Lucknow में सहारा सिटी का 170 एकड़ जमीन पर नगर निगम का बड़ा कब्जा, कर्मचारियों में भड़की नाराज़गी
Lucknow के गोमती नगर स्थित सहारा सिटी अब नगर निगम के नियंत्रण में आ गया है। सोमवार को नगर निगम ने करीब 170 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया, जिसके तहत परिसर के सभी गेटों को सील किया गया। केवल एक गेट को खुला रखा गया ताकि निगम के अधिकारी परिसर में प्रवेश कर सकें। इस प्रक्रिया में सुरक्षा कर्मियों की विशेष तैनाती की गई और कार्रवाई लगभग 10 घंटे तक चली।
नगर निगम के जोनल अफसर संजय यादव और प्रभारी अधिकारी रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि परिसर में रहने वाले सभी लोग बाहर निकाल दिए गए और किसी भी तरह के अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए सूचनाएं और बोर्ड लगा दिए गए।
नगर निगम की कार्रवाई और कर्मचारियों का विरोध
कब्जा लेने के दौरान निगम की टीम को हल्के विरोध का सामना करना पड़ा। यह विरोध मुख्य रूप से उन कर्मचारियों की ओर से हुआ, जो सहारा प्रबंधन के खिलाफ बकाया वेतन की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 14 साल से उनका वेतन पूरा नहीं दिया गया और पीएफ एवं ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं हुआ।
कर्मचारी विरोध का विस्तार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
कर्मचारियों ने अपने हक के लिए लंबे समय तक प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, कभी-कभी दो या तीन महीने का वेतन ही दिया जाता था और कई बार महीनों का वेतन बकाया रह जाता था। नगर निगम की टीम और पुलिस बल ने उन्हें परिसर से बाहर किया और किसी बड़े हंगामे को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती।
कर्मचारी अमित अवस्थी ने बताया कि अब नगर निगम ने भूमि पर कब्जा कर लिया है और उनके पास दो ही विकल्प हैं: मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर या कोर्ट का सहारा लेकर अपने बकाया वेतन की मांग करना।
परिसर में जानवरों की व्यवस्था
नगर निगम के अनुसार, सहारा सिटी परिसर में करीब 20 गायें और कुछ बतख भी थीं। गायों को अगले दिन कान्हा उपवन भेजा जाएगा। इन जानवरों के लिए तात्कालिक रूप से चारा उपलब्ध कराया गया है और बतखों को तालाब में छोड़ दिया गया।
नगर निगम का तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था
सभी छह गेटों में से पांच को ताला लगाकर सील किया गया है। केवल एक गेट खुला रखा गया ताकि अधिकारी कार्यालय और अन्य संचालन के लिए अंदर प्रवेश कर सकें। नगर निगम ने परिसर में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी है और किसी भी अनधिकृत प्रवेश पर कानूनी कार्रवाई का नोटिस भी लगाया गया।
170 एकड़ जमीन का महत्व और भविष्य की योजना
गोमती नगर के इस विशाल परिसर पर नगर निगम के कब्जे के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में इसका क्या उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग और विकास परियोजनाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
सहारा प्रबंधन की प्रतिक्रिया और अतीत की घटनाएं
सहारा सिटी से जुड़े कुछ लोग कर्मचारियों को समझाने का प्रयास भी कर चुके हैं, लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब निगम का नियंत्रण स्पष्ट रूप से स्थापित हो गया है। पिछले कई वर्षों से यह परिसर विवादों में रहा है और निगम की इस कार्रवाई ने इसे और अधिक ध्यान का केंद्र बना दिया है।
कर्मचारियों के लिए आगे की राह
कर्मचारी अब संगठित होकर अपने वेतन के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की योजना बना रहे हैं। उनकी मांगें और प्रशासन की कार्रवाई अब राज्य स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकती हैं।
समाज पर प्रभाव और मीडिया कवरेज
नगर निगम की यह कार्रवाई सिर्फ एक संपत्ति पर कब्जे की नहीं बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन का भी संदेश देती है। मीडिया और जनता की नजर इस घटना पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शहर की अन्य संपत्तियों और निगम की कार्रवाई की नीतियों पर भी असर पड़ेगा।
अगले कदम और प्रशासनिक दिशा
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि परिसर में किसी भी अनधिकृत प्रवेश पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके अलावा परिसर के पुनर्विकास और सार्वजनिक उपयोग के लिए योजना बनाई जाएगी, जिससे यह क्षेत्र शहरवासियों के लिए और अधिक उपयोगी साबित हो सके।

