परिवार

Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

कंधों पर बहंगी, पलड़ों में बैठे नन्हे शिवभक्त: Muzaffarnagar के शिव चौक पर पिता की अनोखी कांवड़ बनी आस्था और संस्कारों की मिसाल

Muzaffarnagar के शिव चौक पर दिल्ली निवासी सतीश द्वारा अपने दोनों छोटे बच्चों को बहंगी के पलड़ों में बैठाकर हरिद्वार से पैदल गंगाजल लाने का दृश्य श्रद्धा, पारिवारिक समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। सतीश का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही सनातन संस्कृति, अच्छे संस्कार और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने इस अनूठे दृश्य का स्वागत करते हुए परिवार की आस्था और भगवान शिव के प्रति समर्पण को नमन किया।

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दिल से

जब रिश्ते अदालत बन जाएं…”: दो पिताओं की पीड़ा, टूटते परिवार और समाज की खामोशी पर एक भावुक सवाल-Relationships

Relationships कभी-कभी एक इंसान को बचाने के लिए बड़ी सलाहों की जरूरत नहीं होती… सिर्फ एक सच्ची बातचीत काफी होती है। रिश्तों को जीतने की जगह अगर समझने की कोशिश की जाए, तो शायद बहुत से घर टूटने से बच सकते हैं। आज समाज को सबसे ज्यादा जरूरत संवेदनशीलता, संवाद और भावनात्मक सहारे की है। अगर आपके आसपास कोई इंसान चुप रहने लगा है, तो उसकी खामोशी को नजरअंदाज मत कीजिए… क्योंकि कई बार सबसे गहरी चीखें वही होती हैं, जो सुनाई नहीं देतीं… ❤️

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