Muzaffarnagar शहर में यातायात का सर्वाधिक दबाव अस्पताल चौराहे के बाद मीनाक्षी चौराहा पर पड़ रहा
Muzaffarnagar कावड़ यात्रा शुरू हो चुकी है अभी कावड़ियों की उतनी रेल नहीं है जिसकी उम्मीद की जा रही थी लेकिन जिला प्रशासन ने पहले से ही इतनी अधिक सख्ती कर दी है कि लोग अब इन सख्ती के कारण बेहद तंग और परेशान हो चले हैं
अभी भी शिव भक्तों की भारी भीड़ का इंतजार किया जा रहा है और उसके बाद डाक कावड़ चलेगी लेकिन कावड़ यात्रा की अभी वह असली भीड़ शुरू नहीं है जिसे देखने के लिए लोगों की चहल पहल चौक के निकट रात के समय रह जाती है. मिली जानकारी के अनुसार लाखों काबढ़िया जल उठते के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार में पहुंच चुका है और वहां से जल उठाकर वह उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रविष्ट होने वाला है जिसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अगले दो से तीन दिन में मुजफ्फरनगर से भारी संख्या में कावड़ियों का सैलाब गुजरेगा. इस बीच जिला प्रशासन ने पहले से और अधिक सख्ती करते हुए पाबंदियों का क्रम शुरू कर दिया है.
ईदगाह तिराहे की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सिटी बोर्ड के अधिकारियों ने गढढो को भरने की बजाए वहां पर बैरिकेटिंग कर वहां का अब आगमन ही बंद कर दिया जिससे जल उठाने वाले वे श्रद्धालु जो निकटवर्ती बहुसंख्यक बस्तियों में अपने परिजनों से मिल लेते उन्हें भी बेहद तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है
जिस तरह से जिला प्रशासन के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकी है वह अपने आप में उनके कार्य कुशलता को बयां कर रही है. जिस समय स्कूलों के बंद होने का अंतिम दिन था और बच्चे सवेरे स्कूल के लिए तैयार हुए तो उन्होंने बैरिकेटिंग कर दी गई है जिससे उन्हें वाहनों के रास्ते स्कूल तक जाना महाभारत हो गया जैसे तैसे करके अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजा और स्वयं ही उन्हें लेने पहुंच गए
यद्यपि विद्यालय 8 जुलाई से 16 जुलाई तक बंद कर दिए गए हैं अब वे 17 जुलाई की सुबह खुलेंगे लेकिन इस बीच छोटी-छोटी गलियों के नेक बंद कर देने से लोगों को जहां रोज मर्रा की जरूरत की चीज खरीदने में परेशानी होने लगी है वहीं पर उन्हें आवाजआई के लिए भी परेशानी महसूस हो रही है. अनेक स्थानों पर देखने में आया है कि लोगों ने तंग आकर बाली की रसिया भी खोलकर एक तरफ डाल दी और स्वयं ही आवाज आई करने लगे बताया जाता है कि यह बैरिकेटिंग लगाने का काम परंपरागत रूप से एक ठेकेदार को दिया गया है जो हर वर्ष यह कार्य कर्ता आया है
पाबंदियों का आलम यह है की शहर में पैदल निकलना भी अब मुश्किल हो गया है यदि भी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के वाहनों को निकालने में कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन आम आदमी बेहद परेशान हो चला है शहर में यातायात का सर्वाधिक दबाव अस्पताल चौराहे के बाद मीनाक्षी चौराहा पर पड़ रहा है. मीनाक्षी चौराहे पर यातायात को पास करने के लिए duty यातायात पुलिस की है, व सामान्य पुलिस की काफी मौजूदगी है लेकिन सड़क में बने हुए और चौराहे पर बने हुए गड्ढे आज भी नगर पालिका की करतूत को उजागर कर रहे हैं
यातायात जाम होने और गली मोहल्ले की नाकेबंदी के कारण पूरा शहर दो भागों में विभाजित हो गया है, एक ही शहर में रहने वाले लोग शहर के दूसरे हिस्से में रह रहे अपने ही लोगों से बेगाने हो चले हैं यदि भी अनेक स्थानों पर बैरिकेडिंग की आवश्यकता नहीं थी और वहां सामान्य रूप से कार्य हो रहा था लेकिन संबंधित ठेकेदार ने वहां भी इस हिसाब से बैरिकेडिंग लगा दी
लोग उन बैरिकेडिंग के नीचे से निकलकर आराम से आ जा रहे हैं. ऐसे में इन बोलियों का लगाया जाना और जितिया साबित नहीं करता कमोबेश यही स्थिति शिव चौक स्थित कंट्रोल रूम की है जहां आज आधुनिक जमाने में भी लैंडलाइन फोन की व्यवस्था की गई है कांवरिया भाइयों से बात करने पर पता चला कि लैंडलाइन पर फोन करने के लिए वे लैंडलाइन की सेवाएं कहां से प्राप्त करें
अब जमाना मोबाइल का है अच्छा होता मोबाइल के नंबरों की सीरीज इसके लिए जारी की जाती ताकि कांवरिया भाई अपनी किसी भी दिक्कत परेशानी में कंट्रोल रूम से सीधे संपर्क कर सकते लेकिन ऐसा न करके उन्हें बीएसएनएल सेवा का लैंडलाइन नंबर जारी किया गया है. इसी प्रकार कंट्रोल रूम ने सफाई कर्मचारियों को जो एप्रिन बनते हैं वह भी शक्ल और चेहरे देखकर बांटे गए हैं, अनेक लोगों को एप्रिन ना मिलने से अपनी ड्यूटी निभाने में बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है
इसके लिए उन्होंने सिटी बोर्ड के स्वास्थ्य विभाग से काफी गुहार भी लगाई है लेकिन हेलो कंट्रोल रूम वाले इसकी सुनवाई करने से इनकार कर रहे हैं. गलियों की नाकेबंदी करने से आदेश शहर में खाद्य पदार्थों के दाम चौगुन हो चले हैं दुकानदारों ने बात करने पर बताया कि साहब दम इसलिए बढ़ाने पर वह मजबूर हैं क्योंकि चुपचाप सुविधा शुल्क देकर नको से निकालकर आना पड़ता है
जिसका खामियाजा सीधे-सीधे उपभोक्ता को ही उठाना पड़ेगा शहर में सब्जी और फलों की भी किल्लत पैदा हो गई है और यह समस्या अगले 10 दिन तक जारी रह सकती है जिसके लिए लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं के तहत इन लोगों को पास जारी न किया तो स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है

