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श्रीलंका में ‘Ditwah’ का कहर: मौतों का आंकड़ा 132 पार, 176 लापता—राष्ट्रपति ने पूरे देश में State of Emergency घोषित किया

कोलंबो। श्रीलंका इस समय एक ऐसी आपदा की लपटों में है, जिसे इस दशक की सबसे भीषण त्रासदी कहा जा रहा है। चक्रवात Ditwah ने पूरे देश में तबाही की ऐसी तस्वीर खींच दी है, जिसने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह Sri Lanka State of Emergency घोषित करे।
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए आपातकाल लागू करने का निर्णय लिया, ताकि बचाव और राहत अभियानों को बिना किसी प्रशासनिक बाधा के पूरी शक्ति के साथ अंजाम दिया जा सके।

तूफान की तबाही का आलम यह है कि—

  • 132 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है

  • 176 लोग अब भी लापता हैं

  • 15,000 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं

  • 78,000 से अधिक लोग अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं

यह प्राकृतिक प्रहार श्रीलंका के कई जिलों को ऐसे जख्म दे रहा है, जिनकी भरपाई वर्षों तक संभव नहीं होगी।


देश में बढ़ते संकट के बीच Sri Lanka State of Emergency क्यों बना जरूरी?

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, स्थिति हर घंटे बदतर होती जा रही थी। कई गांव पूरी तरह जलमग्न हैं, कई पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन ने बस्तियों को जमीन में दफन कर दिया है।
ऐसे में बचाव अभियान तेज, केंद्रीकृत और निर्बाध तरीके से चलाने के लिए आपातकाल अनिवार्य हो गया।

आपातकाल लागू होने के बाद—

  • सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त कमान को अधिक शक्तियां मिलीं

  • सैकड़ों बचाव टीमें सीधे जमीन पर उतारी गईं

  • नष्ट हो चुके क्षेत्रों में त्वरित संचालन के लिए प्रशासनिक कागजी प्रक्रियाएं हटाई गईं

  • राहत सामग्री की आपूर्ति पर समय-समय पर होने वाली अड़चनें समाप्त हो गईं

राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसी कारण Sri Lanka State of Emergency लागू किया गया।


तूफान दितवाह की तबाही—भूस्खलन, जलमग्न शहर, टूटी सड़कें और बिखरा जीवन

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के महानिदेशक संपत कोटुवेगोडा ने बताया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए, इसलिए सभी जिलों में राहत कार्यों को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

तबाही का स्वरूप—

  • कई शहरों में पानी की ऊँचाई 8–12 फीट तक पहुंच गई

  • सड़क नेटवर्क और पुल बहने से कई क्षेत्र देश से कट चुके हैं

  • बिजली-पानी की आपूर्ति देश के एक-तिहाई हिस्से में पूरी तरह ठप

  • अस्थायी आश्रयों में हजारों परिवारों की भीड़

  • कई क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के बिना पहुंचना असंभव

स्थानीय अधिकारी बता रहे हैं कि भूस्खलन ने कुछ पहाड़ी बस्तियों को पूरी तरह निगल लिया है। बचावकर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मलबे की भारी मात्रा और खराब मौसम बड़ी चुनौती बना हुआ है।


तीनों सेनाओं की संयुक्त तैनाती—दितवाह से लड़ाई एक राष्ट्रव्यापी युद्ध बन गई

Sri Lanka State of Emergency लागू होते ही सेना, नौसेना और वायुसेना के हजारों जवान बचाव मिशन में पूरी क्षमता से जुट गए हैं।

  • थल सेना ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों को निकाल रही है

  • नौसेना जलमग्न शहरों और तटीय क्षेत्रों में रेस्क्यू बोट्स के साथ काम कर रही है

  • वायुसेना हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री और मेडिकल उपकरण पहुंचा रही है

  • विशेष टीमें मलबे में फंसे लोगों की खोज कर रही हैं

  • रैपिड रिस्पांस यूनिट्स भूस्खलन और नदी के उफान वाले क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं

अधिकारियों ने बताया कि कई जगहों पर हालात इतने कठिन हैं कि बचाव दल भी जोखिम में पड़ रहे हैं।
मगर दितवाह की विनाशलीला रुकने का नाम नहीं ले रही—तटरेखा पर लहरें 15–20 फीट तक उठ रही हैं, और तेज हवाएं राहत कार्यों को लगातार बाधित कर रही हैं।


लापता लोगों की संख्या बढ़ने का डर—176 से अधिक लोग अब भी कहीं अज्ञात

अब तक 176 लोगों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
कई परिवार अपने प्रियजनों के बारे में रोते-बिलखते आश्रयों और राहत कैंपों के बाहर खड़े दिखाई दे रहे हैं।
दूरस्थ पहाड़ी गांवों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा, जिससे लापता लोगों की संख्या आगे बढ़ने की आशंका है।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार—

  • नदी में बहकर कई लोग लापता हुए

  • कुछ क्षेत्रों में पूरा गांव मलबे में दफ्न हो गया

  • कई नावें पलट गईं

  • कुछ तटीय बस्तियाँ अब तक पहुंच से बाहर हैं

इसलिए राहत टीमों को उम्मीद है कि बचाव कार्यों के विस्तार के साथ लापता लोगों की संख्या में बदलाव आ सकता है।


श्रीलंका ने मांगी अंतरराष्ट्रीय मदद—हालात देश की क्षमता से परे

DMC और राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की तत्काल अपील की है।

आवश्यक क्षेत्रों में सहायता की जरूरत—

  • दवाइयाँ और मेडिकल सपोर्ट

  • उन्नत बचाव उपकरण

  • अस्थायी रहने के लिए टेंट

  • भोजन व पेयजल

  • संचार सिस्टम ठीक करने के संसाधन

  • हेलीकॉप्टर और रेस्क्यू बोट्स

तूफान दितवाह की तीव्रता इतनी अधिक है कि कई देशों ने प्राथमिक मूल्यांकन के आधार पर मदद भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।


भारत के दक्षिणी तट की ओर भी बढ़ रहा है दितवाह—निगरानी तेज़

मौसम विभागों ने चेतावनी दी है कि तूफान दितवाह रविवार तक भारत के दक्षिणी तट की ओर बढ़ सकता है
इसके चलते भारत, श्रीलंका और मालदीव के समुद्री क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है।
समुद्र लगातार उफान पर है, इसलिए श्रीलंका के तटीय क्षेत्रों में लोगों को पहले से ही अन्यत्र स्थानांतरित किया जा रहा है।


देशभर में दहशत और निराशा—लेकिन बचावकर्मियों की जुझारू कोशिशें जारी

सड़कों पर टूटे पेड़ों, बिखरी गाड़ियों, उखड़ी छतों और मलबों के बीच बचावकर्मी लगातार लोगों की जान बचाने में जुटे हैं।
कई परिवारों का कहना है कि—
“सरकार और सेना हमारे लिए देवदूत की तरह जमीन पर उतरी है, नहीं तो हम जिंदा नहीं बचते।”

दितवाह के हमले ने श्रीलंका की बुनियादी सप्लाई लाइनों को तहस-नहस कर दिया है, लेकिन राहत टीमें दिन-रात काम कर रही हैं ताकि किसी भी जीवित व्यक्ति को पीछे न छोड़ा जाए।


Sri Lanka State of Emergency लागू होने के बाद देश भर में राहत और बचाव कार्यों की गति बढ़ गई है, लेकिन दितवाह की तबाही इतनी व्यापक है कि आने वाले दिनों में चुनौतियाँ और गहरी हो सकती हैं। राष्ट्र के सामने यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय संकट बनकर खड़ी है, जिसे पार करने के लिए सरकार, सेना, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा। श्रीलंका के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि यह अंधकार जल्द ही कमजोर पड़ेगा और पुनर्निर्माण की राह मजबूत होगी।

 

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