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39 सेकंड में दो बार कांपी धरती, मची भीषण तबाही: Venezuela में ‘डबलेट’ भूकंप ने ली 164 जानें, वैज्ञानिक भी हैरान

Venezuela Doublet Earthquake ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वेनेजुएला में बुधवार शाम महज 39 सेकंड के भीतर आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचा दी। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 164 लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

इस घटना को वैज्ञानिक सामान्य भूकंप नहीं बल्कि “डबलेट अर्थक्वेक (Doublet Earthquake)” की श्रेणी में रख रहे हैं। यह अत्यंत दुर्लभ भूवैज्ञानिक घटना होती है, जिसमें लगभग एक ही समय में दो अलग-अलग मुख्य भूकंप आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह रही कि नुकसान सामान्य भूकंप की तुलना में कहीं अधिक हुआ।


पहले 7.2 और फिर 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा भूकंप

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था। इसका केंद्र वेनेजुएला के कैरिबियन तट पर स्थित मोरोन शहर के पश्चिमी क्षेत्र में था और इसकी गहराई लगभग 22 किलोमीटर दर्ज की गई।

पहले झटके के ठीक 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र मोरोन से लगभग 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित था और इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर थी। कम गहराई के कारण इस दूसरे झटके ने सतह पर कहीं अधिक विनाशकारी प्रभाव डाला।

दोनों भूकंपों के बीच समय का अंतर इतना कम था कि लोग पहले झटके से संभल भी नहीं पाए थे और दूसरा झटका पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को पूरी तरह ध्वस्त कर गया।


‘डबलेट’ भूकंप क्या होता है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

सामान्यतः किसी बड़े भूकंप के बाद छोटे-छोटे आफ्टरशॉक महसूस किए जाते हैं, लेकिन Doublet Earthquake इससे पूरी तरह अलग घटना है।

भूकंप विज्ञान के अनुसार जब लगभग एक ही समय में, एक ही क्षेत्र में, लेकिन अलग-अलग फॉल्ट लाइनों से उत्पन्न दो बड़े मुख्य भूकंप आते हैं और दोनों की तीव्रता लगभग समान होती है, तो इसे डबलेट भूकंप कहा जाता है।

इस स्थिति में दोनों भूकंप स्वतंत्र रूप से ऊर्जा छोड़ते हैं। इसलिए पहला झटका जहां संरचनाओं को कमजोर कर देता है, वहीं दूसरा झटका उन्हें पूरी तरह गिरा सकता है। यही कारण है कि डबलेट भूकंप को दुनिया की सबसे खतरनाक भूवैज्ञानिक घटनाओं में गिना जाता है।


दो अलग-अलग एपिसेंटर ने बढ़ाई तबाही

विशेषज्ञों के अनुसार वेनेजुएला में आए दोनों भूकंपों के केंद्र एक-दूसरे के काफी निकट जरूर थे, लेकिन दोनों अलग-अलग भूगर्भीय दरारों (Fault Lines) से उत्पन्न हुए।

भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों घटनाएं सीस्मोलॉजिकल दृष्टि से अलग थीं। इसका अर्थ यह है कि दोनों की ऊर्जा, भूकंपीय तरंगें और उत्पत्ति के स्रोत अलग-अलग थे।

यही कारण रहा कि प्रभावित क्षेत्रों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। पहले झटके से जिन भवनों में दरारें आ गई थीं, वे दूसरे शक्तिशाली झटके को बिल्कुल भी नहीं झेल सके और देखते ही देखते मलबे में बदल गए।


कैसे पहले भूकंप ने दूसरे को ट्रिगर किया?

भूकंप विशेषज्ञों का मानना है कि पहला भूकंप ही दूसरे बड़े झटके का प्रमुख कारण बना।

जब पहला 7.2 तीव्रता का भूकंप आया तो पृथ्वी की ऊपरी परत में अचानक बड़ा तनाव उत्पन्न हुआ। इससे समीप स्थित दूसरी सक्रिय फॉल्ट लाइन पर दबाव तेजी से बढ़ गया।

यह दूसरी फॉल्ट लाइन पहले से ही तनाव की स्थिति में थी। पहले भूकंप से उत्पन्न ऊर्जा और कंपन ने उसे भी सक्रिय कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप कुछ ही सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा शक्तिशाली भूकंप आया।

यही श्रृंखलाबद्ध भूगर्भीय प्रक्रिया इस पूरे विनाश की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।


USGS ने जारी किया रेड लेवल अलर्ट

दोनों शक्तिशाली भूकंपों के बाद अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने रेड लेवल PAGER अलर्ट जारी किया है।

इस प्रकार का अलर्ट तब जारी किया जाता है जब बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की आशंका या पुष्टि होती है।

भूकंप के बाद कई क्षेत्रों में लगातार आफ्टरशॉक महसूस किए गए हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और भूमि धंसने की घटनाओं की आशंका भी जताई गई है।

राहत एवं बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में खोज अभियान चला रही हैं।


भूस्खलन और लिक्विफैक्शन का बढ़ा खतरा

भूकंप के बाद विशेषज्ञों ने दो अतिरिक्त खतरों को लेकर भी चेतावनी जारी की है।

पहला खतरा भूस्खलन का है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन पहले ही अस्थिर हो चुकी है।

दूसरा खतरा लिक्विफैक्शन (Liquefaction) का है। इस प्रक्रिया में अत्यधिक कंपन के कारण पानी से संतृप्त मिट्टी अपनी मजबूती खो देती है और दलदल जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ सकती है और अतिरिक्त क्षति होने की संभावना रहती है।


टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है वेनेजुएला

भूवैज्ञानिक दृष्टि से वेनेजुएला दुनिया के संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है।

यह देश साउथ अमेरिकन प्लेट और कैरिबियन प्लेट के मिलन क्षेत्र पर स्थित है। दोनों प्लेटें हर वर्ष लगभग 20 मिलीमीटर की गति से एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं।

इसी निरंतर भूगर्भीय दबाव के कारण यहां समय-समय पर मध्यम से लेकर अत्यधिक शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी वेनेजुएला में कम गहराई वाले भूकंप आने की संभावना हमेशा बनी रहती है।


1990 के बाद सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी

विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना पिछले कई दशकों में वेनेजुएला की सबसे गंभीर भूकंपीय आपदाओं में शामिल हो गई है।

इससे पहले वर्ष 1990 में राजधानी काराकास के आसपास लगभग 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जिसने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था।

वर्तमान आपदा को उससे भी अधिक जटिल माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक के बाद एक दो मुख्य भूकंप आए, जिसने बचाव और निकासी के प्रयासों को बेहद कठिन बना दिया।


तुर्किये में भी सामने आया था ऐसा दुर्लभ पैटर्न

भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक समय में इस तरह की डबलेट घटना अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है।

साल 2023 में तुर्किये में भी दो बड़े शक्तिशाली भूकंप आए थे, हालांकि दोनों के बीच लगभग नौ घंटे का अंतर था। उस घटना ने भी भारी तबाही मचाई थी और वैज्ञानिकों का ध्यान डबलेट जैसी घटनाओं की ओर आकर्षित किया था।

हालांकि वेनेजुएला की घटना और भी अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यहां दोनों मुख्य भूकंपों के बीच केवल 39 सेकंड का अंतर था, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का लगभग कोई अवसर नहीं मिल सका।


वैज्ञानिक क्यों कर रहे हैं इस घटना का गहन अध्ययन?

भूकंप विज्ञानियों के लिए यह घटना अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है। वैज्ञानिक अब यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि किस प्रकार एक बड़े भूकंप से आसपास की दूसरी सक्रिय फॉल्ट लाइन इतनी तेजी से सक्रिय हो गई।

ऐसे अध्ययन भविष्य में भूकंप जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डबलेट भूकंप जैसी घटनाओं की बेहतर समझ भविष्य में लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वेनेजुएला में आए दोहरे शक्तिशाली भूकंप ने यह दिखा दिया कि प्रकृति का प्रकोप कभी-कभी कुछ ही सेकंड में पूरी तस्वीर बदल सकता है। 39 सेकंड के अंतराल में आए दो स्वतंत्र लेकिन शक्तिशाली झटकों ने व्यापक जनहानि और भारी तबाही मचाई। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं, जबकि वैज्ञानिक इस दुर्लभ भूवैज्ञानिक घटना का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे जोखिमों को बेहतर ढंग से समझा और कम किया जा सके। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।

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