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UK में भारतीय मूल के पूर्व इमाम को उम्रकैद: ‘जिन्न’ और काला जादू का डर दिखाकर बच्चियों से यौन शोषण का आरोप साबित

UK में भारतीय मूल के एक पूर्व इमाम को लड़कियों और महिलाओं के यौन शोषण के गंभीर मामलों में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी Abdul Halim Khan को रेप, बच्चों के साथ यौन अपराध और यौन शोषण समेत कुल 21 मामलों में दोषी पाया गया है।

कोर्ट के फैसले के अनुसार 54 वर्षीय आरोपी को कम से कम 20 साल जेल में बिताने होंगे। इस मामले ने ब्रिटेन में धार्मिक संस्थाओं, सामुदायिक भरोसे और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


‘जिन्न’ और बुरी आत्मा का डर दिखाकर करता था शोषण

लंदन पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को धार्मिक और आध्यात्मिक शक्तियों वाला व्यक्ति बताता था। वह लड़कियों और महिलाओं को विश्वास दिलाता था कि उन पर ‘जिन्न’, बुरी आत्मा या काले जादू का असर है।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी इसी बहाने पीड़ितों को अकेले बुलाता और कथित तौर पर “इलाज” या “रूहानी मदद” के नाम पर उनका यौन शोषण करता था। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी धार्मिक विश्वास और अंधविश्वास का इस्तेमाल कर पीड़ितों को मानसिक रूप से नियंत्रित करता था।


12 साल तक की बच्चियां भी बनीं शिकार

जांच एजेंसियों के मुताबिक पीड़ितों में 12 साल तक की बच्चियां भी शामिल थीं। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों से पता चला कि आरोपी ने लंबे समय तक कई महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने 2004 से 2015 के बीच कम से कम 7 महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने इसे “विश्वास का बेहद खतरनाक दुरुपयोग” बताया है।


धार्मिक पहचान और सामुदायिक भरोसे का उठाया फायदा

रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी ईस्ट लंदन की बांग्लादेशी मुस्लिम कम्युनिटी में इमाम के रूप में जाना जाता था। वह धार्मिक पहचान और सामाजिक प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतता था।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कई परिवार आरोपी को आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानते थे। इसी विश्वास का फायदा उठाकर वह पीड़ितों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव बनाता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर धार्मिक या सामाजिक प्रतिष्ठा का इस्तेमाल कर पीड़ितों को डर और अपराधबोध में रखते हैं, जिससे शिकायत दर्ज होने में वर्षों लग जाते हैं।


पीड़ितों को ‘काला जादू’ का डर दिखाकर रखता था चुप

लंदन पुलिस के मुताबिक आरोपी पीड़ितों को धमकाता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनके परिवार पर ‘काला जादू’ या बुरी आत्माओं का असर होगा। इसी डर और मानसिक दबाव के कारण कई लड़कियां और महिलाएं लंबे समय तक चुप रहीं।

अदालत में सुनवाई के दौरान कई पीड़ितों ने बताया कि वे वर्षों तक मानसिक तनाव और डर में जीती रहीं। कुछ पीड़ितों ने यह भी कहा कि उन्हें लंबे समय तक समझ ही नहीं आया कि उनके साथ जो हो रहा था वह अपराध है।


पुलिस जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

जांच अधिकारियों के अनुसार मामले की तह तक पहुंचने में काफी समय लगा क्योंकि पीड़ित शुरुआत में सामने आने से डर रही थीं। बाद में जब कुछ महिलाओं ने साहस जुटाकर शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की।

डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत मामला तैयार किया गया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी को कई गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया।


ब्रिटेन में धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही पर फिर बहस

इस मामले के सामने आने के बाद ब्रिटेन में धार्मिक संस्थाओं और सामुदायिक नेतृत्व की जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बाल सुरक्षा और महिला अधिकारों से जुड़े संगठनों ने कहा है कि धार्मिक प्रभाव का इस्तेमाल कर किए जाने वाले अपराधों पर सख्त निगरानी जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धर्म या समुदाय में आस्था का दुरुपयोग कर लोगों को मानसिक रूप से नियंत्रित करना बेहद गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को सुरक्षित माहौल और कानूनी सहायता मिलना बेहद आवश्यक होता है।


पुलिस ने पीड़ितों की बहादुरी की सराहना की

लंदन पुलिस ने अदालत के फैसले के बाद पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की बहादुरी की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि इतने लंबे समय बाद सामने आकर बयान देना आसान नहीं था।

पुलिस ने लोगों से अपील की कि यदि किसी भी धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर किसी प्रकार का शोषण किया जाता है तो उसकी तुरंत शिकायत करें।


समाज में जागरूकता और संवाद की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि अंधविश्वास, डर और सामाजिक दबाव का फायदा उठाकर अपराध किए जा सकते हैं। बच्चों और महिलाओं को जागरूक करना, परिवारों में खुला संवाद और मानसिक सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार धार्मिक पहचान किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं बनाती और ऐसे अपराधों में सख्त कार्रवाई समाज में भरोसा बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।


UK में भारतीय मूल के पूर्व इमाम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक या सामाजिक प्रभाव का इस्तेमाल कर किए गए यौन अपराधों को कानून गंभीरता से देखता है। पीड़ितों की गवाही और लंबी जांच के बाद आया यह फैसला बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में न्याय व्यवस्था की अहम भूमिका को भी सामने लाता है।

 

News-Desk

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