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AI और IoT से ग्रामीण भारत में विकास की नई क्रांति: Shivraj Singh Chauhan की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली। कृषि भवन में शुक्रवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय मैराथन बैठक में ग्रामीण विकास एवं कृषि परिवर्तन को तकनीकी आधार देने की योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chauhan की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब समय आ गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों को कृषि और जलग्रहण विकास योजनाओं में सशक्त रूप से जोड़ा जाए।

बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मृदा एवं नमी संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और किसानों के लिए सटीक सलाह प्रणाली विकसित करने के लिए उन्नत तकनीकी ढांचा आवश्यक है। इसके अंतर्गत एक निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System) विकसित की जाएगी, जो ग्राम स्तर तक कृषि संबंधी निर्णयों को सरल, प्रभावी और डेटा आधारित बनाएगी।


जल संरक्षण योजनाओं को जनांदोलन बनाने की वकालत

शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जलग्रहण विकास घटक (PMKSY-WDC) को जनांदोलन का रूप देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि “इन योजनाओं में सरकारी भागीदारी के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट्स और आम जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंगशेड विकास कार्यक्रम लागू करने की दिशा में विचार किया गया ताकि सूखे महीनों में भी जल उपलब्धता बनी रहे। यह पहल नदी प्रवाह के पुनर्जीवन में मदद करेगी, जिससे अंततः मैदानी क्षेत्रों में जल संकट से राहत मिल सकेगी।


डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण की समीक्षा

बैठक के दौरान डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने निर्देश दिए कि जून 2025 तक देश के सभी भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल हो जाने चाहिए।
अब तक:

  • 99% भूमि अधिकार अभिलेख कम्प्यूटरीकृत किए जा चुके हैं

  • लगभग 97% भूकर मानचित्र डिजिटाइज हो चुके हैं

  • 95% उप रजिस्ट्रार कार्यालय डिजिटल हो चुके हैं

साथ ही, नक्शा कार्यक्रम के अंतर्गत देश के 29 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में 152 शहरी निकायों में कार्य चल रहा है, जिनमें से 61 में एरियल सर्वे पूरा हो चुका है। बाकी स्थानों पर जून 2025 तक सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश दिए गए।


भू अभिलेखों में आधार, मोबाइल और पता अनिवार्य होगा

मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए भूस्वामी का आधार नंबर, मोबाइल नंबर और पता रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया को सरल बनाने और जनता के लिए सुलभ बनाने के लिए राज्यों के साथ समन्वय की बात कही गई।


मिशन अमृत सरोवर बना ग्रामीण भारत की आशा

बैठक में मिशन अमृत सरोवर की समीक्षा भी की गई। यह योजना जल संरक्षण और सतत विकास के लिए लागू की गई थी, जिसके तहत 50,000 सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य था। मंत्री ने गर्व के साथ बताया कि अब तक 68,000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा हो चुका है

इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें:

  • 80,000 से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया

  • 65,000 से अधिक उपयोगकर्ता समूह सक्रिय हुए

  • इन सरोवरों के माध्यम से कृषि, मत्स्य पालन, पर्यटन और मनोरंजन जैसी आजीविका गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है

यह न केवल जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है बल्कि यह सामुदायिक भागीदारी और रोजगार सृजन का भी प्रभावी माध्यम बन चुका है।


तकनीक से गांव को मिलेगा नया जीवन

इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार अब ग्रामीण भारत को स्मार्ट टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए गंभीर है। AI और IoT का उपयोग सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब कृषि, जल प्रबंधन, भूमि रिकॉर्ड और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी यह तकनीक मजबूती देगी।

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