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दिल्ली में बंद होगा Afghanistan से आए बच्चों के लिए चल रहा स्कूल

Afghanistan की राजधानी काबुल में सत्ता परिवर्तन के 20 महीने बाद दिल्ली में अफगान बच्चों का स्कूल अब बंद होने के कगार पर है. स्कूल का नाम सैयद जमालुद्दीन अफगान हाई स्कूल है. यह दिल्ली के भोगल में एक किराए की बिल्डिंग में चलता है. विदेश मंत्रालय के अनुसार स्कूल के 300 छात्रों को अन्य भारतीय स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा क्योंकि अब अफगान शिक्षा बोर्ड नहीं है. इसलिए भारत अब उसके स्कूल और उनके छात्रों को मान्यता नहीं दे सकता.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, स्कूल के शिक्षकों को मई के अंत तक किराए के भवन को खाली करने के लिए कहा गया है. यह भी कहा गया है कि छात्रों को भारतीय स्कूल बोर्डों द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिला लेना चाहिए. इस स्कूल में कक्षा 1 से 12 तक के छात्र हैं. अफगान शरणार्थियों को शिक्षा देने के लिए स्कूल 1994 में शुरू हुआ था. यह 2008 में एक प्राथमिक विद्यालय और 2017 में एक उच्च विद्यालय बन गया. यह तब था जब अशरफ गनी सरकार ने भारत में शरणार्थियों के अनुरोध पर धन देना शुरू किया और स्कूल को मान्यता दी.

15 अगस्त, 2021 को जब काबुल Afghanistan तालिबान के कब्जे में आ गया, तब सब कुछ बदल गया. अफगान सरकार से फंडिंग भी बंद हो गई, तो विदेश मंत्रालय ने स्कूल की आर्थिक मदद की और इसे बंद होने से बचाया. लेकिन अब जब स्कूल अफगानिस्तान के नियंत्रण वाले लोगों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. भारत-तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देता है. ऐसे में विदेश मंत्रालय ने छात्रों को भारतीय बोर्डों द्वारा संचालित स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है.

Afghanistan विदेश मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘ऐसे स्कूल को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है जिसे अब Afghanistan में अधिकारियों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. हम जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे और उन्हें शिफ्ट करने में मदद करेंगे.’ एक शिक्षक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘हमें अफगान दूतावास के अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया था कि हमें 31 मार्च तक इमारत खाली करनी है.

हमारे विरोध करने के बाद, उन्होंने मई-अंत तक डेट बढ़ा दी.’ शिक्षक ने कहा कि दूतावास ने हमें बताया कि विदेश मंत्रालय अब हमारे स्कूल को आर्थिक रूप से समर्थन नहीं देगा और हमें इसे बंद करना होगा. उन्होंने कहा कि छात्रों को भारतीय स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि स्कूल को बंद किया जा रहा है क्योंकि इसको सीबीएसई की मान्यता नहीं है.’

अधिकांश छात्र भारतीय स्कूलों में जाने को लेकर चिंतित हैं क्योंकि भाषा की बाधा, पाठ्यक्रम में बदलाव, बोर्ड परीक्षा की तैयारी जैसे कई मुद्दे हैं. 12वीं कक्षा के एक छात्र ने कहा, ‘स्कूल में हमारा आखिरी साल है और अचानक हमें अंग्रेजी माध्यम में शिफ्ट होने के लिए कहा जा रहा है. 

News-Desk

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