उत्तर प्रदेश

Kanpur: फर्जी काल सेंटर चलाकर ठगी करने वाले जीजा-साले अभिषेक और अरुण समेत दो लड़कियां गिरफ्तार

Kanpur क्राइम ब्रांच पुलिस ने हाल ही में एक बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी कॉल सेंटर चलाकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने के नाम पर ठगी की जा रही थी। इस मामले में गिरफ्तार किए गए अपराधियों में अभिषेक और अरुण नामक जीजा-साले समेत दो लड़कियां शामिल हैं। यह अपराध शोभा टॉवर, सर्वोदय नगर, काकादेव कानपुर नगर के तीसरे फ्लोर पर स्थित फर्जी कॉल सेंटर से संचालित हो रहा था।

उन्हें क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम करने के लिए 8 से 10 हजार रुपये के गिफ्ट वाउचर देने लालच देते थे. फिर क्रेडिट कार्ड का डीटेल्स लेकर ओटीपी मांग लेते थे या फिर किसी थर्ड पार्टी एप को डाउनलोड कराकर खुद ओटीपी हासिल कर लेते थे. क्रेडिट कार्ड से अकाउंट में पैसे डालने के लिए विभिन्न पेमेन्ट सर्विस एप का उपयोग करके फर्जी खातों में पैसे ट्रांसफर कर लेते थे. गिरफ्तार आरोपी अरूण ने दिल्ली में रहकर कॉल सेन्टर में दो साल काम किया था.

अरुण 2018 में साइबर फ्रॉड करने के मामले में तिहाड़ जेल जा चुका है. 2020 में कानपुर वापस चला आया. दिल्ली में ही इस काम के बारे में सीखा था. बाद में कानपुर में आकर काम शुरू किया और अपने साले अभिषेक को अपने साथ काम पर लगा लिया. अरूण ने इस काम को करने के लिए अभिषेक को ट्रेंड किया और अपने साथ ले लिया. यह लोग मिलकर कॉल सेन्टर चलाकर घटना को अंजाम देते थे. इनके द्वारा अब तक पिछले 3 साल में करोड़ों रुपये की ठगी की गई है.

डीसीपी साइबर क्राइम आशीष श्रीवास्तव ने बताया, ‘कानपुर पुलिस की साइबर सेल ने बहुत अच्छा काम किया है. एनसीआरपी पोर्टल पर किस स्थान से सबसे ज्यादा फ्रॉड हो रहे हैं, उसे एक हॉट स्पॉट के रूप में दिखाया जाता है. इसी क्रम में साइबर सेल को पता चला कि शहर में एक कॉल सेंटर है जिसका हॉट स्पॉट डेवलप हुआ है. 84 नंबरों से देश के अलग-अलग हिस्सों में शिकायत की गई थी.

तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़ितों से बात की गई. पता चला कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने, रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने के नाम पर ठगी की गई है. नंबरों के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि कुछ नंबर शहर में ही एक्टिव हैं. मथुरा के एक पीड़ित के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कॉल सेंटर पर छापा मारा. छापेमारी में मुख्य रूप से अभिषेक और अरुण को गिरफ्तार किया गया. इनके साथ दो लड़कियां भी हैं.

अपराध का तरीका

अपराधियों ने इंडसइंड बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों को फोन कर उन्हें क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम करने के लिए 8 से 10 हजार रुपये के गिफ्ट वाउचर देने का लालच दिया। फिर, क्रेडिट कार्ड का विवरण लेकर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) मांगते थे या फिर किसी थर्ड पार्टी एप को डाउनलोड कराकर खुद ओटीपी हासिल कर लेते थे। इसके बाद, वे क्रेडिट कार्ड से विभिन्न पेमेन्ट सर्विस एप का उपयोग करके फर्जी खातों में पैसे ट्रांसफर कर लेते थे।

अपराधियों का इतिहास

गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी अरुण ने दिल्ली में रहकर कॉल सेंटर में दो साल काम किया था और 2018 में साइबर फ्रॉड करने के मामले में तिहाड़ जेल भी जा चुका है। 2020 में कानपुर वापस आने के बाद उसने यह काम यहां शुरू किया और अपने साले अभिषेक को भी इसमें शामिल कर लिया। दोनों ने मिलकर कानपुर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर कई लोगों से ठगी की।

साइबर अपराध का सामाजिक प्रभाव

साइबर अपराध, विशेष रूप से इस प्रकार के फर्जी कॉल सेंटर, समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ये न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोगों के विश्वास और सुरक्षा की भावना को भी क्षति पहुंचाते हैं। इस प्रकार के अपराधों का शिकार अधिकांशतः वे लोग होते हैं जो तकनीकी रूप से बहुत अधिक जागरूक नहीं होते हैं।

समाजिक सुरक्षा के उपाय

साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। लोगों को अपने क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग जानकारी को साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। बैंक और वित्तीय संस्थाओं को भी अपने ग्राहकों को इस प्रकार के अपराधों के प्रति जागरूक करना चाहिए और समय-समय पर सुरक्षा के उपायों की जानकारी देनी चाहिए।

पुलिस और साइबर सेल की भूमिका

इस प्रकार के अपराधों को रोकने में पुलिस और साइबर सेल की भूमिका अहम होती है। कानपुर पुलिस की साइबर सेल ने इस मामले में शानदार काम किया है। एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर उन्होंने इस फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाया और त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य अपराधियों को गिरफ्तार किया।

कानूनी प्रावधान और सुधार

साइबर अपराधों के मामलों में कानूनी प्रावधानों को और सख्त करने की जरूरत है। इसके अलावा, इन अपराधों की जांच और सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

कानपुर में हुए इस फर्जी कॉल सेंटर के पर्दाफाश ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराध किस हद तक फैल चुका है और इसके रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जनता को जागरूक करने, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और कानून को सख्त बनाने से ही हम इस प्रकार के अपराधों को नियंत्रित कर सकते हैं। साइबर अपराध से निपटने के लिए हमें एकजुट होकर काम करने की जरूरत है, ताकि हमारे समाज को इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रखा जा सके।

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