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बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से पहले बड़ा अपडेट!Bangladesh के मुखिया यूनुस और पीएम मोदी की मुलाकात पर क्यों टिकी हैं सबकी नजरें? जानें पूरा विवाद!

नई दिल्ली: Bangladesh के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली संभावित मुलाकात को लेकर राजनयिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अगले सप्ताह बैंकॉक में होने वाले बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग) शिखर सम्मेलन से पहले यह मीटिंग दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, यूनुस इस मुलाकात को लेकर काफी उत्सुक हैं।

पीएम मोदी का खत और मुक्ति संग्राम का जिक्र

इस बीच, Bangladesh के राष्ट्रीय दिवस पर पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस को एक पत्र लिखकर बधाई दी है। इस पत्र में मोदी ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका को याद किया और दोनों देशों के बीच साझा इतिहास व सहयोग पर जोर दिया। पत्र में लिखा गया, “हमारे संबंधों की नींव शांति, स्थिरता और समृद्धि की आकांक्षाओं पर टिकी है। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना आज भी हमारे रिश्तों को मजबूती देती है।”

यह पत्र ऐसे समय में आया है, जब दोनों नेताओं के बीच बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। बांग्लादेश सरकार ने भारत को एक प्रस्ताव भेजकर इस बैठक का अनुरोध किया है, लेकिन अभी तक भारत की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

बांग्लादेश की ओर से स्पष्टीकरण: “हम पूरी तरह तैयार!”

बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीम उद्दीन ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार इस मुलाकात के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हमने भारत को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा है और अब हम उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक अच्छा मौका होगा।”

यूनुस की यह यात्रा उनके चीन और थाईलैंड दौरे का हिस्सा है, जिसमें वह बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। अगर भारत सरकार इस मुलाकात को हरी झंडी दे देती है, तो यह बांग्लादेश में हुए हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद दोनों देशों के बीच पहली बड़ी बैठक होगी।

क्या है बिम्सटेक शिखर सम्मेलन का महत्व?

बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के 7 देशों (भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) का एक महत्वपूर्ण संगठन है, जो आर्थिक और सामरिक सहयोग को बढ़ावा देता है। इस बार का शिखर सम्मेलन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में 2-4 अप्रैल को होना है, जहां सभी सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।

अगर पीएम मोदी और यूनुस की मुलाकात होती है, तो इस पर पूरे क्षेत्र की नजर होगी, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का संकेत दे सकती है।

क्या है पूरा मामला?

बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त में सत्ता परिवर्तन हुआ था, जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद छोड़ दिया और वह भारत चली गईं। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में कुछ खटास आई थी। ऐसे में, यूनुस और मोदी की बैठक न सिर्फ राजनीतिक, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को भी नई गति दे सकती है।

अब क्या होगा आगे?

अभी तक भारत सरकार ने इस मुलाकात पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैंकॉक में दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हो सकती है। अगर यह मुलाकात होती है, तो यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश होगा।

फिलहाल, सभी की नजरें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या पीएम मोदी और यूनुस की मुलाकात हो पाएगी? या फिर यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला जाएगा? जल्द ही इस सवाल का जवाब मिल सकता है।


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