Indonesia के द्वीप बाली द्वीप पर Goa Gajah मंदिर
Indonesia के द्वीप बाली द्वीप पर हिन्दुओं के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां एक गुफा मंदिर भी है। इस गुफा मंदिर को गोवा गजह गुफा और एलीफेंटा की गुफा कहा जाता है।
19 अक्टूबर 1995 को इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया गया। यह गुफा भगवान शंकर को समर्पित है। यहां 3 शिवलिंग बने हैं। देश-विदेश से पर्यटक इसे देखने आते हैं।
Indonesia के प्रांत बाली के उबुद इलाके के छोटे से गांव बेदुलु में स्थित Goa Gajah मंदिर बेहद रहस्यमय है. यह बाली द्वीप की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रमाण के रूप में खड़ा है. मंदिर को हाथी गुफा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह रहस्यों से घिरा एक प्राचीन स्थल है. मंदिर की जटिल नक्काशी और शांत वातावरण इसे एक बेहतरीन गंतव्य बनाती है.
इंडोनेशिया में वैसे भी हिन्दू धर्म का काफी प्रचलन है |इस मदिर को कई लोग गोवा गजह और एलीफैंटा केव के नाम से भी जाना जाता है |1995 में मंदिर को दुनिया के धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त हुई | ये मंदिर शिव को समर्पित है | यहाँ 3 शिवलिंग मोजूद हैं |दुनिया भर से कई पर्यटक इस मंदिर को देखने आते है |
Goa Gajah मंदिर की उत्पत्ति का इतिहास बेहद रोचक है. ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर 9वीं शताब्दी में क्षेत्र में रहने वाले भिक्षुओं के लिए एक ध्यान अभयारण्य के रूप में बनाया गया था. इसके आगे वाले भाग की जटिल नक्काशी पौराणिक आकृतियों और जानवरों को दर्शाती है. मंदिर पर हिंदू और बौद्ध धर्म का अत्यधिक प्रभाव है.
Goa Gajah मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक नक्काशीदार राक्षस जैसा चेहरा है, जो पॉजिटिव आत्मा भोमा का प्रतीक है. मंदिर के केंद्रीय कक्ष में एक ध्यान गुफा है, जहां हिंदू देवता भगवान गणेश की एक मूर्ति है. यह गुफा इस क्षेत्र में कैसे और कब प्रकट हुई, यह कोई नहीं जानता. गुफा की उत्पत्ति अभी भी एक रहस्य है. हालांकि, एक कहानी के अनुसार, इसका निर्माण केबो इवा नामक दैत्य के नाखून से हुआ था. इस कहानी के अनुसार, मंदिर लगभग 11वीं शताब्दी का है.
Goa Gajah मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों के लिए अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है. मंदिर के नाम की उत्पत्ति पास की पेटनु नदी से हुई है, जिसका पानी मंदिर के परिसर से होकर बहा करता था, जो हाथी के आकार जैसा दिखता था. तभी इसको हाथी गुफा मंदिर के नाम से भी जाना जाने लगा.

