Muzaffarnagar News: महिला बैरक मेंं ‘‘ महिलाओं व बच्चों के मौलिके अधिकार ‘‘ विषय पर विधिक साक्षरता शिवि
Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त कलेन्डर के अनुसार माननीय प्रभारी जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर श्री जय सिहं पुण्डीर, के कुशल निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर की और से जिला कारागार मुजफफरनगर की ंमहिला बैरक मेंं ‘‘ महिलाओं व बच्चों के मौलिके अधिकार ‘‘ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया
जिसमें सलोनी रस्तोगी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर के द्वारा उपस्थित समस्त महिला बन्दियों व किशोर अपचारियों को भारतीय संविधान में महिला /बच्चों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में विस्तार से बताया गया। तथा यह भी बताया गया कि हमारे संविधान में पुरूषों के समान ही महिलाओं को भी अधिकार प्राप्त है।
महिला बन्दियों को गिरफतारी के कारण जानने उनके परिचितों को सूचित करने वकील से परामर्श करने कारागार में स्वास्थय, भोजन, बच्चों की नियमानुसार शिक्षा का अधिकार, पोष्टिक आहार, आदि का अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है। जेलर जिला कारागार द्वारा बता गया कि वर्तमान में कारागार में 59 महिलाए तथा महिलाओं के साथ 08 बच्चें निरूद्ध है।
सचिव द्वारा महिला कैदियों से उनकी समस्याए सुनी गयी तथा कोई भी कानूनी समस्या होने पर जेलर जिला कारागार के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत कराने अथवा आवेदन पत्र देने का कथन किया गया जिस पर कार्यवाही किये जाने की बात कही गयी। जेलर जिला कारागार को निर्देशित किया गया की जिन महिला बन्दियों के मामले ई-जेल लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित हो सकते है उनकी सूची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करें
जिससे उने मामलों का शीध्र निस्तारण हो सकें। सचिव द्वारा महिलाओं के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया
महिलाओं को कानून द्वारा अनेको अधिकार दिये गये है लेकिन जागरूकता की कमी है। महिलाओं को जागरूक करने का कार्य जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। यदि कोई महिला मुकदमें की पैरवी आर्थिक स्थिति के कारण करने मे असमर्थ है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन देने पर निः शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा। इस अवसर पर श्री कमलेश सिंह जेलर, श्री सुरेन्द्र मोहन सिंह, उप जेलर, श्री कैलाश नारायण शुक्ला, उप जेलर आदि उपस्थित रहें।
श्री शक्ति सिंह अपर जिला जज /नोडल अधिकारी, की अध्यक्षता में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत दीवानी न्यायालय परिसर में स्थित क्रेन्दीय हाल में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के प्रमुख प्राविधानों पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें डा0 मीरा सक्सेना, श्री बिजेन्द्र मलिक, श्री जितेन्द्र पाल सिंह, श्री मनोज कुमार त्यागी, श्री अर्जुन सिंह, अधिवक्तागण, श्री राम लॉ कालेज, एस0डी0 लॉ कालेज,डी0ए0वी0 लॉ कालेज, दीन दयाल लॉ कालेज, के प्रार्चाय, छात्र एवम् छात्राए उपस्थित रहें। श्री शक्ति सिंह नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 39 ए के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर व्यकि्ैतयों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना राज्य का कर्त्तव्य है।
इसी कर्त्तव्य के अनुपालन में वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पारित किया गया था। उक्त अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर ाष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला स्तर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तहसील स्तर पर तहसील विधिक सेवा समिति कार्यरत् है।
सलोनी रस्तोगी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा गोष्ठी में उपस्थित व्यक्तियों को अवगत कराया गया कि इन संस्थाओं का प्रमुख कार्य आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करना आम जनमानस को उनके अधिकारों तथा कर्त्तव्यों के प्रति विधिक रूप से जागरूक करना है।
इसी अनुक्रम में समय समय पर लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है तथा कारागार में प्रतिमाह ई-ा लोक अदालत का आयोजन किया जाता है जिससे पक्षकारों को सस्ता व सुलभ न्याय उपलब्ध हो सकें। यदि दो पक्षों में विवाद हो तो उस विवाद का निस्तारण प्री लिटिगेशन के द्वारा भी कराया जा सकता है।

