राजलता सारस्वत

दिल से

मंजिल (Manzil)..अभी दूर है सफर तय करना होगा

मंजिल (Manzil) अभी दूर है सफर तय करना होगा, बुदबुदाओ नही मुखर बनो ,दब्बू नही दबंग बनो! गुनगुनाओ नही खुल कर गाओ। शायद कंठ का पारखी इर्द गिर्द ही हो।

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