पाकिस्तान में 13 साल की ईसाई लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन-निकाह कराया
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की की घटनाओं की खबरें लगातार आती रहती हैं। इस बीच, पाकिस्तान की एक अदालत ने एक नाबालिग ईसाई लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कराकर इस्लाम कुबूल करने के आरोप में एक मौलवी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
नाबालिग लड़की ने 16 अक्तूबर को जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में काजी मुफ्ती अहमद जान रहीम के साथ ही अपने पति और उसके चार अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। नाबालिग लड़की की ओर से मामला दर्ज कराए जाने के बाद से मौलवी फरार है।
यह मौलवी एक अन्य मामले में भी धर्मांतरण और एक अन्य लड़की का जबरन निकाह पढ़वाने के लिए भी आरोपित है। लिहाजा, कराची में एक मजिस्ट्रेटी अदालत ने इस मौलवी के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी किया है।
यह मामला दर्ज कराने वाली ईसाई लड़की ने आरोप लगाया है कि उसे अगवा कर उससे जबरन इस्लाम कुबूल कराया गया। जबरन उसका निकाह मुहम्मद इमरान नाम के एक आदमी से कराया दिया गया।
पिछले महीने ही अदालत ने रहीम और चार अन्य संदिग्ध के खिलाफ एक जमानती वारंट जारी किया था। जज ने पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपित मौलवी को 16 नवंबर तक अदालत में पेश करे।
अदालत ने प्रथम दृष्टया गवाहों और दस्तावेजों में लड़की के इस दावे को पुष्ट पाया कि इमरान से कराए गए जबरन निकाह के समय उसकी उम्र महज 13 साल की ही थी। नाबालिग लड़की ने इस्लाम अपनाने से भी इनकार किया है।
चिकित्सकों के एक पैनल ने भी अपनी जांच में अदालत के समक्ष इस बात की पुष्टि की निकाह के समय लड़की की उम्र सिर्फ 13 से 14 साल के बीच थी।
बता दें कि पाकिस्तान में हिंदुओं और ईसाई लड़कियों को अगवाकर उनका जबरन निकाह करने का सिलसिला हैवानियत की हद पार कर गया है।

