फास्ट ट्रैक विशेष Courts ने 30 जून 2014 तक 1.74 लाख मामलों को किया निपटारा
दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष Courts का गठन किया है. केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय विशेष अदालतों के गठन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्यों को विशेष अदालत के गठन के लिए फंड मुहैया कराता है. मंत्रालय के अनुसार विशेष अदालतों के गठन के बाद 30 जून 2014 तक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज 1.74 लाख मामलों का निपटारा किया गया है.
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2018 में कठोर सजा का प्रावधान किया है. कानून मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 के बाद से केंद्र प्रायोजित योजना के तहत देश में 1023 फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया है, जिसमें 389 विशेष तौर पर पॉक्सो से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाये गये हैं. इन अदालतों में एक न्यायिक अधिकारी के अलावा 7 कर्मचारी तैनात हैं. देश के कुल 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में से 28 राज्य इस योजना से जुड़े हुए हैं.
पुडुचेरी ने विशेष आवेदन देकर इस योजना में शामिल होने की इच्छा जाहिर की और मई 2023 से वहां एक पॉक्सो Court काम कर रही है. विशेष अदालतों के गठन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना शुरुआत में सिर्फ 2019-20 से 2020-21 के लिए थी और इसके लिए 767.25 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था. जिसमें से केंद्र को निर्भया फंड के तहत 474 करोड़ रुपये का योगदान देना था. लेकिन केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को दो साल के लिये बढ़ा दिया और इसके लिए 1572.86 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया.

