Ghaziabad में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज से गुस्से में वकील, पांचवे दिन भी जारी हड़ताल और उग्र विरोध
Ghaziabad में पुलिस द्वारा वकीलों पर की गई निर्मम लाठीचार्ज के बाद न्यायिक प्रणाली में भूचाल सा आ गया है। जिला न्यायधीश द्वारा एक मामूली विवाद में अधिवक्ताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया और उसके विरोध में अधिवक्ताओं द्वारा प्रदर्शन पर पुलिस बुलाई गई, जिसने निहत्थे वकीलों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया। इस घटना के विरोध में गाजियाबाद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में वकील लामबंद हो गए हैं। बार एसोसिएशन गाजियाबाद के साथ-साथ हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर राज्यभर के अधिवक्ताओं ने अपने काम से विरत रहते हुए हड़ताल का ऐलान किया है।
विरोध प्रदर्शन के चौथे दिन भी खतौली तहसील के अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से पूरी तरह से दूर रहे और सोमवार से शुरू हुई हड़ताल बुधवार व गुरुवार तक जारी रही। धरने में अधिवक्ता समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें अध्यक्ष सरदार जितेंद्र सिंह ने विरोध में अपनी बात रखते हुए कहा कि वकील न्याय दिलाने के कार्य में खुद को न्याय का रक्षक मानते हैं।
लेकिन पुलिस और प्रशासन का बर्ताव न्याय के प्रति उनके विश्वास को ठेस पहुंचा रहा है। महासचिव सचिन आर्य ने अपने संबोधन में पुलिसकर्मियों की इस हरकत की तीव्र आलोचना की और आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की मांग की। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दोषियों पर कठोर कार्यवाही नहीं हुई, तो बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आदेशानुसार राज्यभर में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।
विरोध की गूंज: वकीलों ने किया एकजुट प्रदर्शन
गाजियाबाद में अधिवक्ताओं के साथ हुए बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में बार एसोसिएशन के साथ ही सिविल बार एसोसिएशन और अन्य संस्थान भी विरोध में शामिल हो गए हैं। मुजफ्फरनगर की कचहरी में आज सैकड़ों वकील धरना स्थल पर एकत्रित हुए और पुलिस की इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई का कड़े शब्दों में विरोध किया। सिविल बार एसोसिएशन, मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष ब्रिजेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि जिस तरीके से न्यायधीश और पुलिस ने अधिवक्ताओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाई है, उसके खिलाफ वकील अब शांत नहीं बैठेंगे। महासचिव सुरेन्द्र कुमार मलिक ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बार-बार हो रही हैं और वकीलों के सम्मान और सुरक्षा की चिंता करना अब आवश्यक हो गया है। उन्होंने अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए सरकार पर दबाव बनाया कि इस प्रकार के उत्पीड़न पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम की मांग में जोर
अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश में वकीलों की सुरक्षा के लिए ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ को लागू किया जाए। उनका मानना है कि इस कानून के अभाव में अधिवक्ताओं को आए दिन पुलिस और प्रशासन की बर्बरता का सामना करना पड़ता है, जो न केवल असंवैधानिक है बल्कि मानवीयता के भी खिलाफ है। वकीलों ने यह भी कहा कि उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं, जिनमें रामचंद्र सैनी, जितेंद्र त्यागी, नवीन उपाध्याय, एवं सुलेमान खान जैसे वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं, ने एक सुर में इस मुद्दे पर कठोर कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं ने कहा कि वे अपने मुवक्किलों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित हैं, लेकिन जब तक वे स्वयं सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक वे अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकते।
अन्य शहरों में भी उग्रता: विरोध की लहर
गाजियाबाद प्रकरण के बाद वकीलों में प्रदेशव्यापी गुस्सा फूट पड़ा है। लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, मेरठ, और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने न केवल लाठीचार्ज की घटना की निंदा की, बल्कि यह भी मांग की कि वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील विशेष रूप से आक्रोशित हैं और केंद्रीय संघर्ष समिति के नेतृत्व में इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं।
वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही ध्यान नहीं दिया गया, तो वे सभी अपने-अपने शहरों में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे। इस प्रदर्शन को लेकर वकीलों में असंतोष इस कदर गहरा हो चुका है कि वे ‘आर-पार की लड़ाई’ के लिए भी तैयार हैं। बार एसोसिएशन और केंद्रीय संघर्ष समिति ने कहा है कि यदि शीघ्र ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
वकीलों का कहना: ‘न्याय के रक्षकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं’
वकील समाज इस घटना से बेहद दुखी और आक्रोशित है। विरोध प्रदर्शन में अधिवक्ता संत कुमार ने कहा, “जब न्याय के रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज को न्याय कैसे मिलेगा?” अन्य अधिवक्ता जैसे अजय राठी और आकाश सैनी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वकीलों के मान-सम्मान की लड़ाई उनकी प्राथमिकता है और वे इसे हर हालत में जारी रखेंगे। इस घटना के बाद अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे संघर्ष करते रहेंगे और अपने साथियों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
अधिवक्ताओं की मांग पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण
इस पूरे प्रकरण के बाद अब सबकी नजर सरकार पर टिकी हुई है। क्या उत्तर प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं की मांगों पर ध्यान देगी और उनकी सुरक्षा के लिए अधिनियम को लागू करेगी? क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।

