Ganesh chaturthi: गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त
Ganesh chaturthi: गणेश पूजा के बाद अज्ञानतावश पूजा में कुछ कमी रह जाने या गलतियों के लिए भगवान् गणेश के सामने हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्र का जप करते हुए क्षमा याचना करे
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Read more...Tantra: लेकिन टोने अगर गलत हो जाए तो वह करने वाले पर पलटवार भी कर सकते हैं यानी जो स्थिति अपने दुश्मन की चाह रहे हैं अगर सावधानियां नहीं रखी तो वह स्वयं आपकी भी हो सकती है।
Read more...Religious: पीपल पर लगातार 43 दिन लड़की या लड़का जल चढ़ाए, तो शादी की रुकावट दूर हो जाती है। रविवार को तथा मासिक धर्म आने पर जल नहीं चढ़ाना है।
Read more...Religious: चीटियों के बिल के पास शक्कर या आटा व शक्कर मिलाकर डालने से गृहस्थ (पारिवारिक) की समस्याओं का निवारण होता है। ऐसा नियमित 40 दिन तक करें।
Read more...उन्हीं में से कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस विशेष दिन नागदेव की पूजा करता है तो, उसे अपनी कुंडली में मौजूद राहु और केतु से संबंधित हर प्रकार के दोष से तो मुक्ति मिलती ही है Naag Panchmi
Read more...आज के समय में जहाँ आर्थिक असंतुलन हमारी चिंता का एक मुख्य कारण है वहीँ एक दूसरी स्थिति जिसके कारण अधिकांश लोग चिंतित और परेशान रहते हैं वह है…
Read more...अशुभ स्वप्न दिखने पर फिर से सो जाने पर उसका अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है | अशुभ स्वप्नों की शान्ति के लिए देव पूजन ,ब्राह्मण भोजन ,हवन या दान करना चाहिए।
Read more...यदि सूर्य पर्वत विकसित है तो सफलता का सूचक होता है। हाथ में सूर्य पर्वत का न होना व्यक्ति के लिए साधारण स्थिति व उपेक्षित जीवन का परिचय होता है। सूर्य पर्वत का विकास ही मनुष्य को प्रतिभावान और यशस्वी बनाता है।
Read more...हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। रूद्र शिव जी का ही एक स्वरूप हैं। रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में भी किया गया है।
Read more...जटा वाले सात नारियल लेकर शुक्ल पक्ष को सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए नदी में प्रवाहित करें। इससे रोग और दरिद्रता का नाश होगा।
Read more...सप्तपदी में पहला पग भोजन व्यवस्था के लिए, दूसरा शक्ति संचय, आहार तथा संयम के लिए, तीसरा धन की प्रबंध व्यवस्था हेतु, चौथा आत्मिक सुख के लिए, पांचवां पशुधन संपदा हेतु, छठा सभी ऋतुओं में उचित रहन-सहन के लिए तथा अंतिम 7वें पग में कन्या अपने पति का अनुगमन करते हुए सदैव साथ चलने का वचन लेती है
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