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मीरापुर के सिखरेड़ा गांव में जलभराव से हाहाकार! गंदे पानी में मच्छरों का आतंक, बच्चों की पढ़ाई पर संकट – ग्रामीणों ने की जिलाधिकारी Muzaffarnagar से गुहार

मीरापुर (Muzaffarnagar) – मीरापुर क्षेत्र के सिखरेड़ा गांव में जलभराव की समस्या ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया है। प्राथमिक विद्यालय के पास सड़क पर जमा गंदा पानी अब स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, और अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांव में बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है।


स्कूल जाने में बच्चों को हो रही है परेशानी, दीवार फांदकर पहुंचते हैं कक्षा तक

गांव सिखरेड़ा दिल्ली–पौड़ी राजमार्ग (NH-58) पर स्थित है। यहां दो प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से एक विद्यालय के पास मुख्य सड़क पर गंदा पानी जमा रहता है। यह पानी महीनों से नहीं सूख रहा, जिससे बच्चों को स्कूल पहुंचने में भारी दिक्कत हो रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे स्कूल तक पहुंचने के लिए या तो लंबा चक्कर काटकर पीछे के रास्ते से जाते हैं या फिर स्कूल की दीवार फांदकर अंदर पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में तो यह पानी छोटे तालाब का रूप ले लेता है, जिससे आने-जाने में खतरा बढ़ जाता है।


किसान के बैल की मौत से मचा था हड़कंप – करंट फैलने से हुआ हादसा

कुछ महीने पहले इसी जमा हुए गंदे पानी में बिजली का करंट फैल जाने से एक किसान के बैल की मौत हो गई थी। यह हादसा पूरे गांव के लिए चेतावनी साबित हुआ, लेकिन आज तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

गांव के बुजुर्ग किसान मनोज त्यागी ने बताया, “हमने कई बार शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। बारिश के मौसम में तो घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल भेजना डर का काम बन गया है।”


मच्छरों का प्रकोप, डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ा

गांव में जमा इस पानी से मच्छरों की भरमार हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी में बदबू के साथ-साथ कीड़े और मच्छर लगातार पनप रहे हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

गांव की महिलाएं और बुजुर्ग इस जलभराव के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। नीटू देवी, एक स्थानीय निवासी, ने कहा, “शाम होते ही मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन नाली साफ करने कोई नहीं आता।”


ग्राम प्रधान पिंकी ने बताया कारण – हाईवे चौड़ीकरण से बिगड़ी व्यवस्था

इस संबंध में जब ग्राम प्रधान पिंकी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पहले गांव का पानी हाईवे किनारे बने गड्ढों (ड्रेनेज पिट) में चला जाता था। लेकिन अब एनएचएआई (NHAI) द्वारा हाईवे चौड़ीकरण के दौरान उन गड्ढों को भर दिया गया है, जिससे जल निकासी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।

उन्होंने कहा कि यह समस्या गांव की गलती नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव का परिणाम है। पिंकी ने बताया कि वे खुद एनएचएआई अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और जल्द ही नाला निर्माण या वैकल्पिक जल निकासी व्यवस्था के लिए कार्य शुरू होगा।

उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि, “यह समस्या लंबे समय तक नहीं रहेगी। संबंधित अधिकारियों से बातचीत चल रही है, और बहुत जल्द नाला बनवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”


ग्रामीणों ने डीएम उमेश मिश्रा से लगाई गुहार – शीघ्र कार्रवाई की मांग

गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से लिखित शिकायत देकर समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है।

ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो गांव में बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है। उन्होंने प्रशासन से नियमित नालियों की सफाई, स्थायी ड्रेनेज सिस्टम और सड़क सुधार की मांग की है।


एनएचएआई और ग्राम पंचायत के बीच तालमेल की कमी, बना मुख्य कारण

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव की समस्या का असली कारण एनएचएआई और ग्राम पंचायत के बीच समन्वय की कमी है। हाईवे चौड़ीकरण के बाद गड्ढे भर दिए गए, लेकिन जल निकासी के लिए नई नालियां नहीं बनाई गईं।

सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की अनदेखी से अब ग्रामीणों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस समस्या का जल्द स्थायी समाधान निकालेंगे।


गांव में बढ़ रही नाराजगी – ग्रामीण बोले, सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए

गांव में अब लोगों का सब्र टूटने लगा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्या जल्द नहीं सुलझाई गई, तो वे सड़क पर धरना देने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने होंगे।

गांव के विजय प्रधान ने कहा, “हर बार सिर्फ बातें होती हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। इस बार अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो हम हाईवे जाम करने को मजबूर होंगे।”


स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों पर असर, गांव में फैली दुर्गंध से बढ़ी मुश्किलें

लगातार जमा पानी से सड़क पर कीचड़ और दुर्गंध फैल चुकी है। लोग मास्क लगाकर निकलने को मजबूर हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब दुकान तक नहीं पहुंचते, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ा है।

अजय त्यागी, एक स्थानीय दुकानदार, ने बताया, “दुकान के बाहर पानी और मच्छर हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, लोग मंदिर तक नहीं जा पाते। गांव की छवि खराब हो रही है।”


मीरापुर क्षेत्र के सिखरेड़ा गांव की यह समस्या सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है जो विकास कार्यों के बीच जनता की मूल ज़रूरतों को अनदेखा कर देती है। एनएचएआई, ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन के बीच समन्वय से यह समस्या आसानी से सुलझ सकती है। ग्रामीणों को अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि वास्तविक राहत की उम्मीद है। आने वाले दिनों में अगर प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई की, तो सिखरेड़ा गांव फिर से स्वच्छ और सुरक्षित जीवन की ओर लौट सकेगा।

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