उत्तर प्रदेश

UP में बड़ा आतंकी खुलासा: Ayodhya राम मंदिर और वाराणसी थे निशाने पर, अस्पतालों को उड़ाने की थी साजिश – पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली साजिश!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर Ayodhya  और वाराणसी तक सुरक्षा एजेंसियों ने एक गंभीर आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। पकड़े गए आतंकियों की पूछताछ में सामने आया है कि ये मॉड्यूल अस्पतालों और भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर तबाही फैलाने की योजना बना रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, इन आतंकियों की हिट लिस्ट में Ayodhya का राम मंदिर, वाराणसी का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, और कई बड़े अस्पताल शामिल थे।
यह नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ था और “स्लीपर सेल” के जरिए काम कर रहा था।


पूछताछ में बड़ा खुलासा – अस्पतालों और धार्मिक स्थलों को उड़ाने की थी तैयारी

आतंकियों से गहन पूछताछ के दौरान पता चला है कि अस्पतालों को मुख्य टारगेट बनाने की वजह यह थी कि वहाँ भीड़ हमेशा ज्यादा रहती है और इससे “जनहानि अधिक हो”
इनकी योजना थी कि देशभर में दहशत फैलाने के लिए ऐसे स्थानों पर ब्लास्ट या बम धमाका किया जाए जहाँ सुरक्षा जांच अपेक्षाकृत कम होती है।

जांच एजेंसियों को मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा से संकेत मिला है कि इन आतंकियों ने वाराणसी के दशाश्वमेध घाट, कैंट रेलवे स्टेशन, और अयोध्या के आसपास के इलाकों की कई बार रेकी की थी।
इससे साफ है कि साजिश बहुत गहराई से रची जा रही थी।


शाहीन नाम की महिला थी मॉड्यूल की ‘कोऑर्डिनेटर’

एटीएस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला आतंकी शाहीन ने अयोध्या में “स्लीपर मॉड्यूल एक्टिवेट” किया हुआ था।
उसका काम था स्थानीय लोगों को जोड़ना, सुरक्षित ठिकाने तैयार करना और विस्फोटक सामग्री को इकट्ठा करना।
शाहीन पिछले कुछ महीनों से ऑनलाइन मैसेजिंग ऐप्स और डार्क वेब के ज़रिए अन्य सदस्यों से जुड़ी थी।
एजेंसियों को उसके पास से कई संदिग्ध चैट, लोकेशन डेटा, और विदेशी नंबरों से बातचीत के सबूत मिले हैं।


लाल किला ब्लास्ट से जुड़ा लिंक – हड़बड़ी में हुआ धमाका

जांच में अब तक यह भी सामने आया है कि हाल ही में हुए लाल किला ब्लास्ट के पीछे इन आतंकियों का ही नेटवर्क था, लेकिन वह असफल परीक्षण (Failed Attempt) साबित हुआ।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, विस्फोटक में न टाइमर का इस्तेमाल हुआ, न किसी ट्रिगर डिवाइस का।
शक है कि जल्दबाजी में हैंडलिंग के दौरान विस्फोट हो गया, जिससे यह मॉड्यूल उजागर हो गया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि प्रयोग की गई सामग्री मिलिट्री ग्रेड नहीं थी, बल्कि घरेलू केमिकल्स से बनाई गई थी।


अयोध्या और वाराणसी पर क्यों था फोकस?

विशेषज्ञों के अनुसार, अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र हैं।
इन पर हमला करने से न केवल भय और अस्थिरता का माहौल बनता, बल्कि देशभर में सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका थी।
इसीलिए इन जगहों को “सिंबॉलिक टारगेट” के रूप में चुना गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया –

“अयोध्या और काशी पर हमला सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक आतंक पैदा करने की कोशिश थी। ये लोग देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को तोड़ना चाहते थे।”


एटीएस और इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई से बची बड़ी तबाही

लखनऊ, कानपुर, मेरठ और दिल्ली में एकसाथ की गई संयुक्त छापेमारी में कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें से कुछ ने पाकिस्तान स्थित संगठनों से ऑनलाइन ट्रेनिंग लेने की बात कबूल की है।
टीमों को विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक टाइमर, नक्शे, और डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं।
एटीएस अधिकारियों ने बताया कि “अगर ये गिरफ्तारी कुछ दिन देर से होती, तो अयोध्या में बड़ा ब्लास्ट हो सकता था।”


मॉड्यूल का नेटवर्क – हर राज्य में फैले थे लिंक

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क दिल्ली, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक तक फैला हुआ था।
प्रत्येक क्षेत्र में “स्लीपर सेल” सक्रिय था जो समय-समय पर धन, उपकरण और मानव संसाधन भेजता था।
जांचकर्ताओं ने कहा कि इस नेटवर्क को “मॉड्यूल A-YD-21” नाम से संचालित किया जा रहा था, जिसमें 10 से अधिक कोर सदस्य शामिल थे।


डिजिटल साक्ष्य और विदेशी फंडिंग का भी शक

अब जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या इन आतंकियों को विदेशी संगठनों या सोशल नेटवर्किंग चैनलों के जरिए फंडिंग मिल रही थी।
साइबर सेल को ऐसे कई ट्रांजेक्शन मिले हैं जिनका स्रोत क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में छुपा है।
सूत्रों का कहना है कि यह पूरी “डिजिटल टेरर चैन” थी जिसमें पैसों से लेकर विस्फोटक तक सब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से ट्रांसफर हो रहे थे।


राज्य सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या, वाराणसी, लखनऊ और नोएडा समेत सभी प्रमुख शहरों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
राम मंदिर परिसर, घाट क्षेत्रों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा –

“किसी भी आतंकी मंशा को सफल नहीं होने दिया जाएगा। जो देश की शांति भंग करेगा, उसे मिटा दिया जाएगा।”


जनता से अपील – अफवाहों से बचें, सतर्क रहें

राज्य पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दें। साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें। एजेंसियों का कहना है कि कई बार आतंकवादी संगठन फेक न्यूज़ और दहशत फैलाने की रणनीति अपनाते हैं ताकि जनता में भ्रम फैल सके।


अयोध्या और वाराणसी को दहलाने की यह साजिश अगर कामयाब होती, तो देश एक और बड़े आतंकवादी हमले का गवाह बन सकता था। लेकिन उत्तर प्रदेश एटीएस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता ने सैकड़ों जिंदगियाँ बचा लीं। अब एजेंसियां हर एंगल से इस मॉड्यूल की जांच कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी कोशिश को जड़ से खत्म किया जा सके।

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