Jammu Kashmir विधानसभा में अनुच्छेद 370 पर गरमाया माहौल: हंगामे, हाथापाई और बैनर ने पकड़ी तूल
Jammu Kashmir विधानसभा में इस हफ्ते का सत्र शुरू होते ही राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। मुद्दा है, वर्ष 2019 में निरस्त किए गए अनुच्छेद 370 की बहाली का, जिसे लेकर विधानसभा में ऐसा बवाल मचा कि सदन के अंदर हाथापाई तक की नौबत आ गई। गुरुवार, 7 नवंबर को हुए इस हंगामे में विपक्षी दलों के साथ बीजेपी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला। इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र बने अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख, जो अनुच्छेद 370 के समर्थन में बैनर लेकर विधानसभा पहुंचे थे।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही विधानसभा में विशेष दर्जा बहाली के लिए प्रस्ताव लाया गया था, जिसका बीजेपी ने जमकर विरोध किया था। खास बात ये है कि अनुच्छेद 370, जो 2019 में केंद्र सरकार द्वारा हटाया गया था, फिर से बहाल करने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक वाहिद पारा ने भी इस हफ्ते विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिससे बीजेपी और विपक्ष के बीच तनातनी का माहौल पैदा हो गया।
सत्र की शुरुआत में ही बवाल की शुरुआत
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पांच दिनों के सत्र की शुरुआत के साथ ही माहौल गर्म हो गया था। पीडीपी विधायक वाहिद पारा ने जब अनुच्छेद 370 को दोबारा बहाल करने का प्रस्ताव रखा, तो विधानसभा में बीजेपी के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। वाहिद पारा ने विशेष दर्जा की बहाली की जोरदार मांग की, जिससे बीजेपी के सदस्य उग्र हो गए। इस माहौल में माहौल और भी गर्मा गया जब अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख अनुच्छेद 370 के समर्थन में बैनर लेकर विधानसभा के अंदर पहुंचे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, बैनर और हाथापाई
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी जमकर चर्चा हो रही है। ट्वीटर पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें शेख को बैनर लेकर सदन के अंदर प्रदर्शन करते देखा जा सकता है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, खुर्शीद अहमद शेख के इस कदम से विधानसभा में सन्नाटा टूट गया और बवाल मच गया। बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद से ही दोनों पक्षों में हाथापाई की नौबत आ गई।
विशेष सुरक्षा बल को कुछ विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर निकालने तक का कदम उठाना पड़ा। इस घटना के बाद स्पीकर ने सदन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया। इस बैनर के कारण विधानसभा का कामकाज रुक गया, और विधायकों के बीच गहमागहमी के चलते कुछ समय तक माहौल शांत नहीं हो पाया।
अनुच्छेद 370 को लेकर क्यों बढ़ रहा विवाद?
अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए शामिल किया गया था, जिसे केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में रद्द कर दिया था। तब से लेकर अब तक कश्मीर के राजनीतिक दल लगातार इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं। पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और अवामी इत्तेहाद पार्टी समेत कई स्थानीय दलों का कहना है कि अनुच्छेद 370 का हटाया जाना कश्मीर के अधिकारों का हनन है, और इसे फिर से लागू किया जाना चाहिए।
बीजेपी की कड़ी प्रतिक्रिया और आरोप
इस विवाद के दौरान बीजेपी की प्रतिक्रिया भी काफी तीखी रही। बीजेपी का दावा है कि अनुच्छेद 370 का हटाना कश्मीर के विकास के लिए महत्वपूर्ण था और इससे राज्य को भारत के अन्य हिस्सों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद मिली है। बीजेपी नेता सुनील शर्मा का कहना है कि अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाकर विपक्षी दल कश्मीर में अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं। बीजेपी इसे केवल एक राजनीतिक ड्रामा कहती है, जिससे जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा रहा है।
क्या कहती है अवामी इत्तेहाद पार्टी?
अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक और इंजीनियर राशिद के भाई खुर्शीद अहमद शेख का कहना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली कश्मीर की पहचान और अधिकारों का सवाल है। उनका दावा है कि जब तक अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं होती, तब तक कश्मीर का विकास असंभव है। शेख के इस बयान के बाद सदन में माहौल और भी गरमा गया और अन्य विपक्षी दलों ने भी उनका समर्थन किया।
बीजेपी बनाम विपक्ष की जुबानी जंग
इस पूरे प्रकरण में बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष का कहना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली से कश्मीरियों को फिर से उनका हक मिलेगा, जबकि बीजेपी का दावा है कि इससे राज्य में शांति और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग पर जनता की राय
जम्मू-कश्मीर के कई निवासी अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन वहीं कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार हुआ है, लेकिन कुछ वर्ग इसे कश्मीर की पहचान से जोड़कर देख रहे हैं और चाहते हैं कि इसे फिर से बहाल किया जाए।
इस विषय पर राजनीतिक पार्टियों के साथ ही आम जनता की भी कई धारणाएं और अपेक्षाएं हैं, जो कि आने वाले समय में कश्मीर के भविष्य पर असर डाल सकती हैं।

