CJI Farewell: जस्टिस DY Chandrachud ने विदाई समारोह में ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब, शायरी में उड़ाया मजाक
CJI Farewell भारत के सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस DY Chandrachud का कार्यकाल 10 नवंबर 2024 को समाप्त होने जा रहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित एक विशेष विदाई समारोह में जस्टिस चंद्रचूड़ को उनके सहयोगियों और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने भावभीनी विदाई दी। इस कार्यक्रम में जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया और अपनी यात्रा को लेकर कुछ दिलचस्प बातें भी कीं। विदाई के इस अवसर पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे, जिनमें उनकी सेवा, उनके आलोचकों के प्रति सम्मान और भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा पर जोर दिया।
आलोचकों को शायरी में जवाब, और ट्रोल्स पर चुटकी
अपने कार्यकाल के दौरान DY Chandrachud को न केवल न्यायिक सुधारों और फैसलों के लिए सराहा गया, बल्कि उन्हें लगातार आलोचनाओं और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। इस विदाई समारोह में जब सीजेआई से उनके आलोचकों और ट्रोल्स के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि शायद मैं अब तक के सबसे ज्यादा ट्रोल किए जाने वाले जज हूं, लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
इसके साथ ही उन्होंने अपनी बात को एक शायरी के माध्यम से और भी प्रभावशाली तरीके से पेश किया। उन्होंने मशहूर शायर बशीर बद्र की एक प्रसिद्ध उर्दू शायरी का हवाला देते हुए कहा, “मुखालिफ से मेरी शख्सियत संवरती है, मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूं।”
यह शायरी सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े, और जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे मजाकिया अंदाज में कहा कि “सोमवार से वो लोग जो मुझे ट्रोल करते थे, बेरोजगार हो जाएंगे।” उनकी इस टिप्पणी ने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया, और साथ ही यह भी साफ किया कि वे अपने आलोचकों के प्रति न केवल संजीदा हैं, बल्कि उनका आदर भी करते हैं।
जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल और उनके योगदान
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवाओं के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले दिए, जिनका देश की न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने अपनी न्यायिक यात्रा की शुरुआत 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से की थी, और इसके बाद वह 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल न्यायपालिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा, और उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने कई संवेदनशील मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उनकी अध्यक्षता में, सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए, जिनमें से कई ने भारतीय समाज को नई दिशा दी। जिनमें से सबसे प्रमुख निर्णयों में ‘तीन तलाक’ को असंवैधानिक ठहराना और ‘एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों’ को मान्यता देना शामिल है। इन फैसलों से जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह साबित किया कि उनकी न्यायिक सोच न केवल समग्र है, बल्कि सामाजिक और मानवाधिकारों के मामले में भी गहरी समझ रखती है।
जस्टिस चंद्रचूड़ का संवेदनशील और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण
जस्टिस चंद्रचूड़ का मानना है कि भारतीय न्यायपालिका का कार्य केवल कानून का पालन करना नहीं है, बल्कि यह समाज के असल मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाने का है। उनका यह दृष्टिकोण अक्सर उनके फैसलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। उनके कार्यकाल में, न्यायपालिका ने कई बार सरकार के फैसलों को चुनौती दी और नागरिकों के अधिकारों को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उन्हें आलोचना और प्रशंसा दोनों का सामना करना पड़ा।
हालांकि, उनके आलोचकों के बावजूद, जस्टिस चंद्रचूड़ हमेशा अपने फैसलों में स्पष्ट और निष्पक्ष रहे। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि कानून के सामने सभी समान हों, चाहे वह किसी भी वर्ग या समुदाय से हों। उनके फैसलों ने भारतीय समाज में कई बदलावों की नींव रखी।
10 नवंबर को होगा जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल समाप्त
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर 2024 को समाप्त हो जाएगा, और इस दिन के बाद वह सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से विदा ले लेंगे। उनकी विदाई के बाद इस पद पर नए मुख्य न्यायाधीश का चयन किया जाएगा, जो जस्टिस चंद्रचूड़ द्वारा छोड़े गए महान कार्य को आगे बढ़ाएंगे।
इस विदाई समारोह में जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपनी पत्नी और परिवार के सदस्यों का भी धन्यवाद किया, जिनका समर्थन हमेशा उनके साथ रहा। उन्होंने कहा कि उनका परिवार उनके लिए हमेशा एक प्रेरणा स्रोत रहा है, और उनके बिना यह सफर संभव नहीं हो सकता था।
सीजेआई चंद्रचूड़ की विदाई से जुड़ी अहम बातें
जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपनी विदाई के दौरान कुछ और महत्वपूर्ण बातें भी साझा कीं। उन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा पर भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि समाज में न्याय, समानता और मानवाधिकारों का संरक्षण करना भी है।
इसके अलावा, जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट को और भी अधिक पारदर्शी और जनता के करीब लाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि न्यायपालिका को हर नागरिक का विश्वास जीतने के लिए खुद को और भी सशक्त बनाना होगा।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल भारतीय न्यायपालिका के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा रही है। उनका योगदान न केवल सुप्रीम कोर्ट तक सीमित है, बल्कि उनके फैसले और विचार देश भर में न्याय और समानता की दिशा में एक प्रेरणा बने रहेंगे। उनकी विदाई के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी जगह आने वाला मुख्य न्यायाधीश किस दिशा में न्यायपालिका को लेकर आगे बढ़ेगा।
लेकिन एक बात तो तय है, जस्टिस चंद्रचूड़ के विदाई समारोह के दौरान उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों की जो छवि सामने आई, वह हमेशा भारतीय न्याय व्यवस्था में उनके योगदान को याद रखने के लिए पर्याप्त होगी।

