RSS Chief डॉ. मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत को दबाने की साजिशें नाकाम होंगी, सनातन धर्म की जीत निश्चित है
भारत में बदलाव की लहर लगातार बढ़ती जा रही है, और इस बदलाव के बीच कई लोग भारत की उभरती शक्ति को दबाने की साजिशों में लगे हुए हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख (RSS Chief)डॉ. मोहन भागवत ने इन ताकतों को करारा जवाब देते हुए कहा है कि “सत्य भारत है और सत्य कभी नहीं दबता।” उनके अनुसार, यह भारत हर संकट से उबरते हुए निरंतर प्रगति की ओर बढ़ेगा। यह बयान उन्होंने धर्मनगरी के दास हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित युग तुलसी पं. रामकिंकर उपाध्याय की जन्मशताब्दी कार्यक्रम के दौरान दिया।
इस कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने देश की वर्तमान स्थिति पर भी खुलकर अपनी बात रखी और देश विरोधी ताकतों पर जोरदार हमला किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ ताकतें भारत को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयं सेवक इस राह में आने वाली हर बाधा को दूर करने के लिए डंडा लेकर तैयार हैं। यह उनका दृढ़ विश्वास है कि धर्म और सत्य की ताकत के आगे कोई भी अधर्म नहीं टिक सकता।
भारत में हो रही साजिशों का पर्दाफाश
डॉ. मोहन भागवत ने अपनी बात में यह भी उल्लेख किया कि दुनिया में जो युद्ध हो रहे हैं, उनका अंत धर्म की जीत के साथ होगा। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाला हर राष्ट्र, हर समाज, और हर व्यक्ति अंततः जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास भी यही गवाही देता है। भारत ने हमेशा धर्म और सत्य के रास्ते पर चलते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और उन्हें पार किया है।
उनके अनुसार, भारत में कई ताकतें थीं जो राम मंदिर निर्माण में बाधाएं डालने की कोशिश कर रही थीं। साढ़े पांच सौ साल तक चले संघर्ष के बाद भी राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ, और यह साबित कर दिया कि भगवान की शक्ति के आगे कोई भी ताकत टिक नहीं सकती। डॉ. भागवत ने बताया कि भगवान की इच्छा के सामने किसी भी तरह के संदेह, रुकावट, या विरोध को सफलता नहीं मिल सकती।
रामायण और महाभारत से मिलती है प्रेरणा
डॉ. मोहन भागवत ने यह भी कहा कि प्रत्येक हिंदू को अपनी धार्मिक धारा को मजबूत करने के लिए रामायण और महाभारत से प्रेरणा लेनी चाहिए। इन दो महाकाव्यों में देश, धर्म, और समाज के निर्माण की जो शिक्षा दी गई है, वह आज भी हर हिंदू के लिए एक मार्गदर्शन है। उन्होंने यह भी कहा कि हर हिंदू का कर्तव्य है कि वह देश निर्माण में अपनी भूमिका निभाए और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि “जो लोग हिंदू धर्म और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, वे यह जान लें कि भारत का इतिहास कभी झुका नहीं है। सत्य की शक्ति अंततः हमेशा विजयी होती है।”
संघ का संघर्ष और सफलता की कहानी
डॉ. मोहन भागवत ने संघ के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि शुरुआत में संघ को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। खाने-पीने से लेकर बैठक के स्थान तक, संघ के कार्यकर्ताओं को कठिन संघर्ष करना पड़ा। लेकिन समय के साथ, संघ ने अपनी मजबूत पहचान बनाई और अब वह पूरे देश में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज संघ को देशभर में एक मजबूत और प्रभावशाली संगठन के रूप में जाना जाता है, जो न सिर्फ समाज को जोड़ने का काम कर रहा है, बल्कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय है।
उन्होंने यह भी कहा कि “भारत की संस्कृति, भारत का धर्म, और भारत की एकता ही उसकी असली ताकत है। जब कोई संकट आता है, तो यह देश एकजुट होकर उसे पार करता है। यह देश हर संकट से उबरकर आगे बढ़ता है।”
सनातन धर्म के विरोधी देश क्या कर सकते हैं?
डॉ. मोहन भागवत ने यह स्पष्ट किया कि भारत, सनातन धर्म के विरोधी देशों से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारत के खिलाफ कई देश अपनी साजिशें रच रहे हैं, लेकिन भारत अब पहले जैसा कमजोर नहीं है। आज भारत एकजुट होकर अपने विरोधियों का मुकाबला कर रहा है और पूरी दुनिया में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है।
भारत का इतिहास बताता है कि यह कभी भी किसी भी ताकत के सामने नहीं झुका है। जब भी भारत पर कोई संकट आया है, तब हिंदू समाज ने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। अब भी वही स्थिति बनी हुई है, और भारत अपनी सशक्त स्थिति में और भी अधिक मजबूती से बढ़ेगा।
डॉ. मोहन भागवत का यह बयान एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपने विरोधियों की साजिशों का मुकाबला करेगा और धर्म की शक्ति के आगे सबकी हार होगी। सनातन धर्म की नींव पर खड़ा यह देश हर मुश्किल का सामना करते हुए अपना रास्ता बनाए रखेगा। संघ के कार्यकर्ता, जो आज भी कठिन संघर्षों में लगे हुए हैं, इस मिशन को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
देश की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता की ताकत को समझते हुए, यह जरूरी है कि हर हिंदू अपनी भूमिका निभाए और भारत की शक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए काम करे।

