उत्तर प्रदेश

Meerut की पत्रकारिता का ‘अटूट स्तंभ’ ढहा: 91 वर्ष की आयु में वरिष्ठ पत्रकार महावीर प्रसाद शशि का निधन, गढ़मुक्तेश्वर में हुआ अंतिम संस्कार

Meerut हिंदी पत्रकारिता के सुदृढ़ और अडिग स्तंभ माने जाने वाले महावीर प्रसाद शशि अब इस दुनिया में नहीं रहे। 91 वर्ष की उन्नत आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, मगर अपने जीवन के हर चरण में उन्होंने पत्रकारिता और सामाजिक चेतना को प्राथमिकता दी।
उनके निधन ने न केवल मेरठ बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मीडिया जगत को गहरे शोक में डाल दिया है। युवा पत्रकारों से लेकर वरिष्ठ संपादकों तक, हर किसी के पास उनसे जुड़े प्रेरक अनुभव हैं, जिन्हें आज लोग भावुक होकर याद कर रहे हैं।


अंतिम संस्कार ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर में, बेटे वरिष्ठ पत्रकार मुकेश गोयल ने दी मुखाग्नि

उनका अंतिम संस्कार गंगा तट गढ़मुक्तेश्वर ब्रजघाट पर किया गया, जहां उनके पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार मुकेश गोयल, परिवार के अन्य सदस्य, करीबियों और पत्रकारों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
अंतिम यात्रा में मेरठ के सामाजिक, राजनीतिक और पत्रकारिता से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जो उनके प्रति सम्मान और प्रेम का बड़ा प्रमाण था।


वह पत्रकार ही नहीं, बल्कि ‘बाबूजी’ थे—मेरठ के युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक

मेरठ और आसपास के युवा पत्रकारों में वे “बाबूजी” के नाम से प्रसिद्ध थे। उनका व्यवहार विनम्र, व्यक्तित्व संतुलित और पत्रकारिता दृष्टिकोण अत्यंत सटीक माना जाता था।कई दशक पत्रकारिता में बिताने के दौरान उन्होंने दैनिक हिन्दू अखबार में अनगिनत नए रिपोर्टर्स को प्रशिक्षित किया—

  • किसी को उन्होंने पहली रिपोर्ट लिखना सिखाया

  • किसी को भाषा की सादगी का महत्व बताया

  • और किसी को यह समझाया कि पत्रकारिता सिर्फ खबर नहीं बल्कि ज़िम्मेदारी होती है

आज उनके द्वारा प्रशिक्षित अनेक पत्रकार देशभर के प्रतिष्ठित समाचार समूहों में कार्यरत हैं और सफलतापूर्वक पत्रकारिता कर रहे हैं।


महावीर प्रसाद शशि का जन्म, बाल्यकाल और राष्ट्रवादी विचारों से प्रारंभिक जुड़ाव

Mahavir Prasad Shashi का जन्म 8 मार्च 1934 को हुआ था।युवा अवस्था में ही उनमें राष्ट्रसेवा और सामाजिक कार्यों के प्रति गहरी रुचि विकसित हो गई थी।
इसी दौर में वह हिन्दू महासभा से जुड़े और मेरठ में उस समय के राष्ट्रीय विचारवान नेताओं से संपर्क में आए।
उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि उन्हें वीर विनायक दामोदर सावरकर से मिलने का अवसर भी प्राप्त हुआ—जो उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण माना गया।


गोरक्षा आंदोलन और Goa Mukti Satyagrah में सक्रिय भूमिका—परंतु कोई सरकारी लाभ नहीं लिया

पत्रकारिता की सच्चाई और राष्ट्रहित की भावना उनके भीतर गहराई तक थी। इसी कारण—

  • वह गोरक्षा आंदोलन से भी जुड़े

  • उन्होंने पूरे जोश और समर्पण के साथ गोवा मुक्ति सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय सहभागिता की

यह उल्लेखनीय है कि सक्रिय भागीदारी और गिरफ्तारी तक झेलने के बावजूद उन्होंने कभी किसी सरकारी पेंशन या लाभ के लिए आवेदन नहीं किया।
उनका मानना था कि राष्ट्रहित में किया गया कार्य ‘कर्तव्य’ है, कोई ‘प्रतिदान’ मांगने योग्य उपलब्धि नहीं।


1954 से दैनिक हिन्दू का प्रकाशन—अवरोधों के बावजूद जारी रखी पत्रकारिता की मशाल

सन 1954 में उन्होंने मेरठ से दैनिक हिन्दू समाचार पत्र का प्रकाशन आरंभ किया।
शुरुआती वर्षों में संसाधनों की कमी, प्रशासनिक चुनौतियाँ और आर्थिक बाधाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रकाशन जारी रखा।

उनकी पत्रकारिता की विशेषताएँ थीं—

  • विनम्रता

  • सख्ती

  • सटीकता

  • तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग

  • और खबरों को किसी दबाव में आए बिना प्रस्तुत करने की आदत

इन्हीं कारणों से उन्हें मेरठ की पत्रकारिता का दृढ़ और प्रभावशाली स्तंभ कहा जाता था।


नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा—उनके बताए रास्ते आज भी पत्रकारिता में आदर्श माने जाते हैं

महावीर प्रसाद शशि ने नई पीढ़ी को हमेशा कर्मठता, सच्चाई और निर्भीकता का पाठ पढ़ाया।
जिन पत्रकारों ने उनसे सीखा, वे कहते हैं कि—

  • उन्होंने कभी खबरों के साथ समझौता नहीं किया

  • उन्होंने कभी सत्ता या व्यक्तियों का भय नहीं माना

  • उन्होंने भाषा की गरिमा और सटीकता को सर्वोच्च स्थान दिया

  • और हमेशा नयी पीढ़ी को “पत्रकारिता का धर्म” समझाया

आज जब मीडिया का स्वरूप तकनीकी रूप से तेज़ी से बदल रहा है, ऐसे दौर में उनके सिद्धांत पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।


परिवार, समाज और पत्रकारिता—तीनों मोर्चों पर समान रूप से समर्पित

महावीर प्रसाद शशि अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं—

  • पुत्र वरिष्ठ पत्रकार मुकेश गोयल

  • एक पुत्री

  • पौत्र

  • नातिन

  • और प्रपौत्र

परिजनों के अनुसार, वे परिवार के साथ उतने ही सरल और प्रेमपूर्ण थे जितने पत्रकारिता में सख्त और सिद्धांतवादी।
समाज में उनकी लोकप्रियता, संघर्षशीलता और शांत स्वभाव का प्रभाव इतना था कि हर पीढ़ी के लोग उन्हें सम्मानित दृष्टि से देखते थे।


मेरठ ने एक सच्चे पत्रकार को खोया—अंतिम यात्रा में जुटी बड़ी भीड़

उनकी अंतिम यात्रा में मेरठ शहर, परिक्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक व्यक्तित्व और नागरिक शामिल हुए।
हर कोई यही कह रहा था कि—
“आज मेरठ ने पत्रकारिता का एक सच्चा प्रहरी खो दिया।”

उनकी स्मृतियां, विचार और सिद्धांत हर उस व्यक्ति के भीतर जीवित रहेंगे, जिसने उन्हें निकट से जाना और उनसे कुछ सीखा।


महावीर प्रसाद शशि का निधन केवल एक वरिष्ठ पत्रकार का विदा होना नहीं बल्कि मेरठ की पत्रकारिता के एक स्वर्णिम युग के शांत हो जाने जैसा है। उनका जीवन, उनकी निर्भीक शैली और राष्ट्रहित के प्रति अथाह समर्पण पत्रकारिता की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत रहेगा। आज जब पूरा शहर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, उनकी बताई राहें और उनके आदर्श हमेशा पत्रकारिता के मार्गदर्शक बने रहेंगे।

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