Religious

शनि के मकर राशी प्रवेश के पर्वकाल मे करने हेतु शनि साधना

 24 January 2020 को शनि का मकर राशी मे प्रवेश हो रहा है .. उसका पर्वकाल उस दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12.45 तक है .. आप इस पर्वकाल मे यह शनि साधना जरुर संपन्न करे जिससे शनिदेव की कृपा आपपर बनी रहे और शनि पीडा से मुक्ति मिले ..

शनि साधना :-

सर्व प्रथम सदगुरु का ध्यान करे

गुरुर्ब्रम्हा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर :
गुरु: साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरवे नमः

ॐ गुं गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री गणेशाय नमः
ॐ शं शनैश्चराय नमः

अब 4 बार आचमन करे।

ॐ आत्म तत्व शोधयामि स्वाहा
ॐ विद्या तत्व शोधयामि स्वाहा
ॐ शिव तत्व शोधयामि स्वाहा
ॐ सर्व तत्व शोधयामि स्वाहा

फिर गुरु , परम गुरु और परमेष्ठी गुरु का पूजन करे पूजन स्थल पर पुष्प अक्षत अर्पण करे।

ॐ गुरुभ्यो नमः
ॐ परम गुरुभ्यो नमः
ॐ परमेष्ठी गुरुभ्यो नमः

अब आसन पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
ॐ पृथ्वी देव्यै नमः

चारो तरफ दिशा बंधन हेतु अक्षत फेके
और अपनी शिखा पर दाहिना हाथ रखे

फिर दीपक को प्रणाम करे

दीप देवताभ्यो नमः

कलश में जल डाले और उसमे चन्दन या सुगन्धित द्रव्य डाले

कलश देवताभ्यो नमः

अब अपने आप को तिलक करे
और दाहिने हाथ में जल लेकर अपने नाम और गोत्र का
उच्चारण कर संकल्प करे की आज शनिदेव के मकर राशि प्रवेश के दिन पर्वकाल मे मैं शनि भगवान की कृपा प्राप्त करने हेतु यथाशक्ति साधना संपन्न कर रहा हूँ और गुरु कृपा से साधना सफल हो जाए।

गुरु के स्मरण पूजन से साधना सम्बंधित दोष दूर हो जाते है

फिर सदगुरु का पंचोपचार पूजन करे
(गंध अक्षत पुष्प धुप दीप नैवेद्य )

ॐ गुं गुरुभ्यो नमः पंचोपचार पूजनम समर्पयामि

फिर गणेश जी का स्मरण करे

वक्रतुंड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येषु सर्वदा

ॐ श्री गणेशाय नमः पंचोपचार पूजनम समर्पयामि

फिर शनि महाराज का ध्यान मन्त्र पढ़े और उनका आवाहन करे

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्
छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्

श्री शनि देवता आवाहयामि मम
पूजा स्थाने स्थापयामि नमः

श्री शनि भगवान इहावह इहावह
इह तिष्ठ इह तिष्ठ
मम सन्निधिं कुरु कुरु मम कृपाम कुरु कुरु

अब उनका षोडश उपचार पूजन करे

ॐ शं शनैश्चराय नम: आवाहनार्थे पुष्पाक्षत समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: आसनार्थे पुष्पाक्षत समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: पाद्यो पादयम समर्पयामि ( दो आचमनी जल चढाये )

ॐ शं शनैश्चराय नम: हस्तयो अर्घ्यम समर्पयामि ( एक आचमनी जल मे चंदन मिलाकर अर्पण करे )

ॐ शं शनैश्चराय नम: मुखे आचमनीयम जलं समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: स्नानीयम जलं समर्पयामि
( यहाँ पर आप चाहे तो पुरुषसूक्त या रुद्राभिषेक से शनि देव का अभिषेक कर सकते है )

ॐ शं शनैश्चराय नम: वस्त्रोपवस्त्रम समर्पयामि ( काला वस्त्र या काले अक्षत अर्पण करे )

ॐ शं शनैश्चराय नम: यज्ञोपवितम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: हरिद्रा कुंकुम चंदनम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: अक्षतान समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: पुष्पम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: धूपम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: दीपम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: नैवेद्यम समर्पयामि
( नैवेद्य मे गुड और तिल के लड्डू अर्पण कर सकते है जो शनि को प्रिय है )

ॐ शं शनैश्चराय नम: ऋतूफलम
समर्पयामि ( यहाँ पर फल मे केला अर्पण कर सकते है जो शनि को प्रिय है )

ॐ शं शनैश्चराय नम: तांबूलम समर्पयामि

ॐ शं शनैश्चराय नम: कर्पुर आरार्तीक्यम समर्पयामि

अगर आपके पास समय हो तो शनिदेव के 108 नामो से पुष्प अक्षत या बेल पत्र से पूजन करे ..

आप एकेक नाम पढकर पुष्प अक्षत या बेल पत्र अर्पण कर शनिदेव का इन १०८ नामोसे पूजन कर सकते है या इन नामो का पाठ कर सकते है ..

१) ॐ शं शनैश्चराय नम:
२) ॐ शं शांताय नम :
३) ॐ शं सर्वाभीष्टप्रदायिने नम:
४) ॐ शं शरण्याय नम:
५) ॐ शं वरेण्याय नम:
६) ॐ शं सर्वेशाय नम:
७) ॐ शं सैन्याय नम:
८) ॐ शं सुरवंद्याय नम:
९) ॐ शं सुरलोकविहारिणे नम:
१०) ॐ शं सुखासनोपविष्टाय नम:
११) ॐ शं सुंदराय नम:
१२) ॐ शं घनाय नम:
१३) ॐ शं घनरुपाय नम:
१४) ॐ शं घनाभरणधारिणे नम:
१५) ॐ शं खद्योताय नम:
१६) ॐ शं मंदाय नम:
१७) ॐ शं मंदचेष्टाय नम:
१८) ॐ शं महनीयगुणात्मने नम:
१९) ॐ शं मर्त्यपावनपादाय नम:
२०) ॐ शं महेशाय नम:
२१) ॐ शं छायापुत्राय नम:
२२) ॐ शं शर्वाय नम:
२३) ॐ शं शततुणीरधारिणे नम:
२४) ॐ शं शुष्काय नम:
२५) ॐ शं चरस्थिरस्वभावाय नम:
२६) ॐ शं चंचलाय नम:
२७) ॐ शं नीलवर्णाय नम:
२८) ॐ शं नित्याय नम:
२९) ॐ शं नीलांजननिभाय नम:
३०) ॐ शं नीलांबरविभूषाय नम:
३१) ॐ शं निश्चलाय नम:
३२) ॐ शं वेद्याय नम:
३३) ॐ शं विधिरुपाय नम:
३४) ॐ शं विरोधाधारभूमये नम:
३५) ॐ शं वेदास्वादस्वभावाय नम:
३६) ॐ शं वज्रदेहाय नम:
३७) ॐ शं वैराग्यदाय नम:
३८) ॐ शं वीराय नम:
३९) ॐ शं वीतरोगभयाय नम:
४०) ॐ शं विपत्परं परेशाय नम:
४१) ॐ शं विश्ववंद्याय नम:
४२) ॐ शं गृधवाहनाय नम:
४३) ॐ शं गूढाय नम:
४४) ॐ शं कर्मांगाय नम:
४५) ॐ शं कुरुपिणे नम:
४६) ॐ शं कुत्सिताय नम:
४७) ॐ शं गुणाढ्याय नम:
४८) ॐ शं गोचराय नम:
४९) ॐ शं अविद्यामूलनाशनाय नम:
५०) ॐ शं विद्याssविद्यास्वरुपिणे नम:
५१) ॐ शं आयुष्यकारणाय नम:
५२) ॐ शं आपदुद्धर्ते नम:
५३) ॐ शं विष्णुभक्ताय नम:
५४) ॐ शं वशिने नम:
५५) ॐ शं विविधागमवेदिने नम:
५६) ॐ शं विधिस्तुत्याय नम:
५७) ॐ शं वंद्याय नम:
५८) ॐ शं विरुपाक्षाय नम:
५९) ॐ शं वरिष्ठाय नम:
६०) ॐ शं गरिष्ठाय नम:
६१) ॐ शं वज्रांकुशधराय नम:
६२) ॐ शं वरदाय नम:
६३) ॐ शं अभयहस्ताय नम:
६४) ॐ शं वामनाय नम:
६५) ॐ शं ज्येष्ठापत्नीसमेताय नम:
६६) ॐ शं श्रेष्ठाय नम:
६७) ॐ शं मितभाषिणे नम:
६८) ॐ शं कष्टौघनाशिने नम:
६९) ॐ शं आयुर्पुष्टिदाय नम:
७०) ॐ शं स्तुत्याय नम:
७१) ॐ शं स्तोत्रकामाय नम:
७२) ॐ शं भक्तिवश्याय नम:
७३) ॐ शं भानवे नम:
७४) ॐ शं भानुपुत्राय नम:
७५) ॐ शं भव्याय नम:
७६) ॐ शं पावनाय नम:
७७) ॐ शं धनुर्मंडलसंस्थिताय नम:
७८) ॐ शं धनदाय नम:
७९) ॐ शं धनुष्मते नम:
८०) ॐ शं तनुप्रकाशदेहाय नम:
८१) ॐ शं तामसाय नम:
८२) ॐ शं अशेषजनवंद्याय नम:
८३) ॐ शं विशेषफलदायिने नम:
८४) ॐ शं वशीकृतजनेशाय नम:
८५) ॐ शं पशूनांपतये नम:
८६) ॐ शं खेचराय नम:
८७) ॐ शं घननीलांबराय नम:
८८) ॐ शं काठिन्यमानसाय नम:
८९) ॐ शं आर्यगणस्तुताय नम:
९०) ॐ शं नीलछत्राय नम:
९१) ॐ शं नित्याय नम:
९२) ॐ शं निर्गुणाय नम:
९३) ॐ शं गुणात्मने नम:
९४) ॐ शं निरामयाय नम:
९५) ॐ शं निंद्याय नम:
९६) ॐ शं वंदनीयाय नम:
९७) ॐ शं धीराय नम:
९८) ॐ शं दिव्यदेहाय नम:
९९) ॐ शं दीनार्तिहरणाय नम:
१००) ॐ शं दैत्यनाशनाय नम:
१०१) ॐ शं आर्यजनगण्याय नम:
१०२) ॐ शं क्रूराय नम:
१०३) ॐ शं क्रूरचेष्टाय नम:
१०४) ॐ शं कामक्रोधकराय नम:
१०५) ॐ शं कलत्रपुत्रशत्रुत्त्व कारणाय नम:
१०६) ॐ शं परितोषितभक्ताय नम:
१०७) ॐ शं परभीतिहराय नम:
१०८) ॐ शं भक्तसंघमनोभीष्टफलदाय नम:

अब एक आचमनी जल पूजन स्थान पर अर्पण करे .

अनेन अष्टोत्तर शतनामावली द्वारा पूजनेन श्री शनि ग्रह देवता प्रीयंतां न मम

अब निम्नलिखीत शनि गायत्री से शनिदेव को अर्घ्य प्रदान करे .. एक आचमनी जल मे चंदन मिलाकर पूजन स्थान पर अर्पण करे

शनि गायत्री
१)ॐ कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि तन्न: सौरि: प्रचोदयात्
२) ॐ भगभवाय विद्महे मृत्यु रुपाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात्

अब निम्न शनि माला मंत्र पढते हुये पुष्प या शमि पत्र या बेल पत्र पूजन स्थान पर अर्पण करे

ॐ नमो भगवते शनैश्चराय मंदगतये सूर्यपुत्राय महाकालाग्निसदृशाय क्रूरदेहाय गृध्रासनाय नीलरुपाय चतुर्भुजाय त्रिनेत्राय नीलांबरधराय नीलमालाविभूषिताय धनुराकारमण्डले प्रतिष्ठिताय काश्यपगोत्रात्मजाय माणिक्यमुक्ताभरणाय छायापुत्राय सकल महारौद्राय सकल जगतभयंकराय पंगुपादाय क्रूररुपाय देवासुरभयंकराय सौरये कृष्णवर्णाय स्थूलरोमाय अधोमुखाय नीलभद्रासनाय नीलवर्णरथारुढाय त्रिशूलधराय सर्वजनभयंकराय मंदाय दं शं नं मं हुं रक्ष रक्ष , मम शत्रून नाशय नाशय , सर्वपीडा नाशय नाशय , विषमस्थ शनैश्चरान सुप्रीणय सुप्रीणय , सर्व ज्वरान शमय शमय , समस्त व्याधीनामोचय मोचय विमोचय विमोचय मां रक्ष रक्ष , समस्त दुष्टग्रहान भक्षय भक्षय , भ्रामय भ्रामय , त्रासय त्रासय , बंधय बंधय , उन्मादय उन्मादय , दीपय दीपय , तापय तापय , सर्व विघ्नान छिंधि छिंधि , डाकिनी शाकिनी भूत वेताल यक्षरगोगंधर्वग्रहान ग्रासय ग्रासय , भक्षय भक्षय , दह दह , पच पच , हन हन , विदारय विदारय , शत्रून नाशय नाशय , सर्वपीडा नाशय नाशय , विषमस्थ शनैश्चरान सुप्रीणय सुप्रीणय , सर्वज्वरान शमय शमय , समस्त व्याधीन विमोचय विमोचय , ॐ शं नं मं ह्रां फं हुं शनैश्चराय नीलाभ्रवर्णाय नीलमेखलाय सौरये नम:

उसके बाद शनि स्तोत्र का पाठ करे जो अन्य पोस्ट मे दिये गये है ..

इसके बाद क्षमा प्रार्थना करे

आवाहनं न जानामि, न जानामि तव अर्चनं
पूजां चैव न जानामि, क्षम्यतां शनैश्वर

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तीहीनं शनैश्वर
यत पुजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे

देव देव शनिदेव , पूजां प्राप्य करोतु यत
त्राहि त्राहि कृपासिंधो पूजां पूर्णतरां कुरु

ॐ तत्सत ब्रह्मार्पणमस्तु

इसके बाद निम्नलिखीत शनि मंत्र मे से किसी एक मंत्र का यथाशक्ती जाप करे ..

1) ॐ शं शनैश्चराय नम:
2) ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
3) ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:

मंत्र जाप के बाद चाहे तो शनि मंत्र से हवन कर सकते है .

साधना समाप्त होने के बाद यथाशक्ति दान जरुर करे .. शनि और राहु दान से संतुष्ट होते है

News-Desk

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