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छींक : शकुन या अपशकुन-शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

छींक को लेकर हमारे समाज में बहुत सी धारणाएं हैं जिनमें से कुछ इस तरह हैं कि अगर घर से निकलते समय छींक आ जाए या कोई सामने की ओर छींक दे तो अशुभ समझना चाहिए।

अगर कोई कार्य करते हों तो उस स्थिति में न करें तो बेहतर होगा, जैसे किसी व्यवसाय का आरंभ, दुकान खोलना, किसी कार्य के लिए उठकर चलना, दुकान बंद करना आदि।

किसी-किसी के मत में सामने की छींक प्राणघातक होती है। धन नाश, लड़ाई-झगड़े, आत्मसम्मान पर चोट आदि लगना भी संभव है। दाईं ओर की छींक भी शुभ नहीं होती, किंतु बाईं ओर की छींक शुभ समझी जाती है।

उसका अर्थ शुभ फल होना चाहिए। अगर पीठ पीछे छींक हुई तो शुभ होती है। इसके फलस्वरूप धन, सुयश आदि की प्राप्ति हो सकती है। राज-सम्मान की संभावना बढ़ जाती है।

अगर एक साथ अनेक छींक हों, तो उनका कोई फल नहीं होता। चाहे मनुष्य एक बार छींके अथवा या कई बार।

अगर पहले कोई अन्य अशुभ शकुन हुआ हो और बाद में पीठ पीछे की छींक हुई हो तो शुभ समझी जाती है और अशुभ शकुन का फल समाप्त हो जाता है। 

अगर पहले शुभ शकुन हुआ हो और उनके पश्चात सामने की या दाईं ओर की छींक हो तो उस शुभ शकुन का कोई लाभ नहीं होता, वरन छींक का अशुभ फल अपना प्रभाव व्यक्त करने में प्रबल होता है।

अगर किसी को जुकाम हो रहा हो और वह सामने से या दाईं ओर से छींक दे तो इसका कोई फल नहीं होता।

अगर भय के कारण या हंसी-मजाक में कोई छींके तो वह व्यर्थ है और शकुन के अंतर्गत नहीं आता। अगर कोई वृद्ध पुरुष अथवा बालक छींक दे तो निष्फल होता है।

अगर खोई हुई वस्तु खोजने के लिए निकलते समय छींक हो तो उसका अर्थ खोजी जाने वाली वस्तु का न मिलना ही समझा जाता है। अगर कोई वस्तु खरीदते समय छींक हो तो उस वस्तु के व्यापार में अधिक लाभ हो सकता है। अगर नवीन वस्त्र धारण के समय सहसा छींक आ जाए तो वह अशुभ नहीं माना जाता।

अगर व्यापार आरंभ करने पर छींक हो तो व्यापार में प्रचुर लाभ होने का शकुन है। किसी भी कार्य के लिए गमन करते समय छींक होने पर कार्य के बिगड़ने की आशंका रहती है।

रविवार के दिन अग्रिकोण में जाते समय छींक हो तो कार्य में देर से सिद्धि, वायव्य कोण में जाते समय छींक हो तो सज्जन से भेंट, नैऋत्य कोण में जाते समय छींक हो तो मृत्यु भय का कारण और ईशान कोण में हो तो शुभ होती है।

सोमवार को पूर्व दिशा में जाते समय छींक शुभ, पश्चिम में जाते समय हो तो लाभप्रद, उत्तर में हो तो सज्जन से भेंट कराने वाली और दक्षिण में हो तो घातक होती है।

मंगलवार को पूर्व दिशा में जाते समय छींक शुभ, पश्चिम दिशा में घातक तथा दक्षिण दिशा में और उत्तर दिशा में फल वाली होती है।
बुधवार को जाते समय छींक हो तो पूर्व दिशा में हानिकारक, पश्चिम में कलहप्रद, उत्तर में सज्जन से भेंट कराने वाली, किंतु दक्षिण में शुभ होती है।

वीरवार को जाते समय छींक हो तो पूर्व दिशा में शत्रु को मारने वाली होती है। पश्चिम में जातक के लिए अशुभ, उत्तर में धन क्षय का कारण तथा दक्षिण दिशा में कार्य की सिद्धि में विलंब करने वाली समझी जाती है।

शुक्रवार को किसी कार्य से जाते समय छींक हो, तो पूर्व दिशा में शुभ तथा लाभ देने वाली होगी। पश्चिम में लाभकारी किंतु उत्तर दिशा में धन को नाश करने वाली हो सकती है। दक्षिण दिशा में जाते समय हो तो शुभ समझें।

शुक्रवार को अग्निकोण में जाते समय छींक लाभकारी होगी। वायव्य कोण में अशुभकारक समझी जाएगी। नेऋत्य कोण में अर्थदायक, किंतु ईशान कोण में हानिकारक हो सकती है।

शनिवार को घर से बाहर जाते समय या कार्यारंभ के समय छींक हो तो पूर्व दिशा में धन नष्ट करने वाली, पश्चिम में हानिकारक तथा दक्षिण में शुभ होगी।

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