उत्तर प्रदेश

‘सिर्फ MSP बढ़ाने से नहीं चलेगा काम’: मक्का खरीद पर Rakesh Tikait का बड़ा सवाल, बोले- किसानों को चाहिए खरीद की गारंटी

Maize MSP को लेकर एक बार फिर किसानों की आवाज बुलंद होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मक्का खरीद के लिए 150 क्रय केंद्र स्थापित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की घोषणा के बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं।

मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान टिकैत ने कहा कि केवल एमएसपी बढ़ा देने से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। असली सवाल यह है कि किसानों की फसल को उस मूल्य पर खरीदेगा कौन और खरीद की गारंटी कौन देगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार कानूनी रूप से खरीद सुनिश्चित नहीं करती, तब तक एमएसपी बढ़ाने की घोषणाएं किसानों को वास्तविक लाभ नहीं पहुंचा पाएंगी।


‘घोषणाओं से नहीं, खरीद की गारंटी से मिलेगा किसानों को लाभ’

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार अक्सर फसलों के लिए समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा करती है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग दिखाई देती है। किसानों को कई बार अपनी उपज घोषित एमएसपी से काफी कम कीमत पर बेचनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि यदि किसान को अपनी फसल का उचित मूल्य ही नहीं मिलेगा, तो केवल एमएसपी का आंकड़ा बढ़ा देने का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। किसानों की सबसे बड़ी चिंता अपनी फसल की बिक्री और भुगतान को लेकर होती है।

टिकैत का कहना है कि किसान तब तक सुरक्षित नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी उपज की खरीद की कानूनी गारंटी न हो।


मक्का उत्पादन पर्याप्त, फिर भी आयात की जरूरत क्यों?

राकेश टिकैत ने दावा किया कि किसानों को लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि बड़ी मात्रा में मक्का बाहर से मंगाई जा रही है, जबकि देश के किसानों के पास पर्याप्त उत्पादन उपलब्ध है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत के किसान मक्का का पर्याप्त उत्पादन कर रहे हैं, तब आयात की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों से उचित मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करे, तो देश के किसान मांग के अनुसार उत्पादन करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

टिकैत ने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देना आवश्यक है।


कई राज्यों में MSP से कम कीमत पर बिक रही मक्का: टिकैत

किसान नेता ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में किसानों को मक्का की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर किसान अपनी उपज 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने को मजबूर हैं, जबकि सरकार समर्थन मूल्य की घोषणा करती है। ऐसे में किसानों और सरकारी दावों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

उनका कहना है कि यदि किसानों को बाजार में घोषित एमएसपी नहीं मिल रही, तो यह व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी है।


‘व्यापारी खरीदते हैं सस्ती फसल, बाद में मिलता है अधिक लाभ’

राकेश टिकैत ने खरीद व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की तरह मक्का की भी सीमित सरकारी खरीद होती है।

उनके अनुसार अधिकांश किसान मजबूरी में अपनी फसल व्यापारियों को कम कीमत पर बेच देते हैं। बाद में यही फसल विभिन्न माध्यमों से ऊंचे दामों पर बिकती है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच मौजूद इस असंतुलन को दूर करने के लिए खरीद प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।


MSP गारंटी कानून की मांग फिर दोहराई

MSP Guarantee Law को लेकर राकेश टिकैत ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि किसानों की आय को सुरक्षित बनाने के लिए एमएसपी गारंटी कानून लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार कानूनी रूप से यह सुनिश्चित कर दे कि किसी भी किसान की फसल एमएसपी से कम कीमत पर नहीं खरीदी जाएगी, तो किसानों का आर्थिक भविष्य अधिक सुरक्षित हो सकता है।

किसान संगठनों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जाती रही है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाया जा सके।


खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे किसान: टिकैत

राकेश टिकैत ने कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और डीजल जैसी आवश्यकताओं पर खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।

उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और फसलों की अनिश्चित खरीद व्यवस्था के कारण कई किसान खेती से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

टिकैत ने कहा कि किसानों की आय सुनिश्चित करना केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है।


कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस नीति की जरूरत

किसान नेता का कहना है कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विपणन, भंडारण, खरीद और मूल्य निर्धारण जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की आय को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक और व्यावहारिक नीतियां बनाई जाएं। किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर खरीद व्यवस्था और बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।


हरिद्वार में होगा भारतीय किसान यूनियन का तीन दिवसीय चिंतन शिविर

राकेश टिकैत ने जानकारी दी कि भारतीय किसान यूनियन की ओर से 15 जून से 18 जून तक हरिद्वार में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा।

इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से किसान प्रतिनिधि और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे। कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों, एमएसपी, फसल खरीद, सिंचाई, कृषि लागत और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

किसान संगठनों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की समस्याओं और सुझावों को व्यवस्थित रूप से सरकार तक पहुंचाया जा सकता है।


मक्का खरीद का मुद्दा क्यों बन रहा है महत्वपूर्ण?

मक्का देश की प्रमुख खाद्यान्न और औद्योगिक फसलों में से एक है। इसका उपयोग पशु आहार, खाद्य उद्योग, स्टार्च उत्पादन, एथेनॉल निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में किया जाता है।

हाल के वर्षों में मक्का की मांग में वृद्धि हुई है, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पा रहा। इसी वजह से मक्का खरीद और एमएसपी का मुद्दा किसानों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाई जाए और किसानों को उचित मूल्य मिले, तो देश में मक्का उत्पादन और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिल सकती है।


मक्का खरीद और एमएसपी को लेकर राकेश टिकैत का बयान किसानों की उन चिंताओं को सामने लाता है जो लंबे समय से कृषि क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। किसान नेता का कहना है कि केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों की फसल की खरीद की गारंटी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। आने वाले दिनों में हरिद्वार में आयोजित भारतीय किसान यूनियन के चिंतन शिविर में इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है, जिस पर देशभर के किसानों और कृषि विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी।

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