39 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1983 के Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, जीवित बचे आरोपी रमाकांत बरी
Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे सिद्ध किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रह सकती है। अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीयता तथा जांच में मौजूद कमियों के कारण अभियोजन अपना मामला आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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