ने वैश्विक राजनीति में पाखंड की ओर इशारा करते हुए कहा कि राष्ट्र अक्सर अनसुलझे मुद्दों पर कूटनीतिक चोला पहनते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकारें अपने देश में व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करती हैं, उसी तरह वैश्विक स्तर पर भी ऐसा होना चाहिए। उन्होंने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) से जुड़े मामलों में पश्चिमी देशों की दोहरी नीति का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे पाकिस्तान की ओर से भारत की जमीन पर किए गए आक्रमण को पश्चिमी देशों ने एक क्षेत्रीय विवाद में बदल दिया।
पश्चिमी देशों की भूमिका पर सवाल
जयशंकर ने कश्मीर पर पाकिस्तान के आक्रमण को आक्रामकता से कूटनीतिक विवाद में बदलने के लिए पश्चिमी देशों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘हम एक आक्रमण को लेकर संयुक्त राष्ट्र गए थे। इसे विवाद में बदल दिया गया… हमलावर और पीड़ित को बराबर खड़ा कर दिया गया। दोषी पक्ष कौन थे? ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन और अमेरिका।’
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पाखंड की ओर इशारा
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पाखंड की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश इस गलत बयानी में शामिल थे। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे संयुक्त राष्ट्र में भारत की अपील पर भी दोष समान रूप से मढ़ा गया था, जबकि असली हमलावर तो पाकिस्तान था।
अफगानिस्तान पर पश्चिमी देशों के असंगत रवैये की आलोचना
अफगानिस्तान पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने पश्चिमी देशों के असंगत रवैये की भी आलोचना की। उन्होंने उस विरोधाभासी स्थिति की ओर ध्यान दिलाया, जहां दोहा और ओस्लो प्रक्रियाओं में उन्हीं तालिबान नेताओं का स्वागत किया गया था, जिनकी अब अफगानिस्तान की बिगड़ती स्थिति के लिए निंदा की जा रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कैसे तालिबान, जिन्हें कभी चरमपंथी माना जाता था, अब सूट-टाई में हैं, फिर भी उन्हें एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंता के रूप में देखा जाता है।
वैश्विक राजनीति में अंतर्विरोधों की ओर ध्यान आकर्षित
जयशंकर की टिप्पणी ने वैश्विक राजनीति में चल रहे अंतर्विरोधों की ओर ध्यान दिलाया, जहां राष्ट्र अक्सर अनसुलझे मुद्दों पर एक कूटनीतिक चोला पहनते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपनी नीतियों में स्थिरता और निष्पक्षता लाए, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना प्रभावी ढंग से किया जा सके।
पश्चिमी देशों की दोहरी नीतियों पर बहस की आवश्यकता
जयशंकर के इस भाषण ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पश्चिमी देशों की दोहरी नीतियों पर बहस को फिर से जीवित कर दिया है। यह महत्वपूर्ण है कि वैश्विक समुदाय इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़े, ताकि एक स्थायी और न्यायसंगत विश्व व्यवस्था स्थापित की जा सके।
एस. जयशंकर के रायसीना डायलॉग 2025 में दिए गए इस भाषण ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाखंड और दोहरे मापदंडों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत की है। यह आवश्यक है कि वैश्विक नेता इन मुद्दों पर आत्मनिरीक्षण करें और एक निष्पक्ष एवं स्थायी वैश्विक व्यवस्था की स्थापना के लिए मिलकर काम करें।

