विचार

दिल से

जब रिश्ते अदालत बन जाएं…”: दो पिताओं की पीड़ा, टूटते परिवार और समाज की खामोशी पर एक भावुक सवाल-Relationships

Relationships कभी-कभी एक इंसान को बचाने के लिए बड़ी सलाहों की जरूरत नहीं होती… सिर्फ एक सच्ची बातचीत काफी होती है। रिश्तों को जीतने की जगह अगर समझने की कोशिश की जाए, तो शायद बहुत से घर टूटने से बच सकते हैं। आज समाज को सबसे ज्यादा जरूरत संवेदनशीलता, संवाद और भावनात्मक सहारे की है। अगर आपके आसपास कोई इंसान चुप रहने लगा है, तो उसकी खामोशी को नजरअंदाज मत कीजिए… क्योंकि कई बार सबसे गहरी चीखें वही होती हैं, जो सुनाई नहीं देतीं… ❤️

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