जानिए शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से क्या फल मिलता है?
👉 शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर दही अर्पित करने से हमें जीवन में हर्ष और उल्लास की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर शहद चडाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है , वाणी में मिठास रहती है, समाज में लोकप्रियता बढ़ती है।
👉 शिवलिंग पर घी चढ़ाने से हमें तेज की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर शकर चढ़ाने से सुख – समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर ईत्र चढ़ाने से धर्म की प्राप्ति होती हैं।
👉 शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से धन धान्य की वृद्धि होती है, जीवन में सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से समाज में यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर केशर अर्पित करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है , विवाह में आने वाली समस्त अड़चने दूर होती है, मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है विवाह के योग शीघ्र बनते है ।
👉 शिवलिंग पर भांग चढ़ाने से हमारे समस्त पाप समस्त बुराइयां दूर होती हैं।
👉 शिवलिंग पर आँवला अथवा आँवले का ऱस चढ़ाने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है ।
👉 शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से समस्त पारिवारिक सुखो की प्राप्ति होती है , परिवार के सदस्यों के मध्य में प्रेम बना रहता है।
👉 शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है, संतान आज्ञाकारी होती है।
👉 शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
👉 शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों समस्त रोगो का नाश होता है।
👉 शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।
👉 भगवान भोलेनाथ की बेलपत्र से पूजा करने से सभी संकट दूर होते है।
👉 भगवान भोलेनाथ की दूर्वा से पूजन करने दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है।
👉 भगवान भोलेनाथ की हारसिंगार के फूलों से पूजन करने पर जीवन में सुख-संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
👉 भगवान भोलेनाथ पर चमेली के फूल चढ़ाने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है।
👉 भगवान भोलेनाथ की धतूरे से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
👉 भगवान भोलेनाथ की आंकड़े के फूल से पूजन, श्रंगार करने से जीवन के सभी सुख मिलते है, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
👉 भगवान भोलेनाथ की अलसी के फूलों से पूजन करने से मनुष्य सभी देवताओं का प्रिय हो जाता है।
👉 भगवान भोलेनाथ की बेला के फूल से पूजन करने पर मनचाहा, सुंदर जीवनसाथी मिलता है।
👉 भगवान भोलेनाथ की जूही के फूल से पूजन करने से घर कारोबार में धन धान्य की कोई भी कमी नहीं होती है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से मिलता है कौन सा लाभ?
शिवलिंग पर अक्सर जल और बिल्वपत्र तो चढ़ाया ही जाता है लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ अर्पित किया जाता है। शिवजी का कई प्रकार के द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। सभी तरह के अभिषेक का अलग-अलग फल दिया गया है। शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है? जानिए- श्लोक :-
जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै।
दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।।
मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।
पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।
जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।
घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।
तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशय:।।
प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।
केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषत:।।
शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।
श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!
सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!
पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधि: सर्पिषा तथा।।
जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।
पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।।
महलिंगाभिषेकेन सुप्रीत: शंकरो मुदा।
कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।
– जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि होती है।
– कुशा जल से अभिषेक करने पर रोग व दु:ख से छुटकारा मिलता है
– दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है
– गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
– मधुयुक्त जल से अभिषेक करने पर धनवृद्धि होती है।
– तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
– इत्र मिले जल से अभिषेक करने से रोग नष्ट होते हैं।
– दूध से अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति होगी। प्रमेह रोग की शांति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
– गंगा जल से अभिषेक करने से ज्वर ठीक हो जाता है।
– दूध-शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।
– घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होता है।
– सरसों के तेल से अभिषेक करने से रोग तथा शत्रुओं का नाश होता है।
– शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से पाप क्षय होते हैं। इसके अलावा,,,,,
1. शिवलिंग पर कच्चे चावल चढ़ाने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से समस्त पापों का नाश होता है।
3. शिवलिंग पर जौ चढ़ाने से लंबे समय से चली रही परेशानी दूर होती है।
4. शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है।
5. शिवलिंग पर जल चढ़ाने से परिवार के किसी सदस्य का तेज बुखार कम हो जाने की मान्यता है।
6. शिवलिंग पर दूध में चीनी मिलाकर चढ़ाने से बच्चों का मस्तिष्क तेज होता है।
7. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
8. शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाने से मनुष्य को भौतिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
9. शिवलिंग पर शहद अर्पित करना करने से टीबी या मधुमेह की समस्या में राहत मिलती है।
10. शिवलिंग पर गाय के दूध से बना शुद्ध देसी घी चढ़ाने से शारीरिक दुर्बलता से मुक्ति मिलती है।
11. शिवलिंग पर आंकड़े के फूल चढ़ाने से सांसारिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
12. शिवलिंग पर शमी के पेड़ के पत्तों को चढ़ाने से सभी तरह के दु:खों से मुक्ति प्राप्त होती है।
उपरोक्त कार्य सोमवार, त्रयोदशी, शिवरात्रि या श्रावण के मास में अथवा नित्य करेंगे, तो लाभ मिलेगा।
ये पांच चीजें कभी अर्पित ना करें बाबा को शिव को!
शंख: – भगवान विष्णु और ब्रह्मा दोनों की पूजा में शंख का प्रयोग होता है लेकिन शिवजी का अभिषेक कभी भी शंख से ना करें। कहते हैं जबसे शंकर जी ने शंखचूड़ राक्षस का वध किया है तबसे उनकी पूजा में शंख का निषेद्ध हो गया है।
तुलसी: – शिव जी की पूजा में तुलसी की पत्ती का प्रयोग भी नहीं होता, क्योंकि उन्हें वृंदा रूप में तुलसी के पति जलंधर का भी वध किया था। इसीलिए शिव के भोग में बेलपत्र चढ़ता है तुलसी नहीं।
खंडित अक्षत: – वैसे तो कोई खंडित चीज किसी भगवान पर नहीं चढ़ानी चाहिए पर जब अक्षत अर्पण करने की बात आती है तो हम अक्सर ध्यान नहीं देते की कहीं वे टूटे हुए तो नहीं हैं। शिव जी की पूजा में विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखें कि उन्हें टूटे चावल यानि खंडित अक्षत ना चढ़ायें।
केतकी पुष्प: – एक बार शिव से झूठ बोलने दंड केतकी आज तक भुगत रही है इसलिए शिव जी पर केतकी का पुष्प अर्पित नहीं होता वैसे शिव पर गुड़हल का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
लाल चंदन: – शिव बैरागी हैं और उन पर बैराग्य का प्रतीक केसरिया या पीला चंदन चढ़ाया जाता है। लाल चंदन उन पर बिलकुल नहीं चढ़ाना चाहिए।

