जलाभिषेक

Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ Muzaffarnagar, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब; हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा शहर

Muzaffarnagar में सावन के दूसरे सोमवार पर पूरा जनपद भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। अंसारी रोड स्थित प्राचीन बोहरों के मंदिर से लेकर गांधी कॉलोनी के अनंतेश्वर महादेव मंदिर, अंकित विहार के परशुराम महादेव मंदिर, शिव चौक, नदी घाट स्थित देवी मंदिर, बिंदल बाजार के माता वाला मंदिर, श्री बालाजी धाम, गणपति धाम, कटार सिंह के मंदिर और बिलासपुर के सिद्धपीठ शिव मंदिर तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री से जलाभिषेक किया। भारी भीड़ के बावजूद महिला-पुरुषों के लिए अलग कतारें, वालंटियर्स और पुलिस बल की मौजूदगी से दर्शन व्यवस्था सुचारु रही। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजता शहर आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रा के बढ़ते धार्मिक उत्साह की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।

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Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

श्रावण के प्रथम सोमवार पर शिवमय हुआ Muzaffarnagar: संभलहेड़ा के श्री पंचमुखी महादेव मंदिर सहित शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा जनपद

Muzaffarnagar श्रावण के प्रथम सोमवार पर संभलहेड़ा स्थित श्री पंचमुखी महादेव मंदिर सहित मुजफ्फरनगर जनपद के सभी प्रमुख शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ ने एक बार फिर भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था और धार्मिक परंपराओं की गहराई को प्रदर्शित किया। श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और सुरक्षा के समन्वय के साथ संपन्न हुए जलाभिषेक कार्यक्रमों ने पूरे जनपद को शिवमय वातावरण से सराबोर कर दिया। आने वाले सावन के सोमवारों और कांवड़ यात्रा के दौरान भी इसी प्रकार की धार्मिक आस्था और उत्साह बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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Religious

श्रावण मास 2026: क्यों है Shravan भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथाएं, व्रत, कांवड़ यात्रा और 20 अद्भुत विशेषताएं

Shravan मास भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत पावन समय माना जाता है। इस माह में श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा, जलाभिषेक, व्रत, जप, दान और सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। विभिन्न धार्मिक परंपराओं और क्षेत्रों में पूजा-पद्धति एवं मान्यताओं में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं, जिनका सम्मान करना भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

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