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कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी: लखनऊ के दो वकील भी उज्जैन से पुलिस हिरासत में

उज्जैन के महाकाल मंदिर से कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ के दो वकीलों को भी उज्जैन से पुलिस हिरासत में लिया गया है। ये दोनों वकील निजी गाड़ी से उज्जैन गए थे। पुलिस उनसे विकास दुबे से कनेक्शन की जांच कर रही है।

पुलिस को आशंका है कि कहीं इन्होंने ही तो विकास दुबे की मदद नहीं की क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देते हुए विकास मध्य प्रदेश कैसे पहुंच गया ये बड़ा सवाल है। पुलिस उसके गुर्गों का सफाया करने में लगी रही और विकास दुबे उज्जैन पहुंच गया। अब सवाल उठ रहा है आखिर वहां तक पहुंचने में विकास की मदद कौन कर रहा था।

कहा तो यह जा रहा था कि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे सभी राज्यों की पुलिस विकास दुबे को लेकर हाई अलर्ट पर थी, बावजूद इसके वह कानपुर से दिल्ली होते हुए हरियाणा के फरीदाबाद शहर जा पहुंचा था। इसके बाद हरियाणा से मध्यप्रदेश तक आ गया। यहां पुलिस की चुस्ती और मुस्तैदी पर सवाल उठना लाजमी भी है।

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Posted by News & Feature Network: Regional News on Wednesday, July 8, 2020

आखिर राज्यों की सीमा और टोल नाकों पर तैनात पुलिसकर्मी और सीसीटीवी कैमरे क्या केवल खानापूर्ति के लिए लगे हुए थे।

बुधवार तक विकास दुबे की लोकेशन फरीदाबाद और एनसीआर बताई जा रही थी लेकिन यहां से वो उज्जैन कैसे पहुंचा, ये सवाल अब भी अनसुलझा है। फरीदाबाद से उज्जैन तक का सफर सड़क मार्ग से करने पर कम से कम 14 घंटे का समय लगता है।

दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 774 किलोमीटर है। अब इस सवाल का जवाब या तो पुलिस दे सकती है या फिर खुद विकास की वो उज्जैन कैसे पहुंचा।विकास को पकड़ने में मंदिर परिसर की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि सबसे पहले मंदिर के सुरक्षाकर्मी ने ही विकास दुबे को पहचाना था। सुरक्षाकर्मी लखन यादव का कहना है कि विकास के साथ दो-तीन अन्य लोग भी थे। 

जब लखन यादव को उनपर शक हुआ तो उनकी आठ लोगों की टीम ने विकास व उसके साथियों पर कुछ देर तक नजर रखी। उन्होंने ही पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता।

चर्चा यह भी है कि विकास दुबे ने जानबूझ कर सुनियोजित तरीके से महाकाल मंदिर में अपनी गिरफ्तारी दी है, ताकि वह पुलिस एनकाउंटर से बच जाए। उसने अपने असली नाम से ही परिसर में प्रवेश करने के लिए पर्ची बनवाई। 

इसके बाद भगवान के दर्शन किए और अंदर जाकर खुद ही चिल्ला-चिल्ला कर बोलने लगा कि, “मैं विकास दुबे हूं… कानपुर वाला!” इसपर सुरक्षाकर्मियों ने उसे पहचान लिया और पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद गिरफ्तारी हुई।

हालांकि पुलिस इस संबंध में उससे पूछताछ कर रही है।

 

 

News-Desk

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